
उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने आजमगढ़ से 19 वर्षीय युवक मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि युवक प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल कायदा इन द इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा से प्रभावित था और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहा था। ATS के मुताबिक, वह WhatsApp ग्रुप के माध्यम से कथित तौर पर आतंकी विचारधारा से जुड़ी सामग्री साझा करता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, नबील आजमगढ़ के दीदारगंज थाना क्षेत्र के चितारा, महमूदपुर का रहने वाला है। ATS को उसकी ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच के दौरान उसके सोशल मीडिया और मोबाइल फोन से जुड़े कई डिजिटल सुराग सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद शनिवार, 12 सितंबर को उसे गिरफ्तार किया गया।
ATS का कहना है कि नबील ने WhatsApp पर ‘ला गालिब-इल्लल्लाह’ नाम से एक ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में कथित तौर पर युवाओं को जोड़ा गया और बातचीत के दौरान कुछ कोड वर्ड इस्तेमाल किए जाते थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, ग्रुप की गतिविधियां सामान्य बातचीत तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इनमें कथित तौर पर कट्टरपंथी और आतंकी विचारधारा से संबंधित सामग्री भी साझा की जाती थी।
एजेंसी के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में कुछ ऐसी किताबों और डिजिटल सामग्री का भी पता चला, जिन्हें आतंकी विचारधारा से जोड़कर देखा जा रहा है। ATS का दावा है कि इनमें ‘जिहाद करने के 44 तरीके’ नाम की सामग्री भी शामिल थी। इसके अलावा ‘तीसरी जंग-ए-अजीम और दज्जाल’ जैसी सामग्री साझा किए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, इन डिजिटल सामग्रियों की जांच इस बात को समझने के लिए की जा रही है कि आरोपी का संपर्क किस स्तर तक था और उसके नेटवर्क में कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
जांच में कुछ अन्य WhatsApp ग्रुप से उसके संपर्क में होने का भी दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें अलग-अलग देशों के लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। ATS अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नबील केवल ऑनलाइन सामग्री साझा कर रहा था या किसी बड़े नेटवर्क के निर्देश पर काम कर रहा था। उसके कथित विदेशी संपर्कों और भविष्य की योजनाओं को लेकर भी जांच जारी है।
ATS के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर दूसरे देशों में जाकर ट्रेनिंग लेने की योजना से जुड़ी बातचीत में भी शामिल था। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश का जिक्र किया गया है। हालांकि, इन दावों की पूरी तस्वीर जांच और डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। अधिकारियों ने उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए कब्जे में लिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने किन लोगों से संपर्क किया और उसके ऑनलाइन नेटवर्क की वास्तविक सीमा क्या थी।
इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने की चुनौती को सामने ला दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म अब जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं, क्योंकि बंद ग्रुप और निजी चैट के जरिए लोगों तक विचारधारा और प्रचार सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे मामलों में एजेंसियां केवल आरोपी के मोबाइल या सोशल मीडिया अकाउंट की जांच नहीं करतीं, बल्कि उसके संपर्कों, चैट, डिजिटल फाइलों और ऑनलाइन गतिविधियों की कड़ियों को भी जोड़ने की कोशिश करती हैं।
फिलहाल ATS नबील से पूछताछ कर उसके कथित संपर्कों और नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है। एजेंसी यह भी जांच रही है कि उसके साथ और कौन लोग जुड़े हुए थे और क्या किसी तरह की वास्तविक आतंकी गतिविधि की तैयारी की जा रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
हालांकि, आरोपी पर लगाए गए आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है। जांच एजेंसियां डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। आने वाले समय में फोरेंसिक जांच और पूछताछ से यह स्पष्ट हो सकता है कि नबील की भूमिका केवल ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित थी या वह किसी बड़े AQIS नेटवर्क के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था।
