ट्रेन में सीट नहीं मिली तो फैलाई बम की अफवाह! ऐशबाग स्टेशन पर मची अफरा-तफरी, युवक गिरफ्तार

UTTAR PRADESH

लखनऊ: — उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को एक ऐसी अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई, जिसने रेलवे प्रशासन से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक के होश उड़ा दिए। एक यात्री ने सिर्फ इसलिए पूरी एक्सप्रेस ट्रेन में बम होने की खौफनाक अफवाह फैला दी, क्योंकि ट्रेन के डिब्बे में अत्यधिक भीड़ थी और उसे बैठने के लिए सीट नहीं मिल पा रही थी।

फैलाई बम की अफवाह (Photo: itg)

इस सिरफिरे यात्री की एक झूठी फोन कॉल की वजह से पूरे ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर भारी हड़कंप, चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP), बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और स्थानीय पुलिस ने भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंचकर करीब दो घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। जब ट्रेन से कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और कॉल फर्जी साबित हुई, तब जाकर सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी युवक को स्टेशन परिसर से ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।

भीड़ देखकर झुंझलाया, फिर रची ‘खतरनाक’ साजिश

जीआरपी (GRP) लखनऊ से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी युवक की पहचान उत्तर प्रदेश के ही एक स्थानीय निवासी के रूप में हुई है, जो ऐशबाग स्टेशन से रवाना होने वाली एक पैसेंजर/एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए स्टेशन पहुंचा था।

गर्मियों के सीजन और शादियों के चलते इन दिनों ट्रेनों में भारी भीड़ उमड़ रही है। जब आरोपी युवक ट्रेन के जनरल कोच (सामान्य डिब्बे) में दाखिल हुआ, तो कोच खचाखच भरा हुआ था। पैर रखने तक की जगह नहीं थी और सभी सीटें पहले से ही बुक या भरी हुई थीं। आरोपी ने काफी देर तक बोगी के अंदर सीट खोजने का प्रयास किया, लेकिन जब उसे बैठने के लिए एक इंच जगह भी नसीब नहीं हुई, तो वह बुरी तरह झुंझला गया। साथी यात्रियों और रेलवे की इस व्यवस्था से नाराज होकर उसने एक ऐसी आत्मघाती और बेवकूफाना साजिश रच डाली, जिसने सैकड़ों यात्रियों की जान सांसत में डाल दी।

युवक ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और सीधे पुलिस आपातकालीन सेवा नंबर ‘डायल 112’ पर फोन मिला दिया। उसने बेहद घबराए हुए लहजे में ऑपरेटर से कहा:

“ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर जो ट्रेन खड़ी है, उसके जनरल डिब्बे में एक लावारिस बैग में टाइम बम रखा हुआ है। यह बम अगले कुछ ही मिनटों में ब्लास्ट होने वाला है, जल्दी करो वरना सब मारे जाएंगे।” इतना कहकर उसने फोन काट दिया।

कमांडो, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते की एंट्री, मची भगदड़

कंट्रोल रूम को जैसे ही बम की सूचना मिली, लखनऊ पुलिस महकमे और रेलवे मुख्यालय में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया। बिना एक सेकंड गंवाए, सूचना को ऐशबाग जीआरपी और आरपीएफ के साथ साझा किया गया। कुछ ही मिनटों के भीतर ऐशबाग स्टेशन को चारों तरफ से छावनी में तब्दील कर दिया गया। स्थानीय पुलिस की गाड़ियां हूटर बजाती हुई स्टेशन परिसर में दाखिल हुईं। उनके पीछे-पीछे भारी हथियारों से लैस कमांडो, बम निरोधक दस्ता (BDS) और खोजी कुत्तों का दस्ता (Dog Squad) भी मौके पर पहुंच गया।

सुरक्षा बलों ने तुरंत उस लक्षित ट्रेन को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया। लाउडस्पीकर के जरिए यात्रियों से तुरंत और बिना सामान के ट्रेन से बाहर निकलने की घोषणा की जाने लगी। अचानक भारी संख्या में पुलिस बल को देखकर और बम की बात सुनते ही यात्रियों के बीच भगदड़ मच गई। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर बोगियों से नीचे कूदने और प्लेटफॉर्म की तरफ भागने लगे। इस अफरा-तफरी में कई यात्रियों का सामान छूट गया और कुछ लोगों को मामूली चोटें भी आईं।

सुरक्षाकर्मियों ने बोगी को पूरी तरह खाली कराने के बाद अपना ऑपरेशन शुरू किया। मेटल डिटेक्टर, स्निफर डॉग्स और आधुनिक उपकरणों की मदद से ट्रेन की एक-एक सीट के नीचे, शौचालयों, ओवरहेड रैक और यात्रियों के छोड़े गए लावारिस बैगों की बेहद बारीकी से जांच की गई। लगभग दो घंटे तक चले इस बेहद तनावपूर्ण सर्च ऑपरेशन के बाद जब कोई विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, तब जाकर अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि यह कॉल एक ‘फेक हॉक्स’ यानी बम की झूठी अफवाह थी।

‘सब भाग जाते तो मैं आराम से बैठ जाता’ — आरोपी का अजीब कुबूलनामा

कॉल फर्जी साबित होते ही जीआरपी और पुलिस की सर्विलांस टीम तुरंत एक्शन में आई। जिस मोबाइल नंबर से 112 पर कॉल की गई थी, उसकी लोकेशन निकाली गई। पुलिस को यह देखकर गहरा आश्चर्य हुआ कि फोन करने वाले का मोबाइल टावर लोकेशन कहीं बाहर का नहीं, बल्कि ऐशबाग रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर का ही आ रहा था। पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की और उस नंबर पर दोबारा घंटी बजाई। प्लेटफॉर्म पर खड़े एक युवक की जेब में जैसे ही फोन बजा, पुलिस ने उसे दबोच लिया।

थाने लाकर जब जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोपी से कड़ी पूछताछ की और बम की अफवाह फैलाने की वजह पूछी, तो उसका जवाब सुनकर पुलिसकर्मी भी अपना सिर पकड़कर बैठ गए। आरोपी ने बेहद मासूमियत और बेवकूफी भरे लहजे में अपना गुनाह कबूल करते हुए कहा:

“मुझे ट्रेन में बैठने के लिए सीट नहीं मिल रही थी। डिब्बे में बहुत ज्यादा भीड़ थी और मैं खड़े-खड़े परेशान हो गया था। मैंने सोचा कि अगर मैं बम की अफवाह फैला दूंगा, तो पुलिस आएगी और पूरी ट्रेन को खाली करा देगी। जब डर के मारे सारे यात्री भाग जाएंगे और ट्रेन खाली हो जाएगी, तो पुलिस के जाने के बाद मैं आराम से अपनी मनपसंद खिड़की वाली सीट पर बैठकर सुकून से सफर तय कर सकूँगा।”

कड़े कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज, भेजा गया जेल

लखनऊ जीआरपी ने आरोपी का मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त कर लिया है। रेलवे पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की इस बचकानी और आपराधिक हरकत की वजह से न केवल सैकड़ों निर्दोष यात्रियों को भारी मानसिक प्रताड़ना और डर का सामना करना पड़ा, बल्कि रेलवे का यातायात भी काफी देर तक बाधित रहा और सरकारी तंत्र का कीमती समय बर्बाद हुआ।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सार्वजनिक शांति भंग करने, समाज में दहशत फैलाने, सरकारी तंत्र को गुमराह करने और रेलवे एक्ट की विभिन्न गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजने की विधिक कार्रवाई की जा रही है। रेलवे प्रशासन ने इस घटना के बाद एक बार फिर सख्त हिदायत जारी की है कि सुरक्षा और आपातकालीन नंबरों का इस तरह का दुरुपयोग एक संगीन अपराध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कड़े कानून लागू किए जाएंगे।

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