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Bharat/Mamata Banerjee एक बार फिर अपने अलग अंदाज़ की वजह से सुर्खियों में हैं। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और Trinamool Congress प्रमुख ममता बनर्जी 14 मई को काला वकीली गाउन पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। कोर्ट परिसर में उनके इस अंदाज़ ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद भड़की हिंसा के मामले में खुद अदालत में पार्टी की ओर से पैरवी करने पहुंची थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद हुई हिंसा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसी मामले की सुनवाई के लिए ममता बनर्जी अदालत पहुंचीं। उनके साथ टीएमसी सांसद Kalyan Banerjee, उनके बेटे शिरशन्य बंदोपाध्याय और वकील वैश्वानर चटर्जी भी मौजूद थे। कोर्ट पहुंचने के दौरान ममता का काला कोट और वकीलों वाला गाउन पहने वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी इस मामले में सिर्फ राजनीतिक नेता के तौर पर नहीं बल्कि एक वकील के रूप में भी अदालत में अपनी बात रखना चाहती हैं। यही वजह है कि उन्होंने बाकायदा वकीलों का गाउन पहनकर अदालत में एंट्री की। इससे पहले भी ममता कई मौकों पर अदालत में खुद अपनी दलीलें पेश कर चुकी हैं।

दरअसल, 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद ऐतिहासिक साबित हुए। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली तृणमूल कांग्रेस को इस बार बड़ी हार का सामना करना पड़ा। Bharatiya Janata Party ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सत्ता अपने नाम कर ली। सबसे बड़ी बात यह रही कि ममता बनर्जी अपनी खुद की विधानसभा सीट भी नहीं बचा सकीं। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित हुए थे, जिसके बाद राज्य के कई हिस्सों से हिंसा, आगजनी और राजनीतिक टकराव की खबरें सामने आने लगीं।

चुनाव बाद हिंसा को लेकर बीजेपी और टीएमसी लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। दोनों पार्टियों का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। इस राजनीतिक तनाव के बीच कई गंभीर घटनाएं सामने आईं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या की रही। इस घटना ने राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा दिया।

इसी हिंसा के खिलाफ टीएमसी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव के बाद राज्य में कई जगहों पर उनके समर्थकों और आम लोगों के साथ अन्याय हुआ है। टीएमसी चाहती है कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करे और हिंसा की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो।

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ममता बनर्जी के कोर्ट पहुंचने के बाद टीएमसी ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर एक वीडियो भी शेयर किया। पार्टी ने पोस्ट में लिखा कि “ममता बनर्जी अपने लोगों को कभी अकेला नहीं छोड़तीं। वह हमेशा सच और न्याय की लड़ाई लड़ती हैं।” पार्टी ने दावा किया कि ममता जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा मजबूती से खड़ी रही हैं।

यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी अदालत में वकील के रूप में दिखाई दी हों। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी वह Supreme Court of India में SIR मामले को लेकर पेश हुई थीं। उस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। कोर्ट में अपनी दलीलों के दौरान ममता ने चुनाव आयोग को लेकर तीखी टिप्पणियां भी की थीं, जिसकी काफी चर्चा हुई थी।

ममता बनर्जी का कानून से पुराना नाता रहा है। उन्होंने 1982 में जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने वकालत की शिक्षा हासिल की थी। हालांकि सक्रिय राजनीति में आने के बाद उनका पूरा ध्यान राजनीतिक जीवन पर केंद्रित हो गया, लेकिन समय-समय पर वे अदालत में अपनी कानूनी समझ का प्रदर्शन करती रही हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अदालत में खुद पेश होना ममता बनर्जी की एक राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है। चुनाव में हार के बाद वे लगातार अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि वह अभी भी संघर्ष के मैदान में सक्रिय हैं। काला कोट पहनकर अदालत पहुंचना सिर्फ कानूनी कदम नहीं बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कुछ लोग उनके इस कदम की तारीफ कर रहे हैं और इसे “जनता के लिए लड़ने वाली नेता” की छवि बता रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इसे राजनीतिक ड्रामा करार दे रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि टीएमसी चुनाव में हार के बाद सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है।

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हालांकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को लेकर बना हुआ है। राज्य में लगातार बढ़ती राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। अदालत में चल रही सुनवाई से यह उम्मीद की जा रही है कि मामले की सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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फिलहाल सबकी नजरें कलकत्ता हाईकोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी अदालत में किस तरह अपनी दलीलें पेश करती हैं और इस मामले में अदालत आगे क्या रुख अपनाती है। लेकिन इतना तय है कि ममता का यह कोर्ट अपीयरेंस आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनने वाला है।

By ABHI KK

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