

शामली : उत्तर प्रदेश के शामली जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जो किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की पटकथा को भी मात देता है। शामली के एक बेहद प्रतिष्ठित और रईस दवा कारोबारी के बेटे का कथित तौर पर ब्रेनवॉश कर उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराने और उसकी करोड़ों रुपये की पुश्तैनी संपत्ति को हड़पने का एक बड़ा और सुनियोजित ‘चक्रव्यूह’ बेनकाब हुआ है। इस पूरे खेल की मास्टरमाइंड चांदनी कुरैशी नाम की एक महिला बताई जा रही है, जिसने अपने परिवार और कुछ अज्ञात मौलवियों के साथ मिलकर एक रईस हिंदू युवक को इस कदर अपने जाल में फंसाया कि उसने न सिर्फ अपना धर्म बदला, बल्कि अपना नाम बदलकर ‘मोहम्मद अली’ (कुछ दस्तावेजों में रहमान) रख लिया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए शामली पुलिस ने तत्परता दिखाई है। पुलिस अधीक्षक (SP) नरेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर गठित एसआईटी (SIT) और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की टीमों ने मुख्य आरोपी चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने कुल 10 लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
अस्पताल के बेड से शुरू हुआ ‘प्रेम का मायाजाल’
इस पूरी साजिश की स्क्रिप्ट साल 2018 में लिखी जानी शुरू हुई थी। शामली के दयानंद नगर निवासी देवराज मलिक इलाके के एक बहुत बड़े दवा कारोबारी हैं। उनके बेटे आयुष मलिक ने बी-फार्मा की पढ़ाई पूरी की थी और वह अपने पिता के भव्य मेडिकल स्टोर के कामकाज को संभालने में हाथ बंटाता था। साल 2018 में आयुष के पैर में एक गंभीर फ्रैक्चर हुआ, जिसके इलाज के लिए उसे शामली के सृष्टि अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसी अस्पताल में उसकी मुलाकात चांदनी कुरैशी से हुई, जो वहां एक प्रोफेशनल फिजिकल थेरेपिस्ट (Physiotherapist) के रूप में काम करती थी। पैर की थेरेपी और इलाज के दौरान चांदनी ने आयुष से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कीं। वह बेहद मीठी बातों और सहानुभूति के जरिए धीरे-धीरे आयुष के विश्वास में आ गई। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी दोनों के बीच बातचीत और मुलाकातों का सिलसिला थमा नहीं, बल्कि बढ़ता चला गया।
जिम और मेडिकल स्टोर तक फैलाया जाल
अस्पताल से निकलने के बाद चांदनी ने आयुष को पूरी तरह अपने प्रभाव में लेने के लिए एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम किया। आयुष जिस स्थानीय जिम में वर्कआउट करने जाता था, चांदनी वहां लेडी जिम ट्रेनर के रूप में शामिल हो गई, ताकि वह आयुष के साथ अधिक से अधिक समय बिता सके और उसकी हर गतिविधि पर नजर रख सके।
साजिश यहीं खत्म नहीं हुई। चांदनी का भाई आस मोहम्मद उर्फ आसू, आयुष के पिता के मेडिकल स्टोर पर सेल्समैन की नौकरी करने लगा। आस मोहम्मद को भली-भांति पता था कि मलिक परिवार की आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत है और उनके पास शहर में करोड़ों रुपये की बेहिसाब चल-अचल संपत्ति है। धीरे-धीरे आयुष की दुकान पर काम करने वाले अधिकांश सेल्समैन चांदनी के भाई के जानने वाले और उसके नेटवर्क के लोग बन गए। इस तरह चांदनी और उसके पूरे परिवार ने आयुष को चारों तरफ से घेर लिया।
पाकिस्तानी मौलाना के वीडियो से ‘ब्रेनवॉश’ और दिल्ली में निकाह
जैसे ही आयुष पूरी तरह चांदनी के प्रेमजाल में अंधा हो गया, वैसे ही उसका मानसिक और धार्मिक रूप से ब्रेनवॉश करने की प्रक्रिया शुरू की गई। चांदनी उसे लगातार इस्लामिक विचारधारा और कट्टरपंथ से जुड़े वीडियो देखने के लिए प्रेरित करने लगी। पुलिस जांच और परिवार के दावों के अनुसार, आयुष को पाकिस्तान के प्रसिद्ध और कट्टरपंथी इस्लामिक वक्ता डॉ. इसरार अहमद के भड़काऊ और धार्मिक भाषणों के वीडियो दिखाए जाते थे। लगातार इन वीडियो को देखने के कारण आयुष का मानसिक संतुलन और उसकी विचारधारा पूरी तरह बदलने लगी।
साल 2023 में साजिश को अंतिम रूप देने के लिए चांदनी और उसका परिवार आयुष को चुपके से दिल्ली और मुंबई ले गए। वहां उसे विभिन्न मस्जिदों और दरगाहों में ले जाया गया, जहां अज्ञात मौलवियों की मदद से उसका बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराया गया। उसका नाम बदलकर ‘मोहम्मद अली’ रख दिया गया। दिल्ली की एक मस्जिद में दोनों का कथित निकाह भी पढ़वाया गया। हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभी तक कोई आधिकारिक मैरिज सर्टिफिकेट या वैध दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है, लेकिन एक फर्जी निकाहनामा तैयार कर आयुष को पूरी तरह ब्लैकमेल किया जा रहा था।
व्यवहार बदला, दाढ़ी बढ़ाई और 5 वक्त की नमाज
धर्मांतरण के बाद आयुष का हुलिया और व्यवहार पूरी तरह बदल गया। वह घर में छिपकर पांच वक्त की नमाज पढ़ने लगा, उसने लंबी दाढ़ी बढ़ा ली और उसका पहनावा भी पूरी तरह बदल गया। जब पिता देवराज मलिक और परिवार के अन्य सदस्यों को आयुष के इस बदले हुए रूप, अजीब हरकतों और संदेहास्पद गतिविधियों की भनक लगी, तो उनके होश उड़ गए।
जब परिवार ने आयुष को समझाने और इस दलदल से बाहर निकालने का प्रयास किया, तो आरोपियों का नेटवर्क और अधिक आक्रामक हो गया। पिता देवराज मलिक ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि चांदनी और उसके परिवार के लोग पिछले 5 सालों से आयुष की सारी कमाई और दुकान का पैसा हड़प रहे थे। यही नहीं, आरोपियों ने आयुष के जरिए परिवार के अन्य सदस्यों पर भी इस्लाम अपनाने का भारी दबाव बनाया। जब मलिक परिवार ने इसका कड़ा विरोध किया, तो उन्हें और उनके बेटे को जान से मारने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी जाने लगीं।
असली मकसद: करोड़ों की वसीयत और जायदाद पर कब्जा
पुलिस और हिंदू संगठनों का साफ तौर पर मानना है कि इस पूरे ‘लव ट्रैप’ और धर्मांतरण के पीछे का असली और मुख्य मकसद सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से आर्थिक था। चांदनी और उसके परिवार की नजर देवराज मलिक की करोड़ों रुपये की अकूत संपत्ति और जमीनों पर थी। उनका इरादा आयुष को उसके माता-पिता और समाज से पूरी तरह काटकर अकेला करना था, ताकि उसकी मानसिक स्थिति का फायदा उठाकर पूरी वसीयत और जायदाद को अपने नाम ट्रांसफर कराया जा सके।
हिंदू संगठनों का आक्रोश और पुलिस की बड़ी कार्रवाई
इस मामले के सामने आते ही शामली में भारी सांप्रदायिक तनाव और आक्रोश फैल गया। स्वामी यशवीर महाराज समेत कई प्रमुख हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने इस मामले को ‘संगठित धर्मांतरण’ और ‘लैंड जिहाद’ का हिस्सा बताते हुए पुलिस प्रशासन को उग्र आंदोलन और महापंचायत की चेतावनी दे डाली। सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होते ही पुलिस भी तुरंत एक्शन मोड में आ गई।
शामली के एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया, “पीड़ित पिता की तहरीर के आधार पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी महिला और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रहा है कि इस रैकेट के तार दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य बाहरी नेटवर्क से कहां तक जुड़े हैं। दोषी पाए जाने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।” दूसरी तरफ, पीड़ित पिता देवराज मलिक का कहना है कि वे कानूनी लड़ाई के साथ-साथ अपने बेटे का शुद्धिकरण कराकर उसकी ससम्मान सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
