
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (डीडीयू) पर ट्रेन चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक युवक के बैग से 43 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद जीआरपी और आरपीएफ ने युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। युवक इस नकदी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज पुलिस के सामने पेश नहीं कर सका। मामले की सूचना आयकर विभाग को दी गई, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर नकदी और युवक को अपनी कार्रवाई के लिए अपने कब्जे में ले लिया।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात डीडीयू जंक्शन पर जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ट्रेनों में चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान पटना से नई दिल्ली जा रही संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस जंक्शन पर पहुंची। ट्रेन के जनरल कोच में चेकिंग के दौरान पुलिस की नजर एक युवक पर पड़ी, जो काले रंग का पिट्ठू बैग लेकर सफर कर रहा था। पुलिस को उसके बैग पर संदेह हुआ तो उससे पूछताछ की गई और बैग की तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान बैग के अंदर से बड़ी संख्या में नोटों की गड्डियां मिलीं। जब पुलिस ने रकम की गिनती कराई तो कुल 43 लाख रुपये नकद पाए गए। रिपोर्टों के मुताबिक बरामद रकम में 500 रुपये के नोटों की बड़ी संख्या थी। एक रिपोर्ट में 500 रुपये की 86 गड्डियों का भी उल्लेख किया गया है।
इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने युवक से पूछा कि वह इतनी नकदी कहां से लेकर आया है और इसे कहां ले जा रहा है। पुलिस के अनुसार, युवक रकम से संबंधित कोई वैध कागजात नहीं दिखा सका। पूछताछ में उसने बताया कि वह रुपये लेकर पटना से नई दिल्ली जा रहा था। युवक की पहचान बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के मकरेदपुर निवासी आलोक कुमार साह के रूप में बताई गई है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक उसकी उम्र 23 वर्ष है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी ने तुरंत आयकर विभाग, वाराणसी को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने के बाद आयकर विभाग की टीम जीआरपी थाने पहुंची और बरामद नकदी को सीज कर लिया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि 43 लाख रुपये का वास्तविक स्रोत क्या है और युवक इतनी बड़ी रकम लेकर दिल्ली क्यों जा रहा था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि दिल्ली पहुंचने के बाद रकम किस व्यक्ति को सौंपी जानी थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान नकदी के हवाला कारोबार से जुड़े होने की आशंका सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि युवक ने रकम एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के बदले कमीशन मिलने की बात कही। कथित तौर पर करीब 10 लाख रुपये पहुंचाने पर उसे 10 हजार रुपये कमीशन मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, यह जांच का हिस्सा है और अभी यह आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ है कि बरामद 43 लाख रुपये वास्तव में हवाला कारोबार का हिस्सा थे।
पुलिस और आयकर विभाग अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम किसकी है, इसे युवक को किसने दिया था और दिल्ली में इसे किसे पहुंचाया जाना था। युवक के संपर्कों और लेनदेन से संबंधित जानकारी की भी जांच की जा सकती है।
पुलिस के मुताबिक, इतनी बड़ी नकदी के संबंध में दस्तावेज नहीं मिलने के कारण मामले को गंभीरता से लिया गया है। फिलहाल बरामद रकम आयकर विभाग के कब्जे में है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 43 लाख रुपये किसी वैध कारोबारी लेनदेन से जुड़े थे या उनका संबंध किसी अवैध वित्तीय नेटवर्क से था।
