
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जालसाजी, टशन और मुफ़्तखोरी का एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता को हंसने और सोचने पर मजबूर कर दिया है। खुद को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का आला अफसर बताकर रौब झाड़ने वाले एक शातिर ठग की हेकड़ी उस वक्त धरी की धरी रह गई, जब उसने महज कुछ रुपयों की चाय और बन-मक्खन का बिल देने से इनकार कर दिया।
आरोपी की पहचान मिथिलेश शुक्ला के रूप में हुई है। जो शख्स सोमवार की शाम को लखनऊ की सड़कों पर नीली बत्ती लगी गाड़ी में ‘आईपीएस’ का बोर्ड लगाकर घूम रहा था और आम लोगों पर धौंस जमा रहा था, वह मंगलवार की सुबह असली पुलिस की मुस्तैदी के कारण जेल की कालकोठरी में बंद मिला। इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे और फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किसी बड़े खुफिया ऑपरेशन से नहीं, बल्कि महज 50-60 रुपये के चाय-नाश्ते के बिल के विवाद के कारण हुआ।
चाय की टपरी पर ‘साहब’ का टशन और मुफ़्तखोरी का शौक
जीआरपी और स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी मिथिलेश शुक्ला काफी समय से खुद को उत्तर प्रदेश कैडर का एक रसूखदार आईपीएस अधिकारी बताता आ रहा था। उसने बाकायदा अपनी लग्जरी गाड़ी पर ‘आईपीएस’ और ‘भारत सरकार’ के फर्जी बोर्ड लगा रखे थे, ताकि कोई उस पर शक न करे।
सोमवार की शाम को वह लखनऊ के एक बेहद व्यस्त चौराहे पर स्थित एक प्रसिद्ध चाय की दुकान पर अपनी गाड़ी से उतरा। उसने बेहद कड़क अंदाज में दुकानदार को ऑर्डर दिया। मिथिलेश ने वहां बैठकर बड़े आराम से कड़क चाय पी और बन-मक्खन (चाय-बन) का लुत्फ उठाया। टपरी पर मौजूद अन्य ग्राहक भी उसकी गाड़ी और हाव-भाव देखकर उसे सचमुच का कोई बड़ा पुलिस अधिकारी समझ रहे थे।
खतरनाक मोड़ तब आया जब नाश्ता खत्म होने के बाद दुकानदार ने बेहद अदब के साथ ‘साहब’ के सामने उनका बिल पेश किया। बिल की रकम बहुत छोटी थी, लेकिन खुद को फर्जी आईपीएस समझने वाले मिथिलेश शुक्ला के अहं को यह बात चुभ गई। उसने जेब से पैसे निकालने के बजाय दुकानदार पर चिल्लाना शुरू कर दिया।
“दुकान बंद करवा दूंगा…” — बिल मांगा तो निकाल लिया असलहा
दुकानदार का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपने हक के पैसे मांगे थे। लेकिन मिथिलेश शुक्ला अपनी फर्जी पहचान के नशे में इस कदर चूर था कि उसने सरेआम हंगामा खड़ा कर दिया। उसने दुकानदार को डांटते हुए बेहद घमंडी लहजे में कहा:
“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझसे पैसे मांगने की? गाड़ी पर नीली बत्ती और आगे लगा आईपीएस का बोर्ड दिखाई नहीं देता क्या? सस्पेंड करवा दूंगा और चौबीस घंटे के भीतर तुम्हारी यह दुकान बंद करवा दूंगा!”
दुकानदार और वहां खड़े स्थानीय लोगों को उसकी बातें थोड़ी अजीब लगीं। आमतौर पर कोई भी असली सीनियर आईपीएस अधिकारी या जिम्मेदार प्रशासनिक अफसर सरेआम सड़क पर ₹50 के लिए इस तरह का बचकाना तमाशा नहीं करता। जब दुकानदार ने हाथ जोड़कर दोबारा विनती की कि वह एक गरीब आदमी है और बिना पैसे लिए उसका काम नहीं चलेगा, तो खुद को घिरता देख मिथिलेश ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं।
उसने अपनी कमर में खोंसा हुआ एक अवैध असलहा (पिस्तौल) निकाला और सीधे दुकानदार की तरफ तान दिया। उसने कड़ककर कहा कि अगर दोबारा पैसे मांगे, तो यहीं ठोक दूंगा। पिस्तौल देखते ही चाय की टपरी पर मौजूद ग्राहकों में हड़कंप मच गया और लोग पीछे हटने लगे।
असली पुलिस की एंट्री और ‘फर्जी सिंघम’ का सरेंडर
दुकानदार ने गजब का हौसला दिखाया। उसने घबराने के बजाय चुपके से पास ही पेट्रोलिंग (गश्त) कर रही स्थानीय पुलिस की पीआरवी (PRV) टीम को इस गुंडागर्दी और हंगामे की सूचना दे दी। महज पांच मिनट के भीतर असली पुलिस की गाड़ी हूटर बजाती हुई मौके पर पहुंच गई।
असली पुलिसकर्मियों को देखकर मिथिलेश शुक्ला ने शुरू में उन पर भी धौंस जमाने की कोशिश की। उसने कड़क आवाज में कहा कि वह उनका सीनियर अफसर है और वे तुरंत वहां से चले जाएं। हालांकि, मौके पर पहुंचे दारोगा और पुलिसकर्मियों को उसकी वर्दी के पैटर्न, बातचीत के लहजे और हाव-भाव पर तुरंत शक हो गया।
जब दारोगा ने बेहद विनम्रता लेकिन कड़ाई से ‘साहब’ से उनका आई-कार्ड (Identity Card), बैच नंबर और वर्तमान पोस्टिंग का जिला पूछा, तो मिथिलेश शुक्ला के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। वह हकलाने लगा और कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। जब पुलिस ने उसकी गाड़ी की तलाशी ली, तो उसमें से कई जाली दस्तावेज, फर्जी लेटरहेड और ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े फर्जी कागजात बरामद हुए। पुलिस ने बिना देर किए उसे हिरासत में ले लिया और थाने ले आई। थाने पहुंचते ही ‘फर्जी सिंघम’ का सारा नशा उतर गया और उसने रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया।
लग्जरी गाड़ी से बरामद हुआ फर्जीवाड़े का सामान
पुलिस की जांच में सामने आया है कि मिथिलेश शुक्ला एक पेशेवर ठग है, जो केवल मुफ़्त की चाय खाने के लिए ही आईपीएस नहीं बना था। वह इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके टोल प्लाजा पर टैक्स बचाने, सरकारी विभागों में ठेके दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने और स्थानीय स्तर पर जमीनी विवादों में लोगों को डरा-धमकाकर पैसे वसूलने का काम करता था।
पुलिस ने आरोपी की गाड़ी से निम्नलिखित चीजें जब्त की हैं:
- ‘भारत सरकार’ और ‘IPS’ लिखे हुए दो अवैध मेटल बोर्ड।
- गाड़ी के ऊपर अवैध रूप से लगाई गई नीली और लाल कंबाइंड बत्ती।
- बिना लाइसेंस की एक अवैध पिस्तौल और जिंदा कारतूस।
- पुलिस विभाग के कई फर्जी पहचान पत्र और जाली मुहरें।
कड़े कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज, सुबह भेजा गया जेल
लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि मिथिलेश शुक्ला की यह हरकत बेहद गंभीर श्रेणी में आती है। किसी संवैधानिक और महत्वपूर्ण सुरक्षा पद (IPS) का रूप धारण करना और देश के कानून का मजाक उड़ाना एक अक्षम्य अपराध है।
पुलिस ने आरोपी मिथिलेश शुक्ला के खिलाफ सरकारी अधिकारी का रूप धारण करने (Impersonation – धारा 204 BNS), धोखाधड़ी (Cheating), अवैध रूप से सरकारी प्रतीकों का इस्तेमाल करने, रंगदारी वसूलने और आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार रखने और चमकाने) के तहत एक बेहद मजबूत और गैर-जमानती मुकदमा दर्ज किया है।
सोमवार की पूरी रात आरोपी ने लखनऊ के थाने के लॉकअप में मच्छरों के बीच गुजारी। उसकी वह हेकड़ी और टशन पूरी तरह गायब हो चुके थे। मंगलवार की सुबह, पुलिस ने उसे कड़ी सुरक्षा के बीच स्थानीय अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को सिरे से खारिज करते हुए उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में सीधे जेल भेज दिया। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस फर्जी आईपीएस की आड़ में उसने अब तक उत्तर प्रदेश के किन-किन जिलों में कितने लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से अपना शिकार बनाया है।