
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से एक ऐसी घटना सामने आई है जो किसी सस्पेंस-कॉमेडी फिल्म के दृश्य जैसी लगती है, लेकिन हकीकत में यह कानून-व्यवस्था और सुरक्षा में सेंध लगाने की एक गंभीर कोशिश थी। मिर्जापुर कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस की पूरी वर्दी पहनकर आम जनता और कर्मचारियों पर धौंस जमा रहे एक ‘दारोगा जी’ को खुद असली पुलिस ने रंगे हाथों दबोच लिया। जांच में पता चला कि कंधे पर चमकते सितारे और सीने पर लगा पुलिस का बैच पूरी तरह से नकली था। पकड़ा गया यह हाई-प्रोफाइल जालसाज मूल रूप से पड़ोसी जिले प्रयागराज का रहने वाला है।
‘आज तक’ की रिपोर्ट के अनुसार, कलेक्ट्रेट जैसी अति-संवेदनशील जगह पर इस फर्जी दारोगा के ड्रामे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। आइए जानते हैं कि कैसे इस फिल्मी जालसाज की पोल खुली और यह पुलिस के हत्थे चढ़ा।
कलेक्ट्रेट परिसर में रौब झाड़ना पड़ा भारी
बुधवार दोपहर को मिर्जापुर कलेक्ट्रेट परिसर में रोज की तरह अफ़सरों, वकीलों और फरियादियों की भारी भीड़ थी। इसी भीड़ के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस के सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) की वर्दी पहने एक शख्स दाखिल होता है। वर्दी बिल्कुल दुरुस्त थी—कंधे पर दरोगा के स्टार, पैरों में पुलिसिया जूता और चेहरे पर खाकी का रौब।
यह तथाकथित दारोगा परिसर में घूम-घूमकर न केवल आम लोगों पर धौंस जमा रहा था, बल्कि कलेक्ट्रेट के कुछ विभागों के कर्मचारियों पर भी किसी काम को तत्काल करने का अनुचित दबाव बना रहा था। उसका हाई-वोल्टेज ड्रामा काफी देर तक चलता रहा। वह खुद को एक बड़े पुलिस अफसर के तौर पर पेश कर अपनी बात मनवाने की कोशिश कर रहा था।
एक चूक और असली पुलिस को हुआ शक
कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है। इस फर्जी दारोगा की बॉडी लैंग्वेज, बातचीत का असंसदीय लहजा और कलेक्ट्रेट परिसर में बेवजह की संदिग्ध गतिविधियां वहां तैनात कुछ असली पुलिसकर्मियों और सतर्क कर्मचारियों की नजरों में आ गईं।
वहां मौजूद स्थानीय पुलिस अधिकारियों को उसकी हरकतों पर गहरा संदेह हुआ। जब एक स्थानीय पुलिसकर्मी ने सम्मान के साथ उनसे उनकी पोस्टिंग के स्थान, थाने और उनके परिचय पत्र (ID Card) के बारे में सामान्य पूछताछ की, तो ‘दारोगा जी’ के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। वह कड़क आवाज में जवाब देने के बजाय हकलाने लगा और बातें घुमाने की कोशिश करने लगा।
कड़ाई से पूछताछ में खुली पोल
संदेह पुख्ता होते ही स्थानीय पुलिस उसे तुरंत कलेक्ट्रेट चौकी लेकर आई। जब वहां उससे कड़ाई से पूछताछ की गई और उसकी जमा-तलाशी ली गई, तो उसके पास से उत्तर प्रदेश पुलिस का कोई भी वैध पहचान पत्र या शासकीय दस्तावेज बरामद नहीं हुआ। इसके बाद यह साफ हो गया कि खाकी की आड़ में लोगों को डराने और अपना उल्लू सीधा करने आया यह शख्स एक शातिर जालसाज है। मिर्जापुर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी मूल रूप से प्रयागराज का रहने वाला है। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि:
- वह कलेक्ट्रेट परिसर में किस विशिष्ट काम को कराने या किस व्यक्ति को डराने के उद्देश्य से फर्जी वर्दी पहनकर आया था?
- क्या उसने इस फर्जी दरोगा के रूप का इस्तेमाल कर पहले भी मिर्जापुर, प्रयागराज या अन्य सीमावर्ती जिलों में लोगों से अवैध वसूली या धोखाधड़ी की है?
सुरक्षा पर सवाल और सबक
कलेक्ट्रेट और जिला न्यायालय परिसर ऐसी जगहें होती हैं जहां जिला प्रशासन के आला अधिकारी बैठते हैं और सैकड़ों संवेदनशील मामलों की फाइलें होती हैं। ऐसी सुरक्षित जगह पर एक बाहरी जिले का व्यक्ति फर्जी वर्दी पहनकर घंटों घूमता रहे, यह सुरक्षा व्यवस्था की सतर्कता पर एक बड़ा सवाल है।
फिलहाल, मिर्जापुर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शासकीय लोक सेवक का फर्जी रूप धारण करने (धोखाधड़ी) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि खाकी का रौब दिखाकर कुछ समय के लिए तो लोगों को गुमराह किया जा सकता है, लेकिन कानून की नजरों से बचना नामुमकिन है। स्थानीय प्रशासन ने अब कलेक्ट्रेट परिसर में आने-जाने वाले संदिग्धों पर अतिरिक्त नजर रखने के निर्देश दिए हैं।