copyright image live law Bharat / केरल / V. D. Satheesan आखिरकार Kerala के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। कई दिनों तक चली बैठकों, चर्चाओं और राजनीतिक सस्पेंस के बाद Indian National Congress हाईकमान ने उनके नाम पर मुहर लगा दी। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि केरल में कांग्रेस की सत्ता वापसी का चेहरा अब वीडी सतीशन ही होंगे।मुख्यमंत्री पद की रेस में कई बड़े नाम शामिल थे। K. C. Venugopal, Ramesh Chennithala और यहां तक कि Shashi Tharoor का नाम भी चर्चा में था। लेकिन कांग्रेस ने भरोसा उस नेता पर जताया जिसने पिछले कुछ वर्षों में खुद को केरल में पार्टी के सबसे आक्रामक और मजबूत चेहरे के रूप में स्थापित किया।एक दशक बाद सत्ता में लौटी कांग्रेसकेरल की राजनीति लंबे समय से दो बड़े गठबंधनों — United Democratic Front और Left Democratic Front — के बीच घूमती रही है। यहां आमतौर पर हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है। लेकिन 2021 में लेफ्ट ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इस परंपरा को तोड़ दिया था। उस हार के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अपनी राजनीतिक जमीन वापस हासिल करना। ye pade 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत UDF ने जबरदस्त वापसी की। 140 सीटों वाली विधानसभा में गठबंधन ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय वीडी सतीशन को दिया जा रहा है। पार्टी के भीतर उन्हें इस जीत का “आर्किटेक्ट” कहा जा रहा है।साधारण परिवार से राजनीति के केंद्र तकवीडी सतीशन का पूरा नाम वडस्सेरी दामोदरन सतीशन है। उनका जन्म 31 मई 1964 को एर्नाकुलम के पास नेट्टूर में हुआ था। उनके पिता का नाम के. दामोदरन मेनन और माता का नाम वी.पी. सरस्वती अम्मा है। सामान्य परिवार से आने वाले सतीशन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई स्थानीय संस्थानों में की और बाद में महाराजा कॉलेज तथा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दाखिला लिया।कॉलेज के दिनों से ही उनका झुकाव राजनीति की ओर था। वे छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और Kerala Students Union से जुड़े। बाद में वे NSUI में भी जिम्मेदार पदों पर रहे। उस दौर में केरल के कॉलेज कैंपसों में वामपंथी संगठनों का दबदबा था। ऐसे माहौल में कांग्रेस की छात्र राजनीति करना आसान नहीं माना जाता था। लेकिन सतीशन ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और संगठन के भीतर मजबूत पकड़ कायम की।वकालत भी की, कानून की गहरी समझराजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले वीडी सतीशन ने वकालत भी की। उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय तक वकालत के पेशे से जुड़े रहे। यही वजह है कि उनकी राजनीतिक शैली में कानूनी समझ और तथ्यों की मजबूती साफ दिखाई देती है। विधानसभा में उनके भाषण अक्सर आंकड़ों, दस्तावेजों और तैयारी के लिए जाने जाते रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही कानूनी और प्रशासनिक समझ उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाती है। वे सिर्फ भाषण देने वाले नेता नहीं बल्कि मुद्दों को विस्तार से समझने और सरकार को तथ्यों के आधार पर घेरने वाले राजनेता माने जाते हैं।पहली हार, फिर लगातार जीतसाल 1996 में वीडी सतीशन ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। उन्होंने परावुर सीट से किस्मत आजमाई, लेकिन करीब 1100 वोटों से हार गए। यह इलाका वामपंथियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। आमतौर पर पहली हार के बाद कई नेता पीछे हट जाते हैं, लेकिन सतीशन ने हार नहीं मानी।उन्होंने क्षेत्र में लगातार काम जारी रखा। जनता के बीच बने रहे और संगठन को मजबूत किया। मेहनत का परिणाम 2001 में मिला, जब उन्होंने परावुर सीट से शानदार जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिछले दो दशकों से अधिक समय से वे लगातार इस सीट से जीतते आ रहे हैं।विधानसभा में आक्रामक नेता की पहचानवीडी सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी आक्रामक लेकिन तथ्य आधारित राजनीति रही है। केरल विधानसभा में उनकी छवि ऐसे नेता की बनी जो पूरी तैयारी के साथ सरकार को घेरता है। खासतौर पर Pinarayi Vijayan सरकार के खिलाफ उनके हमले काफी चर्चा में रहे।जब कई कांग्रेस नेता धार्मिक और सामुदायिक मुद्दों पर खुलकर बोलने से बचते थे, तब सतीशन ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने वोट बैंक की राजनीति पर सवाल उठाए और खुद को धर्मनिरपेक्ष राजनीति के मजबूत समर्थक के रूप में पेश किया। यही वजह रही कि युवाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।2021 की हार के बाद और मजबूत हुए2021 का चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था। लेफ्ट ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर इतिहास बना दिया। लेकिन इस हार के बाद वीडी सतीशन का कद पार्टी में और बढ़ गया। कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया।यहीं से सतीशन ने खुद को फ्रंटलाइन लीडर के रूप में स्थापित किया। उन्होंने विपक्ष की राजनीति को ज्यादा धारदार और आक्रामक बनाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस, सड़क पर आंदोलन और विधानसभा में तीखे भाषणों के जरिए वे लगातार सरकार पर हमला करते रहे। धीरे-धीरे वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पहली पसंद बन गए।कार्यकर्ताओं का मिला सबसे बड़ा समर्थन2026 चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई। कई बड़े नेताओं के नाम सामने आए। दिल्ली से लेकर तिरुवनंतपुरम तक बैठकों का दौर चला। लेकिन आखिरकार हाईकमान ने वीडी सतीशन पर भरोसा जताया। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह थी जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन। पार्टी के भीतर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ कार्यकर्ता तो उनके समर्थन में सड़क पर उतर आए थे।कहा जाता है कि चुनाव प्रचार के दौरान सतीशन ने दावा किया था कि अगर UDF को 100 से ज्यादा सीटें नहीं मिलीं तो वे राजनीति छोड़ देंगे। चुनाव परिणाम आने के बाद उनकी यह चुनौती चर्चा का विषय बन गई, क्योंकि गठबंधन ने 102 सीटें जीत लीं।किताबों के शौकीन हैं सतीशनराजनीति के अलावा वीडी सतीशन को किताबें पढ़ने का भी बेहद शौक है। उन्हें कई लोग “बुकवर्म” यानी किताबों का दीवाना कहते हैं। हाल ही में उन्होंने 2025 में पढ़ी गई 60 किताबों की सूची भी साझा की थी। वे अंग्रेजी और मलयालम दोनों भाषाओं में पढ़ते हैं। उनके करीबी बताते हैं कि व्यस्त राजनीतिक जीवन के बावजूद वे रोज पढ़ने के लिए समय निकालते हैं। यही आदत उनकी सोच और राजनीतिक दृष्टिकोण को अलग बनाती है।मुख्यमंत्री बनने के बाद वीडी सतीशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना। कांग्रेस लंबे समय बाद सत्ता में लौटी है और लोगों की अपेक्षाएं काफी बढ़ चुकी हैं। बेरोजगारी, विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक चुनौतियों जैसे कई मुद्दे उनके सामने होंगे।हालांकि जिस तरह उन्होंने विपक्ष में रहते हुए आक्रामक और सक्रिय राजनीति की, उससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उम्मीद है कि वे सरकार चलाने में भी उसी ऊर्जा और तैयारी के साथ काम करेंगे। अब पूरे देश की नजर इस बात पर होगी कि विपक्ष के मजबूत नेता से मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर शासन में कितना सफल साबित होता है।