Carrying the dream of his family and his coach, Madhav Tiwari’s journey into the sport is one of unwavering obsession ©BCCI/IPL

दिल्ली कैपिटल्स के युवा ऑलराउंडर Madhav Tiwari की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। आज IPL में उनकी चर्चा हो रही है, लेकिन कुछ साल पहले तक हालात ऐसे थे कि अगर क्रिकेट में बात नहीं बनती, तो उन्हें MBA की पढ़ाई करनी पड़ती। खुद उनके पिता अवधेश तिवारी बताते हैं कि माधव ने उनसे वादा किया था कि अगर एक-दो साल में वो मध्य प्रदेश टीम में जगह नहीं बना पाए, तो क्रिकेट छोड़कर MBA करेंगे। मगर उन्होंने अपने बेटे को सपनों का पीछा करने की इजाज़त दी, और आज वही फैसला सही साबित होता दिख रहा है।

22 साल के माधव अब तक सीनियर मध्य प्रदेश टीम के लिए डेब्यू नहीं कर पाए हैं। उनके नाम कोई बड़ा घरेलू रिकॉर्ड भी नहीं है। लेकिन IPL 2026 में Delhi Capitals के लिए पंजाब किंग्स के खिलाफ उनकी मैच जिताऊ परफॉर्मेंस ने अचानक उन्हें सुर्खियों में ला दिया। धर्मशाला में खेले गए मुकाबले में उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से अहम योगदान दिया और प्लेयर ऑफ द मैच बने।

माधव का बचपन मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मौगंज इलाके से जुड़ा है। हालांकि उनका परिवार लंबे समय से इंदौर में रहता है, जहां उनका ट्रांसपोर्ट का बिजनेस है। संयुक्त परिवार में पले-बढ़े माधव बचपन से ही क्रिकेट को लेकर जुनूनी थे। उनके पिता बताते हैं कि जब वो सिर्फ 13 साल के थे, तब 20-25 साल के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलते थे और उनकी गेंदों पर छक्के मारते थे। आसपास के लोग तभी से कहने लगे थे कि लड़के में कुछ खास बात है।

दिलचस्प बात ये है कि माधव पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे। स्कूल में लगातार 80-90 प्रतिशत अंक लाते थे। ऐसे में उनके पिता चाहते थे कि वो पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दें। क्रिकेट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखकर उन्हें डर भी लगता था कि कहीं बेटा अपना समय बर्बाद न कर दे। लेकिन मोहल्ले के लोगों और परिवार वालों का भरोसा देखकर उन्होंने आखिरकार क्रिकेट को मौका देने का फैसला किया।

इसके बाद माधव का एडमिशन पूर्व भारतीय क्रिकेटर Amay Khurasiya की क्रिकेट अकादमी में कराया गया। घर से अकादमी लगभग 20 किलोमीटर दूर थी। सुबह 5 बजे उठकर प्रैक्टिस के लिए जाना रोज़ की दिनचर्या बन गई। परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया। बिजनेस की जिम्मेदारियां दूसरे लोग संभाल लेते ताकि माधव सिर्फ क्रिकेट पर फोकस कर सकें।

माधव के पिता बताते हैं कि उनके दादा का भी सपना था कि वो बड़ा क्रिकेटर बने। जब भी वो गांव से इंदौर आते, तो अपनी Royal Enfield Bullet पर बैठाकर माधव को अकादमी छोड़ने जाते थे। गांव में मिठाइयां बांटते और लोगों से कहते कि उनका पोता एक दिन बड़ा क्रिकेटर बनेगा। हालांकि वो आज माधव की सफलता देखने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन परिवार मानता है कि उनकी दुआएं ही माधव को यहां तक लेकर आई हैं।

अकादमी में शुरुआत में माधव सिर्फ बल्लेबाजी करना चाहते थे। लेकिन अमय खुरासिया की अकादमी का नियम था कि हर खिलाड़ी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों करेगा। ऐसे में उन्हें गेंदबाजी भी करनी पड़ी। धीरे-धीरे यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।

खुरासिया बताते हैं कि माधव की टाइमिंग और मैच के प्रति उनका रवैया शुरू से अलग था। वो लंबे समय तक नेट्स में प्रैक्टिस करते रहते। साथी खिलाड़ी चले जाते, लेकिन माधव खेलना बंद नहीं करते। कभी-कभी देर रात दोस्तों को बुलाकर फिर से प्रैक्टिस शुरू कर देते। उनके पिता भी रात में बैठकर उन्हें खेलते देखते रहते।

माधव की क्रिकेट के प्रति दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोविड लॉकडाउन के दौरान जब मैदान बंद हो गए, तो उन्होंने घर में प्रैक्टिस के लिए बॉलिंग मशीन मंगवा ली। घर की दीवारों पर गेंद लगने से निशान पड़ गए थे, लेकिन प्रैक्टिस नहीं रुकी। उनके पिता हंसते हुए कहते हैं, “क्रिकेट के अलावा उसे दुनिया में कुछ नहीं दिखता।”

एक बार अंडर-12 मैच में उनका अंगूठा टूट गया था। मैच का आखिरी ओवर बचा था और विपक्षी टीम को जीत के लिए सिर्फ कुछ रन चाहिए थे। तब माधव ने कप्तान से गेंद छीनकर कहा कि आखिरी ओवर वो डालेंगे। चोट के बावजूद उन्होंने टीम को मैच जिताया। तभी से उनके कोच को यकीन हो गया था कि लड़के में बड़े मैच खेलने का दम है।

हालांकि प्रतिभा होने के बावजूद उनका सफर आसान नहीं रहा। मध्य प्रदेश की सीनियर टीम में जगह अब तक नहीं मिली। लेकिन 2024 में मध्य प्रदेश टी20 लीग में Bhopal Leopards के लिए खेलते हुए उन्होंने सबका ध्यान खींचा। उस सीजन में उनका स्ट्राइक रेट 205 से ज्यादा था। वो मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते थे और साथ ही तेज गेंदबाजी भी करते थे।

यही वो चीज थी जिसने IPL स्काउट्स को प्रभावित किया। Delhi Capitals ने उन्हें 40 लाख रुपये के बेस प्राइस पर खरीद लिया।

माधव के पिता बताते हैं कि ऑक्शन के दौरान काफी देर तक उनका नाम नहीं आया। वो एक शादी में गए हुए थे और उम्मीद लगभग छोड़ चुके थे। तभी उनके भतीजे ने चिल्लाकर बताया कि माधव को दिल्ली कैपिटल्स ने खरीद लिया है। इसके बाद शादी का माहौल ही बदल गया और लोग लगातार बधाई देने लगे।

IPL डेब्यू भी आसान नहीं रहा। 2025 में पंजाब किंग्स के खिलाफ धर्मशाला में उन्हें पहला मैच खेलने का मौका मिला, लेकिन बॉर्डर तनाव की वजह से टूर्नामेंट बीच में रुक गया। अगले मैच में वो Mumbai Indians के खिलाफ खेले, जहां Jasprit Bumrah की स्लोअर यॉर्कर पर सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हो गए।

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अगले साल फिर मेहनत जारी रखी। यहां तक कि अपनी इकलौती बहन की शादी तक मिस कर दी, क्योंकि उन्हें अहमदाबाद में मैच खेलने जाना था। उनके पिता बताते हैं कि एयरपोर्ट छोड़कर लौटते वक्त वो रो पड़े थे कि बेटा अपनी बहन की शादी तक में शामिल नहीं हो पाया।

IPL 2026 में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें रिटेन किया। लंबे इंतजार के बाद पंजाब किंग्स के खिलाफ उन्हें मौका मिला और इस बार उन्होंने खुद को साबित कर दिया। उन्होंने 2 विकेट लिए और फिर 18 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई।

उनके पिता कहते हैं कि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि माधव प्लेइंग इलेवन में होंगे। जैसे ही टीम में उनका नाम देखा, फोन कॉल्स की लाइन लग गई। वो मैच ठीक से देख भी नहीं पाए क्योंकि लगातार बधाइयां आती रहीं।

अब माधव तिवारी का नाम तेजी से चर्चा में है। उनके कोच अमय खुरासिया मानते हैं कि वो भविष्य में भारत के लिए खेल सकते हैं। उनके मुताबिक, माधव रेड-बॉल क्रिकेट में बेहद खतरनाक गेंदबाज हैं, जो 137-138 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से स्विंग करा सकते हैं। साथ ही बल्लेबाजी में भी लंबे समय तक टिकने की क्षमता रखते हैं।

एक ऐसे खिलाड़ी के लिए, जो कुछ साल पहले MBA और क्रिकेट के बीच फैसला लेने की स्थिति में था, आज कहानी पूरी तरह बदल चुकी है। अब उनका सपना सिर्फ IPL तक सीमित नहीं है। अगला लक्ष्य भारतीय टीम तक पहुंचना है।

By ABHI KK

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