मजाक बनाकर रख दिया है!” कानपुर देहात DM पर भड़के योगी के मंत्री राकेश सचान

कानपुर देहात: — उत्तर प्रदेश की शासन व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बावजूद, जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी और लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला कानपुर देहात जिले के कठेटी गांव से सामने आया है, जहां सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी ‘रात्रि चौपाल’ योजना के दौरान प्रशासनिक अनुशासनहीनता की सारी हदें पार हो गईं।

ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण करने पहुंचे उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास, खादी एवं ग्राम उद्योग और एमएसएमई (MSME) मंत्री राकेश सचान उस समय आगबबूला हो गए, जब उन्होंने देखा कि चौपाल से जिले के आला अधिकारी नदारद हैं। अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और अनुपस्थिति को देखकर मंत्री का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने भरी सभा में मंच से ही सीधे कानपुर देहात के जिलाधिकारी (DM) आलोक सिंह को फोन मिला दिया। मंत्री ने बेहद तल्ख और कड़े लहजे में जिलाधिकारी को डांट लगाते हुए कहा— “आप लोगों ने सरकार की योजनाओं का मजाक बनाकर रख दिया है।”

मंत्री और जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी (DM) के बीच फोन पर हुई इस तीखी बातचीत का वीडियो और विवरण सोशल मीडिया से लेकर राज्य के प्रशासनिक गलियारों में जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

क्या है ‘रात्रि चौपाल’ और क्यों नाराज हुए मंत्री?

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे जनता से संवाद स्थापित करने, विकास कार्यों की समीक्षा करने और ग्रामीणों की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करने के लिए ‘रात्रि चौपाल’ (Ratri Chaupal) कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस योजना के तहत मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को गांवों में जाकर रात बितानी होती है, चौपाल लगानी होती है और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में जनता की समस्याओं को तुरंत हल करना होता है।

इसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कैबिनेट मंत्री राकेश सचान कानपुर देहात के कठेटी गांव पहुंचे थे। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अपनी पेंशन, राशन, बिजली, पानी और राजस्व से जुड़ी गंभीर शिकायतें और फाइलें हाथों में लेकर चौपाल स्थल पर जमा थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सरकार के मंत्री के सामने उनकी समस्याओं की सुनवाई होगी और मौके पर मौजूद अधिकारी तुरंत आदेश जारी करेंगे।

लेकिन जैसे ही मंत्री राकेश सचान मंच पर पहुंचे और उन्होंने अधिकारियों की कुर्सियों पर नजर डाली, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। मुख्य विकास अधिकारी (CDO), जिला विकास अधिकारी (DDO), उपजिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार, बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) और समाज कल्याण विभाग के जिला स्तरीय आला अधिकारी चौपाल से पूरी तरह गायब थे। मंच पर और नीचे केवल कुछ छोटे स्तर के बाबू और संविदा कर्मचारी ही बैठे नजर आए, जिनके पास किसी समस्या के समाधान का न तो कोई अधिकार था और न ही कोई जानकारी।

“सब अपनी मर्जी के मालिक हैं” — मंच से ही डीएम को लगाई क्लास

जनता की भारी भीड़ और अधिकारियों की इस सामूहिक गैर-जिम्मेदारी को देखकर मंत्री राकेश सचान खुद पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने तुरंत जेब से अपना मोबाइल फोन निकाला और सीधे जिले के कप्तान यानी जिलाधिकारी को फोन मिला दिया। फोन उठते ही मंत्री ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे कड़े शब्दों का इस्तेमाल शुरू कर दिया।

मंत्री राकेश सचान ने फोन पर कहा:

“डीएम साहब, मैं इस वक्त कठेटी गांव की रात्रि चौपाल में बैठा हूं। यहां जनता की भारी भीड़ लगी हुई है, लेकिन आपकी पूरी प्रशासनिक टीम गायब है। न यहां सीडीओ हैं, न डीडीओ हैं, और न ही किसी मुख्य विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद हैं। क्या चल रहा है आपके जिले में? अधिकारियों ने सरकार के आदेशों को तमाशा और मजाक बनाकर रख दिया है।”

मंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, “सरकार इतनी संजीदगी से ग्रामीण जनता के दरवाजे पर प्रशासन को भेज रही है और आपके अधिकारी एयरकंडीशनर कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। सब अपनी मर्जी के मालिक बन बैठे हैं। जब मुख्य नीति निर्धारक और जिम्मेदार अधिकारी ही गायब रहेंगे, तो इन गरीब ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण कौन करेगा? यह सीधे तौर पर सरकार की साख को बट्टा लगाने की कोशिश है।”

जिलाधिकारी ने फोन पर सफाई देने की कोशिश की, लेकिन मंत्री ने उनकी एक न सुनी और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि वह इस पूरी घटनाक्रम की एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और मुख्य सचिव को भेज रहे हैं।

शासन स्तर पर रिपोर्ट, अधिकारियों पर गिरेगी गाज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा से “नो टॉलरेंस” (Zero Tolerance) की नीति पर काम करते हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जो अधिकारी जनता के लिए उपलब्ध नहीं रह सकता, उसे पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। एक कैबिनेट मंत्री के कार्यक्रम से पूरी प्रशासनिक टीम का इस तरह बंक मारना सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना माना जा रहा है।

कठेटी गांव की इस घटना के बाद कानपुर देहात के प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री की फटकार के बाद बैकफुट पर आए जिलाधिकारी ने चौपाल से नदारद रहने वाले सभी अनुपस्थित जिला स्तरीय अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर दिया है। इसके साथ ही, सभी दोषी अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकने की भी कार्रवाई शुरू की जा रही है।

हालांकि, मंत्री राकेश सचान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल वेतन रोकने जैसी छोटी विभागीय कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए संकेत दिए कि इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार बड़े अधिकारियों के खिलाफ निलंबन (Suspension) या जिले से बाहर ट्रांसफर जैसी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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