विकास की नींव रखने वालों का ऐतिहासिक सम्मान: जेवर एयरपोर्ट से पहली उड़ान भरेंगे जमीन देने वाले किसान

172 किसानों ने एयरपोर्ट के लिए दी है अपनी जमीन. (Photo: ITG)

ग्रेटर नोएडा:भारतीय नागरिक उड्डयन और बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के इतिहास में 15 जून का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर के दूसरे और देश के सबसे महत्वाकांक्षी हवाई अड्डों में से एक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से पहली कमर्शियल और उद्घाटन उड़ान (Inaugural Flight) रवाना होने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन इस उद्घाटन की सबसे खास और अभूतपूर्व बात यह है कि इस विमान में कोई बड़े राजनेता, उद्योगपति या वीवीआईपी (VVIP) सफर नहीं करेंगे। इस पहली ऐतिहासिक उड़ान के यात्री वह 172 किसान होंगे, जिन्होंने राष्ट्रहित में अपनी पीढ़ियों से संजोई हुई उपजाऊ और पैतृक भूमि इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए खुशी-खुशी समर्पित कर दी थी।

यह संभवतः दुनिया के विमानन इतिहास में पहला ऐसा अनूठा उदाहरण है, जहां जिस जमीन पर कभी किसान हल चलाया करते थे और फसलें उगाते थे, उसी जमीन के रनवे से पहला विमान उड़ेगा और वे खुद उसके पहले मुसाफिर बनेंगे।

‘खेत से आसमान तक’ का सफर: किसानों में भारी उत्साह

जेवर के रोही, रन्हेरा, बनवारीवास, दयानतपुर, किशोरपुर और सिवारा जैसे गांवों के लगभग 172 किसान (जिनमें 20 महिला किसान और भूमिहीन कृषि मजदूर भी शामिल हैं) इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनने जा रहे हैं। शनिवार और रविवार को जब प्रशासन और जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह द्वारा इन किसानों को हवाई यात्रा के ‘बोर्डिंग पास’ सौंपे गए, तो पूरे ग्रामीण इलाके में उत्सव जैसा माहौल हो गया।

कई बुजुर्ग किसानों की आंखें खुशी से छलक आईं। किसानों ने बताया कि उन्हें बाकायदा पास सौंपे गए हैं, जिन पर छपा क्रमांक ही फ्लाइट में उनकी सीट संख्या होगी। ग्रामीणों के लिए यह अनुभव बेहद भावुक करने वाला है। जो किसान कभी हवाई जहाजों को सिर्फ आसमान में उड़ते हुए देखा करते थे, आज देश का सबसे बड़ा एविएशन हब उन्हीं के त्याग और सहयोग की बदौलत खड़ा हुआ है और वही इसके पहले साक्षी बन रहे हैं।

प्रशासन द्वारा ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले इन किसानों को एयरपोर्ट सुरक्षा और नियमों को लेकर कुछ बुनियादी जानकारियां भी दी गई हैं, जैसे कि सुरक्षा जांच के दौरान क्या सावधानी बरतनी है और विमान में कौन सी चीजें ले जाना प्रतिबंधित है।

इंडिगो का विशेष विमान और लखनऊ का कार्यक्रम

शेड्यूल के मुताबिक, 15 जून की सुबह इंडिगो (IndiGo) का एयरबस A320 विमान इन 172 किसानों और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर जेवर एयरपोर्ट से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए उड़ान भरेगा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेवर के स्थानीय विधायक धीरेंद्र सिंह कर रहे हैं, जिन्होंने किसानों और सरकार के बीच इस पूरी परियोजना के दौरान एक सेतु का काम किया।

लखनऊ पहुंचने पर इन सभी अन्नदाताओं का भव्य और पारंपरिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद सभी किसान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात दोतरफा आभार का प्रतीक होगी:

  • मुख्यमंत्री का आभार: सीएम योगी खुद इन किसानों का अभिनंदन करेंगे और देश के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बिना किसी विवाद के धरातल पर उतारने के लिए उनके सहयोग की सराहना करेंगे।
  • किसानों का धन्यवाद: किसान भी मुख्यमंत्री को क्षेत्र में हुए चौतरफा विकास, बेहतर मुआवजे और पुनर्वास की उचित व्यवस्था के लिए धन्यवाद देंगे।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि समय अनुकूल रहा तो लखनऊ के कार्यक्रमों के बाद इन किसानों को अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन कराने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे उनकी यह यात्रा और अधिक आध्यात्मिक और स्मरणीय बन सके।

‘सबका साथ, सबका विकास’ का जीवंत उदाहरण

आमतौर पर भारत या दुनिया के किसी भी हिस्से में जब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स— जैसे एक्सप्रेसवे, डैम्स या एयरपोर्ट्स— के लिए जमीन का अधिग्रहण (Land Acquisition) किया जाता है, तो किसानों और प्रशासन के बीच टकराव, अदालती मामले और लंबे विवाद देखने को मिलते हैं। जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए भी करीब 1334 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जो कि एक बेहद जटिल काम था।

लेकिन जेवर के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की पारदर्शी नीतियों, उचित संवाद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सूझबूझ ने इस पूरी प्रक्रिया को एक मिसाल बना दिया। किसानों को न केवल उनकी जमीनों का बेहतर मुआवजा मिला, बल्कि उन्हें आधुनिक टाउनशिप में पुनर्वासित भी किया गया। अब, पहली उड़ान में उन्हें मुख्य अतिथि बनाकर सरकार ने देश को संदेश दिया है कि विकास की इस यात्रा में समाज के सबसे जमीनी हिस्से को पीछे नहीं छोड़ा गया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” को धरातल पर चरितार्थ करता है।

जेवर एयरपोर्ट: दिल्ली-एनसीआर और यूपी की नई लाइफलाइन

15 जून से शुरू हो रही उड़ानों के साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का एक प्रमुख एविएशन हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। पहले चरण में यह एयरपोर्ट लखनऊ के अलावा दिल्ली-एनसीआर को मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ेगा।

इस एयरपोर्ट के चालू होने से न केवल दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट का हवाई दबाव कम होगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा) के करोड़ों यात्रियों को एक विश्वस्तरीय विकल्प मिलेगा। इसके साथ ही, यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी (YEIDA) के इस पूरे क्षेत्र में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स हब, औद्योगिक गलियारों और होटल इंडस्ट्री में भारी उछाल आना तय माना जा रहा है, जिससे लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।

अन्नदाता बने ‘भाग्यविधाता’

जेवर की धरती से जब 15 जून की सुबह पहला विमान रनवे पर दौड़ते हुए आसमान की ऊंचाइयों को छुएगा, तो वह सिर्फ एक तकनीकी उड़ान नहीं होगी। वह उड़ान होगी भारतीय किसान के आत्मसम्मान की, उसके त्याग की और नए भारत (New India) के समावेशी विकास की। जमीन देने वाले ये 172 किसान आज सही मायनों में इस परियोजना के भाग्यविधाता बनकर आसमान का सफर तय करने जा रहे हैं, जो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए गर्व का विषय रहेगा।

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