सहारनपुर में गोगा म्हाड़ी पर नया संग्राम: हिंदू संगठनों ने दी गोमूत्र फव्वारे लगाने की चेतावनी

सहारनपुर में गोगा म्हाड़ी पर बवाल. (Photo: Rahul Kumar/ITG)

सहारनपुर : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र ‘श्री जाहरवीर गोगा म्हाड़ी’ परिसर को लेकर एक बड़ा सामाजिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। गंगोह रोड पर स्थित इस परिसर के भीतर बने ऐतिहासिक ‘गोरक्ष गंगा सरोवर’ को कथित तौर पर ‘फन पॉइंट’ (मनोरंजन स्थल) की तरह विकसित किए जाने और वहां विशेष समुदाय (मुस्लिम) के लोगों के प्रवेश को लेकर हिंदू संगठनों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ‘गोगा म्हाड़ी सुधार सभा’ के नेतृत्व में विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस स्थल की धार्मिक मर्यादा भंग होने का आरोप लगाते हुए प्रशासन को एक बड़ी और अनोखी चेतावनी दी है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि गोरक्ष गंगा सरोवर को उसकी पारंपरिक और धार्मिक पहचान से हटाकर एक पिकनिक स्पॉट या फन पॉइंट के रूप में बदला जा रहा है। संगठनों का दावा है कि इस बदलाव के कारण धार्मिक परिसर की पवित्रता और मर्यादा प्रभावित हो रही है।

गोगा म्हाड़ी सुधार सभा के अध्यक्ष अनिल प्रताप सैनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले वर्ष ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस नवनिर्मित गोरक्ष गंगा सरोवर का भव्य उद्घाटन किया था। यह स्थल केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लाखों सनातन धर्मावलंबियों की अटूट आस्था का केंद्र है। हर साल यहां आयोजित होने वाले तीन दिवसीय वार्षिक मेले में लगभग 10 से 12 लाख श्रद्धालु मन्नत मांगने और मत्था टेकने पहुंचते हैं।

‘गोमूत्र फव्वारे और मशीनों’ की चेतावनी

हिंदू संगठनों का सबसे गंभीर और तीखा आरोप यह है कि इस पवित्र परिसर में दूसरे समुदाय के लोग आकर धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं और स्थल को अस्वच्छ कर रहे हैं। इस बात को लेकर नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि संगठनों ने अब सीधे तौर पर चेतावनी जारी कर दी है।

सभा अध्यक्ष अनिल प्रताप सैनी ने साफ शब्दों में कहा, “अगर प्रशासन ने इस धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए तुरंत उचित कदम नहीं उठाए और परिसर में केवल सनातन धर्म को मानने वालों के प्रवेश की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की, तो हम गोगा म्हाड़ी के दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों (एंट्री गेट्स) पर गोमूत्र के फव्वारे या विशेष मशीनें स्थापित कर देंगे।” उनका कहना है कि इसके बाद जो भी व्यक्ति मुख्य द्वार से परिसर के भीतर प्रवेश करेगा, उसे उस गोमूत्र से होकर गुजरना होगा या उससे स्नान करना होगा। इस बयान के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई है और मामले ने एक नया सामाजिक व राजनीतिक रंग ले लिया है।

आंदोलन और शुद्धिकरण की रूपरेखा

अपनी मांगों को लेकर हिंदू संगठन पूरी तरह से आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। पदाधिकारियों के अनुसार, इस विषय को लेकर उन्होंने सहारनपुर के जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात की है और उन्हें स्थिति की गंभीरता से अवगत कराते हुए एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा है। हालांकि, जिलाधिकारी की ओर से इस मामले में जल्द से जल्द जांच कराकर आवश्यक और उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन हिंदू संगठन केवल आश्वासनों पर रुकने को तैयार नहीं हैं।

अनिल प्रताप सैनी ने बताया कि संगठन ने अपनी रणनीति के तहत आसपास के देहाती इलाकों, गांवों और अन्य पड़ोसी जनपदों में बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। ग्रामीण स्तर पर लोगों को एकजुट किया जा रहा है ताकि एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जा सके। संगठनों का कहना है कि वे इस अभियान के तहत गांव-गांव जाकर जनसंपर्क करेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो वे बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी देने और जेल भरो आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। हाल ही में संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा परिसर के भीतर प्रतीकात्मक रूप से शुद्धिकरण अभियान भी चलाया गया।

प्रशासन और नगर निगम का रुख

इस बेहद संवेदनशील और तेजी से तूल पकड़ते मामले पर फिलहाल स्थानीय प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। जहां एक ओर जिला प्रशासन ने मामले को शांत कराने के लिए उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस विषय पर सीधे कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

जब इस पूरे घटनाक्रम और हिंदू संगठनों की चेतावनी को लेकर सहारनपुर नगर निगम के मेयर डॉ. अजय सिंह से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने इस विवाद से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें अभी इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने इस विषय पर किसी भी प्रकार की विस्तृत टिप्पणी करने या आधिकारिक बयान देने से पूरी तरह इनकार कर दिया।

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

सहारनपुर की जाहरवीर गोगा म्हाड़ी का इतिहास बेहद प्राचीन माना जाता है। हिंदू संगठनों का तर्क है कि यह कोई साधारण तालाब या आधुनिक पार्क नहीं है, बल्कि हजारों वर्ष पुराना एक ऐतिहासिक कुंड और तपोस्थली है। गुरु गोरखनाथ और जाहरवीर गोगा जी के अनुयायियों के लिए इस स्थान का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। संगठनों का कहना है कि वे इस पवित्र भूमि के व्यवसायीकरण या इसके मूल धार्मिक स्वरूप के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसकी गरिमा की रक्षा के लिए उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। फिलहाल, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और विवाद का सर्वमान्य हल निकालने के लिए पुलिस और खुफिया तंत्र भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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