शाहजहांपुर में सेना का खुफिया स्टिंग ऑपरेशन: NEET फेल 21 साल का युवक बना ‘फर्जी ब्रिगेडियर’, लग्जरी SUV, स्टार फ्लैग और कमांडो का तामझाम देख पुलिस भी रह गई दंग

पहले दिल्ली में नीट की तैयारी कर रहा था आर्यन. (Photo: Vinay Pandey/ITG)

शाहजहांपुर : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज और फिल्मी कहानी को भी मात देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। यहां सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और स्थानीय पुलिस ने एक बेहद गोपनीय और सटीक स्टिंग ऑपरेशन चलाकर एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो महज 21 साल की उम्र में भारतीय सेना का ‘ब्रिगेडियर’ बनकर घूम रहा था। इस फर्जी ब्रिगेडियर का रसूख और ठाठ-बाठ ऐसा था कि वह अपनी लग्जरी स्कॉर्पियो (SUV) गाड़ी पर सेना का आधिकारिक स्टार फ्लैग (Star Flag) लगाकर चलता था, सेना की वर्दी पहनता था और उसकी सुरक्षा में बकायदा सफारी सूट पहने, आधुनिक हथियारों से लैस ‘कमांडो’ तैनात रहते थे। लेकिन जब मिलिट्री इंटेलिजेंस ने अपना जाल बिछाया, तो इस फर्जी अफसर की पूरी सल्तनत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

NEET परीक्षा में फेल होने के बाद चुना अपराध का रास्ता

पुलिस और सैन्य अधिकारियों की संयुक्त पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी की पहचान आर्यन वर्मा के रूप में हुई है, जिसकी उम्र महज 21 साल है। पुलिस के मुताबिक, आर्यन पढ़ने में ठीक था और वह डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहा था। हालांकि, कड़े परिश्रम के बाद भी वह नीट (NEET) परीक्षा पास करने में असफल रहा।

परीक्षा में फेल होने के बाद अवसाद और कम समय में समाज में बड़ा रसूख, धौंस और बेहिसाब पैसा कमाने की हवस ने उसे अपराध के रास्ते पर धकेल दिया। उसने फिल्मों और सोशल मीडिया से प्रेरित होकर सेना का एक फर्जी और बेहद रसूखदार प्रोफाइल तैयार करने की साजिश रची। उसने इंटरनेट के जरिए सेना की ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारियों के रहन-सहन, उनकी प्रोटोकॉल और उनकी वर्दी के बारे में बारीकी से रिसर्च किया और खुद को ‘ब्रिगेडियर आर्यन वर्मा’ के रूप में स्थापित कर लिया।

फर्जी ब्रिग्रेडियर से पूछताछ करते सेना के अधिकारी. (Vinay Pandey/ITG)

सुरक्षा का ऐसा तामझाम कि असली अधिकारी भी खा जाएं धोखा

आर्यन वर्मा ने खुद को असली ब्रिगेडियर साबित करने के लिए पैसों को पानी की तरह बहाया और सुरक्षा का ऐसा अभेद्य ताना-बाना बुना कि पहली नजर में कोई भी धोखा खा जाए।

  1. लग्जरी गाड़ियां और स्टार फ्लैग: उसने अपनी काली स्कॉर्पियो (SUV) गाड़ी के आगे बकायदा सेना के नियमों के मुताबिक ब्रिगेडियर रैंक को दर्शाने वाला ‘स्टार फ्लैग’ और सेना की नंबर प्लेट जैसी दिखने वाली प्लेट लगा रखी थी।
  2. निजी कमांडो दस्ता: उसने ऊंचे कद-काठी वाले कुछ युवकों को मोटी तनख्वाह का लालच देकर अपने साथ रखा था। इन युवकों को बकायदा सफारी सूट पहनाकर ‘कमांडो’ का लुक दिया गया था। ये कथित कमांडो हाथों में अत्याधुनिक और अवैध हथियार (जैसे वायरलेस सेट और रायफल) लेकर चौबीसों घंटे उसकी सुरक्षा में तैनात रहते थे और गाड़ी से उतरते ही उसे सैल्यूट ठोकते थे।
  3. फर्जी दस्तावेज और वर्दी: आर्यन के पास से भारतीय सेना के बेहद उच्च स्तर के फर्जी पहचान पत्र (ID Cards), जाली ट्रांसफर और पोस्टिंग ऑर्डर्स, और सेना के आधिकारिक मोहर व लेटरहेड बरामद हुए हैं। वह अक्सर सेना की पूरी स्टार वाली वर्दी पहनकर ही बाहर निकलता था।

मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) का स्टिंग ऑपरेशन और गिरफ्तारी

शाहजहांपुर एक महत्वपूर्ण सैन्य इलाका (कैंटोनमेंट एरिया) है। पिछले कुछ समय से स्थानीय मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) को यह इनपुट मिल रहा था कि एक बेहद कम उम्र का युवक, जो खुद को ब्रिगेडियर बताता है, कैंट और उसके आसपास के इलाकों में सेना की फ्लैग लगी गाड़ी और हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मियों के साथ घूम रहा है।

सेना के खुफिया तंत्र को इस बात पर गहरा शक हुआ, क्योंकि भारतीय सेना में कड़ी मेहनत और दशकों की सेवा के बाद ही कोई अधिकारी 40-45 साल की उम्र पार करने पर ‘ब्रिगेडियर’ की रैंक तक पहुंच पाता है। ऐसे में 21 साल के लड़के का इस पद पर होना नामुमकिन था। सेना ने जब अपने आंतरिक रिकॉर्ड्स खंगाले, तो पता चला कि इस नाम या प्रोफाइल का कोई भी अधिकारी शाहजहांपुर या पूरे कमांड में तैनात ही नहीं है।

पुख्ता सबूत जुटाने के बाद, मिलिट्री इंटेलिजेंस ने स्थानीय कैंट थाना पुलिस के साथ मिलकर एक जाल बिछाया। जैसे ही फर्जी ब्रिगेडियर अपनी स्कॉर्पियो और कमांडो दस्ते के साथ शाहजहांपुर के एक तय इलाके से गुजरा, सेना और पुलिस की संयुक्त टीम ने उसकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। जब उससे उसका असली मिलिट्री क्रेडेंशियल और आईकार्ड मांगा गया, तो वह सकपका गया। सख्ती से की गई पूछताछ में उसने रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया कि वह कोई सैन्य अधिकारी नहीं, बल्कि एक साधारण छात्र है।

नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी का अंदेशा

पुलिस लाइंस में मामले का खुलासा करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी आर्यन वर्मा इस फर्जी ब्रिगेडियर की पहचान का इस्तेमाल केवल धौंस जमाने के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित ठगी रैकेट को चलाने के लिए कर रहा था। शुरुआती जांच के मुताबिक, वह ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के सीधे-साधे बेरोजगार युवाओं को जाल में फंसाता था। वह उन्हें अपनी लग्जरी गाड़ी, स्टार फ्लैग और कमांडो दिखाकर प्रभावित करता था और दावा करता था कि उसकी पहुंच सेना के मुख्यालय तक है।

वह युवाओं को सेना में सीधे अफसर, क्लर्क या अन्य सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर प्रति उम्मीदवार 10 से 15 लाख रुपये की मांग करता था। आशंका जताई जा रही है कि वह अब तक दर्जनों युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।

पुलिस ने मुख्य आरोपी आर्यन वर्मा के साथ-साथ उसके फर्जी कमांडो बने साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से सेना की कई वर्दियां, फर्जी आईकार्ड, अवैध हथियार, जिंदा कारतूस, स्टार फ्लैग और स्कॉर्पियो गाड़ी जब्त कर ली गई है। फिलहाल, देश की सुरक्षा से जुड़े इस बेहद गंभीर मामले में खुफिया एजेंसियां (IB और MI) भी आरोपी से पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश में सेना के अंदर का कोई व्यक्ति या कोई बड़ा गिरोह तो शामिल नहीं है।

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