नोएडा में बड़ा सड़क हादसा: महामाया फ्लाईओवर के पास पलटी तेज रफ्तार बस, एक दर्जन यात्री लहूलुहान

फर्रुखाबाद से दिल्ली जा रही थी बस. (Photo: Screengrab)

नोएडा: दिल्ली-एनसीआर को आपस में जोड़ने वाले नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर रविवार (14 जून 2026) को एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला। महामाया फ्लाईओवर के समीप एक अनियंत्रित निजी यात्री बस डिवाइडर से टकराने के बाद पलट गई। हादसे के वक्त बस में करीब 35 से 40 यात्री सवार थे, जो साप्ताहिक छुट्टी के दिन दिल्ली और आसपास के इलाकों में जा रहे थे।

बस के पलटते ही चीख-पुकार और अपरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। राहगीरों की सूचना पर पहुंची नोएडा सेक्टर-39 थाने की पुलिस और ट्रैफिक पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बस से बाहर निकाला।

प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी: कैसे हुआ यह हादसा?

मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और पीछे से आ रहे अन्य वाहन चालकों के अनुसार, निजी बस की रफ्तार बेहद तेज थी। चश्मदीदों ने बताया:

  • बस चालक एक्सप्रेसवे पर अन्य वाहनों को ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था।
  • जैसे ही बस महामाया फ्लाईओवर के चढ़ाई वाले लूप के पास पहुंची, आगे चल रहे एक वाहन को बचाने के चक्कर में चालक ने अचानक कट मारा।
  • अत्यधिक रफ्तार होने के कारण चालक वाहन पर से अपना नियंत्रण खो बैठा। बस पहले सड़क के किनारे लगे कंक्रीट के डिवाइडर से टकराई और फिर एक तरफ को पूरी तरह पलट गई।
  • बस के पलटते ही उसका अगला और साइड का शीशा चकनाचूर हो गया और अंदर बैठे यात्री एक-दूसरे के ऊपर जा गिरे।

खिड़कियां और शीशे तोड़कर निकाले गए घायल यात्री

हादसे की भयावहता को देखते हुए एक्सप्रेसवे से गुजर रहे कई वाहन चालक तुरंत अपनी गाड़ियां रोककर मदद के लिए दौड़े। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की कई गाड़ियां और एम्बुलेंस भी मौके पर पहुंच गईं।

चूंकि बस का दरवाजा नीचे की तरफ दब गया था, इसलिए यात्रियों को बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती थी। पुलिसकर्मियों और स्थानीय युवाओं ने मिलकर लोहे की रॉड और पत्थरों की मदद से बस के आगे और पीछे के शीशे तोड़े। इसके बाद एक-एक करके घायल और सहमे हुए यात्रियों को बाहर निकाला गया।

इस हादसे में करीब 12 से 15 यात्रियों को गंभीर चोटें आई हैं। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। तीन यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें सिर और छाती में गहरी चोट लगी है। सभी घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए नोएडा के सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल और पास के निजी अस्पतालों में भेजा गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।

दिल्ली-नोएडा मार्ग पर लगा किलोमीटर लंबा जाम

महामाया फ्लाईओवर नोएडा का एक बेहद संवेदनशील और व्यस्ततम ट्रैफिक जंक्शन है, जो कालिंदी कुंज के रास्ते दिल्ली और चिल्ला बॉर्डर के रास्ते मयूर विहार को जोड़ता है। बस के सड़क के बीचों-बीच पलट जाने के कारण एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया।

  • गाड़ियों की कतारें: देखते ही देखते ग्रेटर नोएडा और परी चौक की तरफ से आने वाले रास्ते पर गाड़ियों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। रविवार का दिन होने के बावजूद भीषण गर्मी में सैकड़ों लोग जाम में फंस गए।
  • क्रेन से हटाई गई बस: ट्रैफिक को सुचारू करने के लिए नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला। मौके पर दो बड़ी क्रेन (हाइड्रा मशीनें) बुलाई गईं। काफी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त बस को सीधा करके सड़क के किनारे खड़ा किया गया।
  • यातायात हुआ बहाल: सड़क पर फैले शीशों के टुकड़ों और मलबे को साफ करने के बाद पुलिस ने लगभग डेढ़ से दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद यातायात को धीरे-धीरे सामान्य कराया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

नोएडा पुलिस के आला अधिकारियों ने अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल जाना। पुलिस के अनुसार, शुरुआती तौर पर यह मामला पूरी तरह से तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का लग रहा है।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं बस में कोई तकनीकी खराबी जैसे ‘ब्रेक फेल’ होना या स्टीयरिंग लॉक होने जैसी स्थिति तो नहीं बनी थी। हादसे के बाद बस का ड्राइवर और कंडक्टर मौके से फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस ने बस को अपने कब्जे में ले लिया है और फरार चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और यात्रियों की जान जोखिम में डालने की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

एक्सप्रेसवे पर कब थमेगा रफ्तार का यह जानलेवा खेल?

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार के कारण होने वाले हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। प्रशासन द्वारा गति सीमा (Speed Limit) तय करने और जगह-जगह स्पीड कैमरे लगाने के बावजूद, भारी और निजी वाहनों के चालक नियमों की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आते। महामाया फ्लाईओवर के पास हुआ यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सार्वजनिक परिवहन के वाहनों में सुरक्षा मानकों और रफ्तार पर कड़ा नियंत्रण रखना कितना जरूरी है, ताकि भविष्य में मासूम यात्रियों की जान से खिलवाड़ न हो सके।

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