अमेरिका-ईरान में ऐतिहासिक समझौता: मसूद पेज़ेशकियन और ट्रंप ने MoU पर किए साइन, ट्रंप चिल्लाकर बोले— ‘It’s signed’

US President Donald Trump and Iranian President Masoud Pezeshkian

एवियन-लेस-बैंस (फ्रांस) : वैश्विक कूटनीति के इतिहास में आज एक बहुत बड़ा और युगांतरकारी मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से चली आ रही विनाशकारी जंग और सैन्य गतिरोध आखिरकार आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया है। फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में चल रहे जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के इतर दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

इस महा-समझौते की सफलता की घोषणा खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित और आक्रामक अंदाज में की। दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद ट्रंप ने कमरे में मौजूद वैश्विक नेताओं और मीडिया के सामने बेहद उत्साह में चिल्लाकर (Exclaimed) कहा— “It’s signed!” (इस पर दस्तखत हो गए हैं!)। ‘आज तक’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते ने मध्य पूर्व (Middle East) सहित पूरी दुनिया को एक बड़े वैश्विक संकट और तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने से बाहर निकाल लिया है।

समझौते की बड़ी बातें: परमाणु कार्यक्रम पर लगाम, प्रतिबंधों में ढील

यह ऐतिहासिक समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन (Masoud Pezeshkian) के बीच हुई कई दौर की गहन बैक-चैनल वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के बाद संभव हो पाया है।

  • परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण: शुरुआती कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस सहमति पत्र (MoU) के तहत ईरान अपने परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के भीतर सीमित करने और सख्त अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए तैयार हो गया है।
  • प्रतिबंधों में ढील: बदले में, संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के तेल निर्यात और वित्तीय संपत्तियों पर लगाए गए कई कड़े प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने या उनमें ढील देने पर सहमत हुआ है। इससे ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी।
  • समुद्री मार्गों की सुरक्षा: ईरान इस बात पर भी राजी हुआ है कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) जलमार्ग को पूरी तरह से खुला रखेगा और वहां वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले हमलों या ब्लॉकेड को तुरंत रोकेगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहे।

राहत की सांस, लेकिन ट्रंप की ‘बम गिराने’ की चेतावनी बरकरार

भले ही इस समझौते के बाद वैश्विक शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है और दुनिया भर के देशों ने इस शांति पहल का स्वागत किया है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सख्त छवि के मुताबिक ईरान को स्पष्ट लहजे में सचेत भी किया है।

जी-7 के कार्य सत्रों के दौरान ट्रंप ने साफ किया कि यह समझौता कोई अंतिम ब्लैंक चेक नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यह समझौता अभी प्रारंभिक है और अगर ईरान ने इसके नियमों का जरा सा भी उल्लंघन किया या अपने वादे से मुकरा, तो अमेरिका पलक झपकते ही अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू कर देगा और उनके सिर के ठीक बीच में दोबारा बम गिराना शुरू कर देगा।

फिलहाल, इस ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर दोनों देशों के हस्ताक्षर होने को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साल 2026 की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है, जिसने महीनों से सुलग रहे युद्ध के मैदान को शांत कर दिया है। पूरे मध्य पूर्व ने इस फैसले के बाद राहत की सांस ली है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल Strait of Hormuz लंबे समय से तनाव का केंद्र बना हुआ था।

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ ने कहा कि जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जाएगा, लेकिन युद्ध से पहले जैसी स्थिति पूरी तरह वापस नहीं आएगी।

उन्होंने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करेगा, हालांकि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को कुछ सेवाओं के लिए शुल्क देना पड़ सकता है।

ईरानी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस जलमार्ग की जिम्मेदारी ईरान और ओमान दोनों की है।

तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत

समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान के तेल निर्यात से जुड़ा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि तेहरान की प्रमुख मांग थी कि वह बिना परिवहन और बीमा प्रतिबंधों के अपना तेल बेच सके और उसकी आय तक उसकी पहुंच सुनिश्चित हो।

उन्होंने बताया कि अमेरिका ने ईरान के फ्रीज किए गए फंड तक पहुंच बहाल करने और तेल क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिबंध हटाने पर सहमति जताई है।

इससे ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिर से सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

60 दिनों का विशेष ढांचा

समझौते में एक 60-दिवसीय ढांचा भी शामिल किया गया है।

इस अवधि के दौरान दोनों पक्ष ऐसे किसी भी कदम से बचेंगे जो समझौते को कमजोर कर सकता हो।

ईरान का कहना है कि इस दौरान अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को भी नहीं बढ़ाएगा। बदले में ईरान भी समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा।

ईरानी अधिकारियों ने इसे “कमिटमेंट के बदले कमिटमेंट” की व्यवस्था बताया है।

परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी

हालांकि समझौते के कई बिंदुओं पर सहमति बन गई है, लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसका समृद्ध यूरेनियम देश के भीतर ही रहेगा और उसे विदेश नहीं भेजा जाएगा।

हालांकि यूरेनियम को कम समृद्ध बनाने (Dilution) का विकल्प बातचीत में शामिल है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में होने वाली वार्ताएं इस मुद्दे पर अंतिम दिशा तय करेंगी।

मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं

ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और रक्षा क्षमताओं पर कोई बातचीत नहीं होगी।

ईरानी पक्ष का कहना है कि देश की रक्षा नीति राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है और इसे किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा।

हालांकि ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाते हुए कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास मिसाइलें हैं तो ईरान को पूरी तरह इससे वंचित करना उचित नहीं होगा।

300 अरब डॉलर निवेश योजना

समझौते का एक और बड़ा हिस्सा लगभग 300 अरब डॉलर (करीब 28 लाख करोड़ रुपये) के निवेश प्रस्ताव से जुड़ा है।

क़ालिबाफ के अनुसार इस राशि का एक बड़ा हिस्सा युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास परियोजनाओं में लगाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो यह ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है।

पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने दावा किया कि इस समझौते को “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” के नाम से जाना जाएगा।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

शहबाज शरीफ के अनुसार समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलेगा, जबकि अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा।

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