अखिलेश यादव का बड़ा दावा: यूपी, एमपी और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाने की फिराक में है बीजेपी

अखिलेश यादव का बड़ा दावा (image creat Ai)

लखनऊ : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर लगे जमीन खरीद के गंभीर आरोपों के बीच, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक दावा कर सियासी हलचल तेज कर दी है। अखिलेश यादव ने मोहन यादव पर लगे आरोपों को विपक्ष का हमला नहीं, बल्कि खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ही एक ‘अंदरूनी साजिश’ करार दिया है।

अखिलेश यादव का दावा है कि बीजेपी देश के तीन बड़े राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अपने मुख्यमंत्रियों को बदलने की पटकथा लिख रही है, और मोहन यादव पर लगे आरोप इसी सिलसिले का पहला कदम हैं।

अखिलेश यादव ने और किन मुख्यमंत्रियों का लिया नाम?

जमीन विवाद के मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने हमेशा की तरह बात को उत्तर प्रदेश की राजनीति की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने साफ तौर पर तीन मुख्यमंत्रियों के नाम लिए जिन्हें बीजेपी हटाने की साजिश रच रही है:

  1. योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश): अखिलेश का सीधा इशारा था कि असली निशाना यूपी के मुख्यमंत्री हैं।
  2. मोहन यादव (मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश): जिन्हें जमीन विवाद के जरिए बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
  3. भजनलाल शर्मा (मुख्यमंत्री, राजस्थान): राजस्थान के मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए अखिलेश ने कहा कि उन्हें भी हटाने की तैयारी है।

अखिलेश यादव ने बीजेपी की रणनीति को डिकोड करते हुए कहा:

“ये मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (मोहन यादव) और राजस्थान के मुख्यमंत्री (भजनलाल शर्मा) को इसलिए हटा रहे हैं क्योंकि इन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) को हटाना है। यह सब हटाने की एक बड़ी साजिश चल रही है। बीजेपी का प्लान है कि एक मध्य प्रदेश का सीएम हटा दो, एक राजस्थान का हटा दो और साथ में यूपी का भी हटा दो।”

क्या है मध्य प्रदेश का जमीन विवाद?

दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इन दिनों विपक्ष के निशाने पर हैं। दावा किया जा रहा है कि जब से वे मुख्यमंत्री बने हैं, उनके परिवार ने उज्जैन और उसके आसपास के इलाकों में लगभग 168 एकड़ जमीनें खरीदी हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इन जमीनों की खरीद के बाद ही वहां से बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स, सड़कें और हाईवे निकालने की योजनाएं सामने आईं, जिससे उन जमीनों के दाम अचानक आसमान छूने लगे।

इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने मोहन यादव का एक तरह से बचाव करते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री बनने से पहले से ही रियल एस्टेट और जमीनों के कारोबार में थे, और यह बात बीजेपी के लोग पहले से जानते थे। अखिलेश के मुताबिक, जब रजिस्ट्री हुई होगी तब भी बीजेपी के नेताओं को पता था, लेकिन अब मुख्यमंत्री बदलने का रास्ता खोजने के लिए जानबूझकर इन आरोपों को हवा दी जा रही है।

सीएम मोहन यादव और बीजेपी का पलटवार

जमीन खरीद के इन आरोपों पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और बीजेपी ने कड़ी सफाई पेश की है:

  • मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का बयान: सीएमओ की तरफ से साफ किया गया कि दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से न तो खुद मोहन यादव ने और न ही उनकी पत्नी सीमा यादव ने मध्य प्रदेश में कोई नई जमीन खरीदी है।
  • बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सफाई: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए आंकड़ों के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 2023 के चुनावी हलफनामे में मुख्यमंत्री के पास 17 एकड़ और उनकी पत्नी के नाम 12.29 एकड़ जमीन थी, जिसमें साल 2026 तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।
  • आरोपों में जिक्र की गई ‘सिद्धि विनायक कंपनी’ को लेकर उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने साल 2017 में ही इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी पुत्रवधू शालिनी यादव ने जरूर 10 एकड़ कृषि भूमि खरीदी है, लेकिन वह भी विकसित मास्टर प्लान एरिया से पूरी तरह बाहर है। रिश्तेदारों के बिजनेस का मुख्यमंत्री या उनके परिवार से कोई लेना-देना नहीं है।

अखिलेश यादव के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि भले ही विवाद मध्य प्रदेश की जमीनों का हो, लेकिन विपक्षी दल इसके जरिए उत्तर प्रदेश और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के भीतर चल रही कथित खींचतान पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते।

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