‘बिना मुकदमे के कत्ल कर दिया गया बेटा…’, सऊदी अरब से नाराज परिवार ने बांग्लादेश से मांगा इंसाफ, जानें नजरुल इस्लाम की कहानी

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सऊदी अरब ने बांग्लादेश के 2 नागरिकों को मौत की सजा दी है. (Photo: Reuters)

बांग्लादेश के नजरुल इस्लाम की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार का आरोप है कि उनके बेटे को बिना मुकदमे का उचित मौका दिए मौत की सजा दे दी गई। इस घटना के बाद परिजनों ने सऊदी अरब के शासन के प्रति नाराजगी जताई है और बांग्लादेश से न्याय दिलाने की मांग की है।

इस मामले में परिवार के आरोपों और सजा से जुड़ी परिस्थितियों को अलग-अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध शीर्षक और संक्षिप्त विवरण से नजरुल इस्लाम की मौत की पूरी पृष्ठभूमि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों, कानूनी प्रक्रिया और सजा की तारीख की पुष्टि नहीं होती। इसलिए इन तथ्यों को बिना मूल रिपोर्ट के विवरण के निश्चित रूप से बताना उचित नहीं होगा।

‘बिना मुकदमे के कत्ल कर दिया गया बेटा…’, सऊदी अरब से नाराज परिवार ने बांग्लादेश से मांगा इंसाफ, जानें नजरुल इस्लाम की कहानी

बांग्लादेश के नजरुल इस्लाम की मौत की खबर ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर सऊदी अरब गए 22 वर्षीय नजरुल की 14 अक्टूबर 2026 को मक्का में मौत की सजा दे दी गई। परिवार का आरोप है कि उन्हें न तो सजा दिए जाने से पहले कोई सूचना मिली और न ही अपने बेटे का पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर मिलने की जानकारी दी गई। परिवार को इस घटना के बारे में मीडिया रिपोर्टों से पता चला। अब परिजन बांग्लादेश सरकार से मामले की जानकारी जुटाने, न्याय दिलाने और नजरुल का शव वापस घर लाने की मांग कर रहे हैं।

इस घटना ने बांग्लादेश में विदेशों में काम करने वाले नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली राजनयिक सहायता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। बांग्लादेश सरकार ने भी सऊदी अरब से दोनों नागरिकों की सजा और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। हालांकि, मामले के कई अहम पहलुओं पर अभी आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

बेहतर भविष्य की उम्मीद में सऊदी अरब गया था नजरुल

नजरुल इस्लाम बांग्लादेश के ब्राह्मणबाड़िया इलाके का रहने वाला था। परिवार के मुताबिक, वह चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसके पिता अब्दुल बशीर ने बेटे को रोजगार के लिए सऊदी अरब भेजने की उम्मीद में करीब 7 लाख टका का कर्ज लिया था।

नजरुल 10 नवंबर 2022 को सऊदी अरब गया था। वहां वह सफाईकर्मी के तौर पर काम करता था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी मिलने से आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। लेकिन सऊदी अरब पहुंचने के करीब छह महीने बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे परिवार को मुश्किलों में डाल दिया।

परिवार के अनुसार, सऊदी पुलिस ने नजरुल और एक बांग्लादेशी महिला को मक्का की एक मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद नजरुल तीन साल से अधिक समय तक जेल में रहा।

परिजनों का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक उसकी सजा के अंतिम परिणाम की जानकारी नहीं थी। 14 अक्टूबर को उसे मृत्युदंड दिए जाने की खबर सामने आई, जिसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

हर रविवार जेल से फोन करता था बेटा

नजरुल की मां रहीमा बेगम के लिए सबसे दर्दनाक बात यह है कि वह जेल में रहते हुए भी परिवार के संपर्क में था। परिवार के मुताबिक, नजरुल हर रविवार फोन पर घरवालों से बात करता था। इसके बावजूद परिजनों को उसकी मौत की सजा दिए जाने के बारे में पहले से कोई सूचना नहीं मिली।

परिवार को मीडिया रिपोर्टों से उसकी मौत की खबर मिलने के बाद गहरा सदमा लगा। रिपोर्ट के अनुसार, यह खबर सुनने के बाद नजरुल की बुआ आबिदा बेगम की भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इस तरह एक बेटे को खोने के दुख के बीच परिवार को एक और बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।

परिवार का कहना है कि अगर उन्हें पहले जानकारी दी गई होती, तो वे मामले के बारे में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने और कानूनी प्रक्रिया की स्थिति जानने की कोशिश कर सकते थे। हालांकि, नजरुल को कानूनी सहायता मिली थी या नहीं, उसे अपील का अवसर मिला था या नहीं और मुकदमे के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई, इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं।

सऊदी अरब में किस मामले में मिली मौत की सजा?

सऊदी अरब के अधिकारियों के अनुसार, नजरुल इस्लाम और एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक सिति अख्तर को मक्का की एक मस्जिद में कथित अनुचित कृत्य के मामले में दोषी ठहराया गया था। दोनों को 14 अक्टूबर 2026 को मृत्युदंड दिया गया।

सऊदी अधिकारियों के बयान के मुताबिक, मामले की जांच के बाद आरोप लगाए गए और अदालत ने आरोप साबित मानते हुए मौत की सजा सुनाई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सजा इस्लामी कानून की ताजी़र श्रेणी के तहत दी गई थी, जिसमें अपराध और दंड तय करने का अधिकार न्यायिक विवेक पर निर्भर करता है /

हालांकि, सऊदी अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में कथित कृत्य का विस्तृत विवरण, संबंधित मस्जिद का नाम और गिरफ्तारी तथा मुकदमे की पूरी समय-सीमा स्पष्ट नहीं की गई है। यह भी स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं है कि नजरुल को वकील मिला था या नहीं और क्या उसे फैसले के खिलाफ अपील करने का अवसर दिया गया था। इसलिए इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।

परिवार ने उठाए न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल

नजरुल के परिवार का आरोप है कि सऊदी अधिकारियों ने उन्हें मृत्युदंड दिए जाने से पहले सूचित नहीं किया। परिवार का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की मौत की खबर मीडिया के जरिए मिली। इसी वजह से परिजन पूरे मामले की जानकारी और न्यायिक प्रक्रिया के बारे में जवाब चाहते हैं।

नजरुल के पिता अब्दुल बशीर ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि यदि उनके बेटे को उचित कारण और निष्पक्ष प्रक्रिया के बिना फांसी दी गई है, तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए। परिवार चाहता है कि बांग्लादेश सरकार मामले की परिस्थितियों की जानकारी हासिल करे और यह स्पष्ट करे कि उनके बेटे के साथ क्या हुआ था।

परिवार की मांग केवल मामले की जांच तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि नजरुल का शव सऊदी अरब से बांग्लादेश वापस लाया जाए, ताकि उसका अंतिम संस्कार अपने देश में किया जा सके। इसके लिए उन्होंने सरकार से मदद मांगी है।

सात लाख टका का कर्ज, अब परिवार के सामने आर्थिक संकट

नजरुल की मौत के बाद परिवार को भावनात्मक नुकसान के साथ आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है। उसके पिता ने बेटे को विदेश भेजने के लिए करीब 7 लाख टका उधार लिए थे। उन्हें उम्मीद थी कि नजरुल की कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी।

लेकिन बेटे की मौत के बाद यह उम्मीद टूट गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्ज देने वाले लोग अब अब्दुल बशीर पर रकम वापस करने का दबाव बना रहे हैं। ऐसे में परिवार को एक तरफ बेटे को खोने का दुख झेलना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कर्ज चुकाने की चिंता भी सता रही है।

परिजनों ने स्थानीय प्रशासन से भी मदद की उम्मीद जताई है। ब्राह्मणबाड़िया के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद अबू सईद ने कहा कि अधिकारियों को इस संबंध में उच्च स्तर से कोई निर्देश नहीं मिला था और परिवार की ओर से भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि यदि शव बांग्लादेश लाया जाता है, तो नियमों के अनुसार सहायता की जा सकती है।

बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अरब से मांगी जानकारी

मामले की जानकारी सामने आने के बाद बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अरब से आधिकारिक विवरण मांगा है। 18 अक्टूबर को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने सऊदी राजदूत के साथ बैठक में दोनों नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने की परिस्थितियों पर जानकारी मांगी।

बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि सरकार को सऊदी अरब से इस मामले का विस्तृत आधिकारिक विवरण नहीं मिला था। बांग्लादेश ने इस संबंध में औपचारिक राजनयिक पत्र भेजकर आरोपों, कानूनी प्रक्रिया और मृत्युदंड की परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।

सरकार ने यह भी कहा है कि सऊदी अधिकारियों से जवाब मिलने के बाद शवों को वापस लाने समेत आगे के कदमों पर विचार किया जा सकता है। बांग्लादेश ने मामले पर जानकारी मांगी है, लेकिन साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को बनाए रखने की बात भी कही है।

विदेशों में काम करने वाले बांग्लादेशियों की सुरक्षा का सवाल

सऊदी अरब बांग्लादेशी नागरिकों के लिए रोजगार का एक बड़ा केंद्र है। बड़ी संख्या में बांग्लादेशी वहां काम करते हैं और अपनी कमाई से परिवारों का खर्च चलाते हैं। ऐसे में नजरुल की मौत का मामला विदेशों में काम करने वाले नागरिकों को कानूनी सहायता और राजनयिक संरक्षण मिलने के सवाल को सामने लाता है।

नजरुल के परिवार की मांग है कि सरकार मामले की पूरी जानकारी हासिल करे, मृत्युदंड से जुड़ी प्रक्रिया स्पष्ट कराए और उसके शव को घर वापस लाने में मदद करे। फिलहाल सऊदी अरब की ओर से मांगी गई विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

नजरुल इस्लाम की कहानी एक ऐसे परिवार की त्रासदी है, जिसने बेहतर भविष्य की उम्मीद में बेटे को विदेश भेजा था, लेकिन अब उसे खोने के बाद न्याय, जवाब और अपने बेटे के शव की वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मामले के कई कानूनी पहलू अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए परिवार के आरोपों, सऊदी अधिकारियों के बयान और बांग्लादेश सरकार की मांग—तीनों को अलग-अलग समझना इस मामले की पूरी तस्वीर जानने के लिए जरूरी है।

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