गाजियाबाद: अवैध स्पीड ब्रेकर ने ली 34 वर्षीय बाइक सवार की जान; राजेंद्र नगर में हादसा, RWA पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद ब्रेकर को चुपके से हटवा देने का आरोप है. (Photo: Screengrab)

गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से बुनियादी नागरिक सुविधाओं और लापरवाही से जुड़ी एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। महानगर के राजेंद्र नगर सेक्टर-2 इलाके में सड़क पर बने एक कथित अवैध स्पीड ब्रेकर के कारण 34 वर्षीय बाइक सवार युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई। इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है और कॉलोनी की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए इस स्पीड ब्रेकर ने एक हंसते-खेलते परिवार के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजेंद्र नगर सेक्टर-2 की आंतरिक सड़क से मंगलवार को 34 वर्षीय बाइक सवार युवक गुजर रहा था। सड़क पर आरडब्ल्यूए या स्थानीय स्तर पर बिना किसी तकनीकी मापदंड के एक अनधिकृत (अवैध) स्पीड ब्रेकर बनाया गया था। इस स्पीड ब्रेकर पर न तो कोई सफेद रिफ्लेक्टर पट्टी (White Stripes) लगाई गई थी और न ही इसके आगे कोई चेतावनी बोर्ड लगा था, जिससे दूर से आने वाले वाहन चालक को इसका अंदाजा हो सके।

तेज रफ्तार या सामान्य गति से आ रहा बाइक सवार जैसे ही इस ऊंचे और अनियंत्रित स्पीड ब्रेकर के संपर्क में आया, उसकी मोटरसाइकिल का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। बाइक से उछलकर युवक सड़क पर बेहद हिंसक तरीके से गिरा। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट आने के कारण वह मौके पर ही लहूलुहान होकर अचेत हो गया। स्थानीय लोग तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

RWA के ‘मनमाने’ फैसलों पर फूटा जनता का गुस्सा

इस हादसे के बाद राजेंद्र नगर सेक्टर-2 के निवासियों का गुस्सा भड़क उठा। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि कॉलोनी की आरडब्ल्यूए (RWA) ने अपनी मनमर्जी चलाते हुए नगर निगम या लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनुमति के बिना इस खतरनाक स्पीड ब्रेकर का निर्माण करवाया था।

स्थानीय निवासियों ने कुछ गंभीर मुद्दे उठाए हैं:

“कॉलोनियों के भीतर अक्सर सुरक्षा के नाम पर इतने ऊंचे और बेतरतीब स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं जो ‘स्पीड ब्रेकर’ नहीं बल्कि ‘बोन ब्रेकर’ (हड्डी तोड़ने वाले) साबित होते हैं। इन पर कोई पेंट नहीं होता, जिससे रात के अंधेरे में या दोपहर की तेज धूप में ये बिल्कुल दिखाई नहीं देते। यह कोई हादसा नहीं, बल्कि आरडब्ल्यूए की लापरवाही के कारण हुई हत्या है।”

क्या कहते हैं नियम?

भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक या रिहायशी इलाके की सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनाने के कड़े नियम हैं:

  • गति अवरोधक (Speed Breaker) की ऊंचाई 10 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और इसकी चौड़ाई 3.7 मीटर के आकार में घुमावदार (Parabolic) होनी चाहिए।
  • वाहन चालकों को सचेत करने के लिए इस पर सफेद और काली पट्टियां चमकीले पेंट से पेंट की जानी अनिवार्य हैं।
  • स्पीड ब्रेकर से कम से कम 40 मीटर पहले एक स्पष्ट चेतावनी साइनबोर्ड लगा होना चाहिए।

राजेंद्र नगर में बना यह कथित स्पीड ब्रेकर इन सभी नियमों का उल्लंघन कर रहा था, जो अंततः एक जानलेवा जाल बन गया।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

गाजियाबाद नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि इस बात की जांच की जाएगी कि यह स्पीड ब्रेकर किसकी अनुमति से और किन मानकों पर बनाया गया था। यदि यह पूरी तरह अवैध पाया जाता है, तो निर्माण कराने वाले जिम्मेदार पदाधिकारियों (RWA सदस्यों) के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पूरे दिल्ली-एनसीआर में कॉलोनियों के भीतर अवैध रूप से बनाए जा रहे गति अवरोधकों की तरफ प्रशासन का ध्यान खींचा है।

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