G7 समिट में मोदी-ट्रंप की मुलाकात: ‘आपके पत्रकार मेरे वालों से कहीं बेहतर हैं’, द्विपक्षीय बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिकी मीडिया पर तंज

US President Donald Trump at G7 Summit in Evian-les-Bains, France. (Photo: Reuters)

एवियन-लेस-बैंस (फ्रांस): फ्रांस के खूबसूरत रिसॉर्ट शहर एवियन-लेस-बैंस में आयोजित हो रहे ग्रुप ऑफ सेवन (G7) शिखर सम्मेलन के इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय मुलाकात ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। करीब 16 महीनों के लंबे अंतराल के बाद हुई इस आमने-सामने की बैठक में जहां दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा हुई, वहीं एक पल ऐसा भी आया जिसने पूरे कमरे का माहौल बेहद हल्का-फुल्का कर दिया।

हमेशा अपने बेबाक और चुटीले अंदाज के लिए जाने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मीडिया और पत्रकारों की तारीफ करते हुए अपनी ही घरेलू (अमेरिकी) मीडिया को आड़े हाथों ले लिया। बातचीत की शुरुआत में जब दोनों नेता मीडिया के कैमरों के सामने बैठे थे, तब ट्रंप ने पीएम मोदी की तरफ मुस्कुराते हुए कहा, “आपके पत्रकार मेरे वालों से कहीं बेहतर और अच्छे हैं।” ट्रंप के इस तंज पर पीएम मोदी सहित वहां मौजूद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य, अधिकारी और खुद पत्रकार भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

कैसे शुरू हुआ ‘तारीफ और तंज’ का यह दिलचस्प सिलसिला?

दरअसल, यह पूरा वाकया तब शुरू हुआ जब द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत से ठीक पहले कुछ मिनटों के लिए मीडिया कर्मियों को कमरे के भीतर आने की अनुमति दी गई। वहां मौजूद पत्रकार दोनों वैश्विक नेताओं से व्यापारिक शुल्कों, कूटनीति और वैश्विक संघर्षों पर सवाल पूछने की कोशिश कर रहे थे।

इसी बीच, प्रेस कोर में मौजूद एक पत्रकार ने हाल ही में पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान संघर्ष को शांत कराने की दिशा में अमेरिकी प्रयासों का जिक्र किया। पत्रकार ने राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा, “सर, ईरान संघर्ष में संभावित शांति समझौते के साथ आप इतिहास रचने की कगार पर खड़े हैं।”

इस सकारात्मक टिप्पणी को सुनते ही डोनाल्ड ट्रंप के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान तैर गई। उन्होंने तुरंत उस पत्रकार की तरफ इशारा करते हुए कहा, “मुझे यह व्यक्ति बहुत पसंद आया।” इसके बाद उन्होंने अपने बगल में बैठे प्रधानमंत्री मोदी की तरफ देखा और मजाकिया लहजे में पूछा, “क्या आप जानते हैं कि यह कौन है?” और फिर अपनी बात जोड़ते हुए कहा कि भारतीय या विदेशी पत्रकार अमेरिकी मीडिया की तुलना में उनके प्रति कहीं अधिक उदार और विनम्र हैं।

अमेरिकी मीडिया के साथ ट्रंप का दशक पुराना ‘शत्रुतापूर्ण’ रिश्ता

भले ही G7 समिट के इस हल्के-फुल्के पल ने कुछ देर के लिए तनाव को कम कर दिया, लेकिन ट्रंप का यह बयान उनके और अमेरिकी मुख्यधारा की मीडिया (Mainstream Media) के बीच पिछले एक दशक से चले आ रहे बेहद कड़वे और विवादित रिश्तों को फिर से रेखांकित करता है।

2016 में पहली बार राष्ट्रपति बनने के समय से ही डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिकी पत्रकारों, विशेषकर टेलीविजन एंकरों और बड़े अखबारों के साथ लगातार टकराव रहा है। वह सार्वजनिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से सीधे भिड़ जाने के लिए जाने जाते हैं। ट्रंप अक्सर न्यूयॉर्क टाइम्स, सीएनएन (CNN) और एनबीसी (NBC) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों पर एकतरफा पक्षपात करने का आरोप लगाते रहे हैं और उनके खिलाफ आने वाली किसी भी आलोचनात्मक रिपोर्ट को “फर्जी खबरें” (Fake News) करार देते आए हैं।

विगत वर्षों में ट्रंप के कई ऐसे तीखे विवाद सुर्खियां बन चुके हैं:

  • कैटलन कॉलिन्स (CNN): ट्रंप ने एक बार सीएनएन की एंकर कैटलन कॉलिन्स को सरेआम एक “भ्रष्ट पत्रकार” कह दिया था और दावा किया था कि उनकी आंखों में उनके प्रति नफरत दिखती है।
  • क्रिस्टन वेल्कर (NBC): एनबीसी की पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर को भी ट्रंप की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब उन्होंने इंटरव्यू के दौरान चुनावी दावों और अन्य नीतिगत मुद्दों पर ट्रंप को घेरने की कोशिश की थी।
  • कैथरीन लूसी (Bloomberg): पिछले साल एक प्रेस मीट के दौरान जब ब्लूमबर्ग की पत्रकार कैथरीन लूसी ने जेफ्री एपस्टीन मामले से जुड़े दस्तावेजों को लेकर तीखा सवाल पूछा, तो ट्रंप ने उन्हें “क्वाइट, पिगी” (शांत रहो, पिगी) कहकर चुप कराने की कोशिश की थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना हुई थी।

जहाँ ट्रंप के समर्थक मीडिया पर किए जाने वाले इन हमलों को एक पक्षपाती और स्थापित मीडिया एस्टेब्लिशमेंट के खिलाफ एक जरूरी लड़ाई मानते हैं, वहीं उनके आलोचकों का तर्क है कि स्वतंत्र पत्रकारिता को लगातार बदनाम करने के इन प्रयासों से जनता का मीडिया पर भरोसा कम होता है, जिससे लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर होती है।

मुलाकात के गंभीर मायने: ‘दिखने में फरिश्ता, अंदर से किलर’

मजाक के इस दौर से इतर, दोनों नेताओं के बीच की यह बैठक रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रही। पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक शुल्कों (Tariffs) और रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों को लेकर कुछ खिंचाव देखा जा रहा था। इस बैठक ने दोनों देशों के रिश्तों को “नई गति और नई ऊर्जा” देने का काम किया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की और उन्हें दुनिया के सबसे मजबूत नेताओं में से एक बताया। ट्रंप ने अपने खास अंदाज में कहा, “यह (मोदी) वास्तव में सबसे कठिन नेताओं में से एक हैं। आप इस आदमी को देखिए—यह दिखने में बहुत भले हैं, एक फरिश्ते (Angel) की तरह लगते हैं, लेकिन असल में वह बहुत सख्त और एक किलर (Killer) हैं।” इसके साथ ही ट्रंप ने भारत को सुरक्षा की बड़ी गारंटी देते हुए कहा कि यदि भारत पर कभी भी कोई संकट या हमला होता है, तो अमेरिका हमेशा भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक के दौरान वैश्विक कूटनीति के साथ-साथ जमीनी चिंताओं को भी प्रमुखता से उठाया। हाल ही में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों और ओमान व स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के पास वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों (Seafarers) की दुखद मौत हो गई थी।

पीएम मोदी ने इस मुद्दे को सीधे ट्रंप के सामने रखते हुए कहा कि दुनिया भर के समुद्री व्यापारिक मार्गों पर लाखों भारतीय नाविक अपनी ड्यूटी कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और माना कि यह एक बेहद जोखिम भरा पेशा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अमेरिका और भारत समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। कुल मिलाकर, यह बैठक कूटनीतिक रूप से ठोस और व्यावहारिक रूप से बेहद चर्चा में रहने वाली साबित हुई है।

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