महिला T20 वर्ल्ड कप 2026: बर्मिंघम में भारत-PAK मैच से पहले नया विवाद

Khel Jagat
भारतीय टीम की पाकिस्तान के खिलाफ नो हैंडशेक पॉलिसी जारी. (Photo: Getty Images)

बर्मिंघम: आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में रविवार को जब भारत और पाकिस्तान की टीमें मैदान पर उतरीं, तो मैच शुरू होने से पहले ही खेल जगत को एक बड़ा झटका लगा। ग्रुप-ए के इस ब्लॉकबस्टर मुकाबले में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतने के बाद अपनी पाकिस्तानी समकक्ष फातिमा सना के साथ पारंपरिक रूप से हाथ मिलाने की रस्म को छोड़ दिया। भारतीय टीम का यह कड़ा रुख मैदान पर दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक और भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव की ओर इशारा करता है, जो अब क्रिकेट की पिचों पर भी पूरी तरह से स्थापित हो चुका है।

टॉस के समय मैदान पर क्या हुआ?

बर्मिंघम के एजबेस्टन ग्राउंड पर जब सिक्का उछाला गया, तो किस्मत भारतीय कप्तान के पक्ष में रही। हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर बिना किसी झिझक के पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।

  • ब्लैंक रह गईं फातिमा सना: अंपायरों और मैच रेफरी की मौजूदगी में टॉस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, ब्रॉडकास्टर मेल जोन्स ने हरमनप्रीत कौर से उनकी रणनीति को लेकर बात की। बातचीत खत्म होने के बाद, हरमनप्रीत ने वहां खड़ी पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना को पूरी तरह से नजरअंदाज किया और बिना हाथ मिलाए या कोई गर्मजोशी दिखाए डगआउट की तरफ वापस लौट गईं।
  • मैच से पहले का बयान: मुकाबले से एक दिन पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी जब पत्रकारों ने हरमनप्रीत कौर से इस ‘नो हैंडशेक’ के बारे में सवाल करना चाहा, तो वह भड़क उठी थीं। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा था, “हम यहां क्रिकेट खेलने आए हैं। आप हमसे यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं? हमारा पूरा फोकस सिर्फ अपने खेल और रणनीति पर है।”

पुरुष टीम से शुरू हुई थी यह ‘नो हैंडशेक’ पॉलिसी

क्रिकेट विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय क्रिकेट टीमों (पुरुष और महिला) द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ अपनाई जा रही यह ‘नो हैंडशेक’ पॉलिसी नई नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ समय से एक अघोषित राष्ट्रीय खेल नीति बन चुकी है:

  • एशिया कप 2025 से शुरुआत: इस कड़े और आक्रामक रुख की शुरुआत पिछले साल पुरुष एशिया कप 2025 के दौरान हुई थी। उस टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान की टीमें तीन बार आमने-सामने आई थीं। तब भारतीय पुरुष टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव और उनके खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली एघा व उनकी टीम से मैच से पहले या बाद में हाथ नहीं मिलाया था।
  • ट्रॉफी लेने से भी इनकार: विवाद उस समय और ज्यादा बढ़ गया था जब भारतीय पुरुष टीम ने एशिया कप का खिताब जीतने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से विजेता ट्रॉफी लेने से भी साफ मना कर दिया था।
  • महिला टीम का दूसरा वाकया: महिला क्रिकेट की बात करें तो, हरमनप्रीत कौर और फातिमा सना के बीच यह लगातार दूसरे आईसीसी टूर्नामेंट में हुआ वाकया है। इससे पहले कोलंबो में खेले गए महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 के दौरान भी भारतीय महिला टीम ने पाकिस्तान के खिलाफ बिल्कुल यही रुख अख्तियार किया था। इसके अलावा अंडर-19 और इमर्जिंग स्टार्स जैसे जूनियर लेवल के टूर्नामेंटों में भी भारतीय टीमें इसी नीति पर चल रही हैं।

कूटनीतिक और सैन्य तनाव का खेल पर असर

खेल के मैदान पर दिखने वाली इस कड़वाहट के पीछे भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी सुरक्षा तनाव और सरकार की सख्त नीतियां हैं:

  • सीमा पार का तनाव: पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हुआ है।
  • ‘क्रिकेट और आतंक साथ नहीं’: भारत सरकार की स्पष्ट नीति है कि आतंकवाद और खेल के रिश्ते एक साथ नहीं चल सकते। यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) न तो पाकिस्तान के साथ कोई द्विपक्षीय सीरीज खेल रहा है और न ही मैदान पर किसी भी तरह के कूटनीतिक या सामाजिक शिष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है।

सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में छिड़ी बहस

बर्मिंघम में हुए इस ताज़ा वाकये के बाद क्रिकेट प्रेमी दो गुटों में बंट गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर इस घटना का वीडियो आग की तरह फैल रहा है:

  • फैंस का समर्थन: भारतीय समर्थकों की एक बड़ी संख्या हरमनप्रीत कौर के इस आक्रामक और स्पष्ट रुख की जमकर तारीफ कर रही है। उनका कहना है कि जब तक सीमा पार से हरकतें बंद नहीं होतीं, तब तक मैदान पर किसी भी तरह की सौहार्दपूर्ण औपचारिकता दिखाने की कोई जरूरत नहीं है।
  • खेल भावना पर सवाल: वहीं, कुछ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पंडितों और पारंपरिक प्रशंसकों का मानना है कि आईसीसी के वैश्विक टूर्नामेंटों में खेल भावना (Sportsmanship) का सम्मान किया जाना चाहिए। कप्तानों द्वारा एक-दूसरे को इस तरह से नजरअंदाज करना खेल की वैश्विक छवि को प्रभावित करता है।

क्रिकेट की पिच पर बदल गए भारत-PAK मैचों के मायने

बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान की इस घटना ने साफ कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच का मुकाबला अब सिर्फ चौकों, छक्कों और विकेटों की जंग नहीं रह गया है। यह खेल अब दोनों देशों के कूटनीतिक और राजनीतिक आत्मसम्मान का अखाड़ा बन चुका है। आईसीसी (ICC) चाहकर भी अपने टूर्नामेंटों में इन पारंपरिक विरोधी टीमों को हाथ मिलाने के लिए मजबूर नहीं कर पा रही है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं या फिर ‘नो हैंडशेक’ की यह नई रीत भारत-पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास का एक स्थाई हिस्सा बन जाएगी।

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