
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की 10,470 मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी पाई गई है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) और एक कंप्यूटर सहायक के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। कंप्यूटर सहायक की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मतदाता सूचियों की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों से निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
13,779 फॉर्म की एंट्री, लेकिन रिकॉर्ड नहीं मिले
जांच में सामने आया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर में कार्यरत कंप्यूटर सहायक ने 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच मतदाता विवरण में सुधार के लिए कुल 13,779 फॉर्म-8 आवेदनों की ऑनलाइन एंट्री की थी।
फॉर्म-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम, पता और अन्य व्यक्तिगत विवरणों में सुधार के लिए किया जाता है। जांच के दौरान इन आवेदनों से संबंधित भौतिक फॉर्म और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले।
इन 13,779 आवेदनों में से 10,470 को मंजूरी दी गई थी, जबकि 3,309 आवेदन खारिज कर दिए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मंजूर किए गए सभी 10,470 आवेदनों में अनियमितताएं पाई गईं।
अब निर्वाचन अधिकारियों ने इन प्रविष्टियों को दोबारा जांचकर सही करने की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के बावजूद इन आवेदनों को मंजूरी कैसे मिली।
दो एसडीएम और कंप्यूटर सहायक पर कार्रवाई
इस मामले में तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और कंप्यूटर सहायक की भूमिका जांच के दायरे में आई है। रिपोर्टों के अनुसार, पीलीभीत सदर क्षेत्र में संबंधित अवधि के दौरान एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी की जिम्मेदारी थी।
जिला प्रशासन के मुताबिक, दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है और उन्हें जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। कंप्यूटर सहायक अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिकारियों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों और निगरानी व्यवस्था का पालन हुआ था या नहीं।
वोटर आईडी नंबर पर दिख रहे थे दूसरे लोगों के नाम
यह मामला तब सामने आया, जब कुछ मतदाताओं ने शिकायत की कि उनकी वोटर आईडी यानी EPIC नंबर ऑनलाइन जांचने पर उनके बजाय दूसरे लोगों के नाम और विवरण दिखाई दे रहे हैं।
पीलीभीत के अधिवक्ता फैजान अली खान ने भी शिकायत की थी कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी मतदाता सूची में उनका और उनके छोटे भाई फरहान का नाम मौजूद होने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में अलग-अलग नाम दिखाई दे रहे थे।
फैजान के अनुसार, उनके EPIC नंबर की जांच करने पर ‘रईस अली’ नाम दिखाई दिया, जबकि उनके भाई के रिकॉर्ड में ‘गुफरान असलम’ नाम दर्ज था। उन्होंने दावा किया कि इन नामों के साथ दर्ज पिता या रिश्तेदार के विवरण भी उनके वास्तविक पारिवारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
फैजान ने प्रशासन से सही विवरण बहाल करने और यह जांचने की मांग की थी कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव कैसे किए गए।
शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई। जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने पर निर्वाचन अधिकारियों ने कार्रवाई के निर्देश दिए।
CEO ने पूरे उत्तर प्रदेश में जांच के आदेश क्यों दिए?
पीलीभीत में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को यह जांचने के लिए कहा गया है कि कहीं मतदाता पहचान संख्या के सामने गलत नाम या विवरण तो दर्ज नहीं हैं। इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े आवेदनों की भी जांच की जा रही है।
पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी को कंप्यूटर सहायक की ओर से 10 अप्रैल से 21 अक्टूबर 2026 के बीच दर्ज किए गए फॉर्म-6 और फॉर्म-7 आवेदनों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
- फॉर्म-6: मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए।
- फॉर्म-7: मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए।
- फॉर्म-8: मतदाता विवरण में सुधार के लिए।
निर्वाचन अधिकारियों से कहा गया है कि वे रिकॉर्ड की जांच करके विस्तृत रिपोर्ट दें और अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करें। पीलीभीत जिले की अन्य विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की भी जांच की जा रही है।
कांग्रेस और सपा ने भी उठाए सवाल
पीलीभीत की मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस मामले को उठाते हुए मतदाता रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर सवाल किए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम और विवरण में बदलाव किए गए, जबकि उनकी पहचान संख्या में बदलाव नहीं हुआ। पार्टी नेताओं ने अपने स्तर पर भी मतदाता सूची की जांच करने का दावा किया है।
समाजवादी पार्टी ने भी निर्वाचन सूची में अनियमितताओं की आशंका जताई है। पार्टी का कहना है कि जांच केवल पीलीभीत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाता रिकॉर्ड की पड़ताल होनी चाहिए।
वहीं, भाजपा की ओर से कहा गया है कि मतदाता सूचियों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों को पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। भाजपा ने भी कहा है कि यदि किसी ने जानबूझकर बदलाव किए हैं, तो जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
मतदाताओं के लिए क्यों अहम है यह मामला?
मतदाता सूची में नाम और पहचान संबंधी गलतियां किसी व्यक्ति के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती हैं। यदि वोटर आईडी नंबर के साथ गलत विवरण दर्ज हो जाए या सही नाम सूची में दिखाई न दे, तो चुनाव के समय मतदाता को परेशानी हो सकती है।
इसी वजह से निर्वाचन अधिकारियों ने अनियमित प्रविष्टियों को सुधारने और अन्य जिलों में भी जांच कराने का फैसला किया है। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी वोटर आईडी और मतदाता सूची में दर्ज नाम, पता तथा अन्य विवरणों का मिलान कर लें। कोई गड़बड़ी दिखाई देने पर संबंधित निर्वाचन कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।
फिलहाल पीलीभीत में 10,470 स्वीकृत फॉर्म-8 प्रविष्टियों की दोबारा जांच की जा रही है। पूरे उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस तरह की अनियमितताएं अन्य क्षेत्रों में भी सामने आती हैं या नहीं।
