
हरदोई : उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। सपा के हरदोई जिलाध्यक्ष शराफत अली के एक कथित विवादित वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, पार्टी के भीतर और बाहर मचे भारी घमासान को देखते हुए सपा आलाकमान ने बेहद सख्त कदम उठाया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से हरदोई की पूरी जिला कार्यकारिणी के साथ-साथ सभी विंग और प्रकोष्ठों की कमेटियों को भी निरस्त (भंग) कर दिया है। महिला नेताओं के सम्मान और देश की सेवा करने वाली बेटियों से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर पार्टी ने किसी भी तरह की ढिलाई न बरतते हुए यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है।
क्या है पूरा मामला और वायरल वीडियो का सच?
इस पूरे विवाद की शुरुआत शुक्रवार की रात को हुई, जब हरदोई के सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली का करीब 8 मिनट का एक कथित वीडियो और ऑडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित (वायरल) होने लगा। इस वीडियो में कथित तौर पर शराफत अली अपनी ही पार्टी की बेहद वरिष्ठ और कद्दावर महिला नेताओं—पूर्व सांसद ऊषा वर्मा, उनकी जेठानी व पूर्व विधायक राजेश्वरी देवी और उनके पूरे परिवार को लेकर बेहद आपत्तिजनक, अमर्यादित और अशोभनीय टिप्पणियां करते सुनाई दे रहे हैं।
इसके अलावा, वीडियो में सेना (फौज) में भर्ती होने वाली देश की बेटियों को लेकर भी कथित तौर पर बेहद अभद्र और विवादित बातें कही गई थीं। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय कार्यकर्ताओं के वाट्सएप ग्रुप्स में पहुंचा, पार्टी के अंदरूनी खेमे में हड़कंप मच गया। कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में अपनी ही महिला नेतृत्व के प्रति ऐसी अभद्र भाषा को लेकर भारी आक्रोश फैल गया।
मीडिया के सामने भावुक हुईं पूर्व सांसद ऊषा वर्मा
वीडियो के सामने आने के बाद हरदोई के प्रतिष्ठित और प्रभावशाली सियासी घराने से ताल्लुक रखने वाली पूर्व सांसद ऊषा वर्मा का दर्द मीडिया के सामने छलक उठा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए वे इस पूरे घटनाक्रम और अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष की ऐसी संकीर्ण सोच को लेकर बेहद भावुक (रो पड़ीं) हो गईं।
ऊषा वर्मा ने भारी मन से कहा, “हमारा परिवार दशकों से समाजवादी आंदोलन और पार्टी की मजबूती के लिए समर्पित रहा है। राजनीतिक मतभेद या आपसी खींचतान अपनी जगह हो सकती है, लेकिन किसी महिला के आत्मसम्मान और देश की रक्षा करने वाली फौज में जाने वाली बेटियों के खिलाफ इस तरह की घटिया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी भी सभ्य समाज या राजनीतिक दल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।” उन्होंने और पूर्व विधायक राजेश्वरी देवी ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत और सबूत सीधे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रदेश संगठन के सामने रखे और दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
छवि बचाने के लिए सपा प्रदेश नेतृत्व का ‘इंस्टेंट एक्शन’
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर लगातार मुखर रहने वाली समाजवादी पार्टी के लिए यह स्थिति बेहद असहज करने वाली थी। विपक्ष (विशेषकर भाजपा) को बैठे-बिठाए इस मुद्दे पर घेरने का मौका मिल रहा था। मामले की संवेदनशीलता और महिला नेताओं की नाराजगी को देखते हुए सपा आलाकमान ने बिना समय गंवाए ‘डैमेज कंट्रोल’ शुरू कर दिया।
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की ओर से शनिवार को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया, जिसमें स्पष्ट लिखा गया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशानुसार हरदोई जिले के संगठन ढांचे को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है। इसके तहत न केवल मुख्य जिला कार्यकारिणी को निरस्त किया गया, बल्कि पार्टी के जितने भी मोर्चा, सेल और फ्रंटल संगठन (जैसे युवा जनसभा, महिला सभा, छात्र सभा आदि) जिले में सक्रिय थे, उन सभी की कमेटियों को भी एक झटके में समाप्त कर दिया गया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस सख्त कार्रवाई के जरिए शीर्ष नेतृत्व ने पूरे प्रदेश के संगठन को यह कड़ा संदेश दिया है कि महिलाओं के प्रति अभद्र टिप्पणी या अनुशासनहीनता करने वालों को सपा में कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हरदोई की राजनीति पर क्या होगा असर?
हरदोई जिले की राजनीति में पूर्व सांसद ऊषा वर्मा और पूर्व विधायक राजेश्वरी देवी के परिवार का दबदबा काफी पुराना है। उनके ससुर से लेकर परिवार के कई सदस्य लंबे समय तक विधायक और सांसद रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ की गई टिप्पणी ने जिले के बड़े वोट बैंक और पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आहत किया था।
भले ही जिलाध्यक्ष शराफत अली ने इस वीडियो को लेकर अपनी ओर से सफाई देने की कोशिश की हो, लेकिन पार्टी हाईकमान ने उनके तर्कों को दरकिनार करते हुए पूरी इकाई पर ही गाज गिरा दी है। इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के बाद हरदोई समाजवादी पार्टी के भीतर एक सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं स्थानीय नेताओं के बीच अब नए सिरे से संगठन के पुनर्गठन और नए जिलाध्यक्ष की रेस को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। आगामी चुनावों को देखते हुए सपा जल्द ही जिले में एक नई, अनुशासित और संतुलित कार्यकारिणी की घोषणा कर सकती है, जिससे इस विवाद से हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।