रोक सकते थे 1993 के मुंबई बम धमाके! सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का संजय दत्त पर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा

संजय दत्त रोक सकते थे मुंंबई धमाके? (Photo: IMDb)

मुंबई : साल 1993 में हुए मुंबई बम धमाके (1993 Mumbai Bomb Blasts) भारतीय इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक हैं। इन धमाकों के घाव आज भी देश के जेहन में ताजा हैं। इस पूरे मामले में बॉलीवुड सुपरस्टार संजय दत्त (Sanjay Dutt) की गिरफ्तारी और उन पर लगे अवैध हथियार रखने के आरोपों ने उस वक्त पूरी दुनिया को चौंका दिया था। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर देश के सबसे मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम (Ujjwal Nikam) ने एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा दावा किया है।

उज्ज्वल निकम, जिन्होंने इस ऐतिहासिक और जटिल मामले में सरकार का पक्ष रखा था, ने एक इंटरव्यू में बताया कि अगर संजय दत्त ने सही समय पर एक नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो शायद मुंबई में हुए उस भयानक कत्लेआम और तबाही को रोका जा सकता था। उनके इस बयान ने एक बार फिर 33 साल पुराने इस मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अगर संजय दत्त पुलिस को बता देते, तो बच जातीं मासूमों की जानें

वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने इस बात का खुलासा किया कि संजय दत्त के पास उन धमाकों से पहले ही हथियारों की डिलीवरी हो चुकी थी। निकम के अनुसार, संजय दत्त को इस बात की भनक लग सकती थी या उनके पास यह जानकारी थी कि शहर में कुछ बहुत गलत और खतरनाक होने वाला है।

उज्ज्वल निकम ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“अगर संजय दत्त ने अपने घर पर एके-56 (AK-56) राइफल और अन्य हथियारों की डिलीवरी मिलते ही तुरंत मुंबई पुलिस को इस बात की सूचना दे दी होती, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियां समय रहते हरकत में आ जातीं। पुलिस तुरंत उन कड़ियों को जोड़ सकती थी कि आखिर फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े सितारे के घर पर इस तरह के घातक और प्रतिबंधित सैन्य हथियार क्यों और किसके जरिए पहुंचाए जा रहे हैं।”

निकम का मानना है कि यदि संजय दत्त उसी वक्त पुलिस को फोन कर देते, तो पुलिस उन हथियारों को सप्लाई करने वाले तस्करों और दाऊद इब्राहिम व टाइगर मेमन के गुर्गों तक धमाकों से पहले ही पहुंच जाती। इससे पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश समय रहते हो जाता और 12 मार्च 1993 को मुंबई को दहलाने वाले वे सिलसिलेवार बम ब्लास्ट रोके जा सकते थे, जिनमें 257 बेगुनाह लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

हथियारों को नष्ट करना सबसे बड़ी गलती थी

सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने आगे बताया कि संजय दत्त ने न केवल पुलिस को सूचना नहीं दी, बल्कि जब धमाके हो गए और उन्हें अहसास हुआ कि वे मुसीबत में फंस सकते हैं, तो उन्होंने डर के मारे उन हथियारों को नष्ट (Destroy) करने की कोशिश की। उनके दोस्तों ने उन हथियारों को ठिकाने लगाने में मदद की, जो कानून की नजर में सबूतों को मिटाने और अपराध को छिपाने का एक बहुत गंभीर कृत्य था।

निकम ने कहा कि संजय दत्त का यह कदम उनके खिलाफ सबसे बड़ा कानूनी आधार बना। अगर वे शुरुआत में ही पुलिस के पास चले जाते, तो वे एक गवाह या एक सतर्क नागरिक के रूप में देश की मदद कर सकते थे, लेकिन उन्होंने अपनी बात छिपाई, जिसने उन्हें इस पूरे मामले में सह-आरोपी (Co-accused) की श्रेणी में खड़ा कर दिया।

टाडा (TADA) से मिली राहत, लेकिन आर्म्स एक्ट में हुई सजा

गौरतलब है कि 1993 के इस मामले में संजय दत्त को अप्रैल 1993 में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर शुरुआत में बेहद कड़े आतंकवाद विरोधी कानून टाडा (TADA – टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष यानी सरकारी वकील की तरफ से उन पर आतंकवादी साजिश का हिस्सा होने के आरोप भी लगाने की कोशिश की गई थी।

हालांकि, साल 2006 में टाडा अदालत ने संजय दत्त को एक बहुत बड़ी राहत दी। अदालत ने माना कि संजय दत्त का आतंकवाद या बम धमाकों की साजिश से कोई सीधा संबंध नहीं था। वे आतंकवादी नहीं थे। लेकिन, अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट (Arms Act) के तहत दोषी पाया, क्योंकि उनके पास से एके-56 राइफल और कारतूस बरामद हुए थे, जो पूरी तरह से अवैध और प्रतिबंधित थे। इस अपराध के लिए उन्हें 5 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी, जिसे उन्होंने पुणे की यरवदा जेल में पूरा किया और साल 2016 में वे पूरी तरह रिहा हुए।

उज्ज्वल निकम के बयान से फिर छिड़ी बहस

33 साल बाद उज्ज्वल निकम द्वारा दिए गए इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता का एक धड़ा निकम की बात से पूरी तरह सहमत नजर आ रहा है कि एक सेलिब्रिटी और प्रभावशाली परिवार (सुनील दत्त और नरगिस के बेटे) से ताल्लुक रखने के कारण संजय दत्त की जिम्मेदारी देश के प्रति कहीं ज्यादा थी। अगर वे हिम्मत दिखाते, तो इतिहास कुछ और होता।

वहीं दूसरी तरफ, संजय दत्त के प्रशंसकों का कहना है कि अभिनेता अपनी उस गलती की पूरी सजा कानून के मुताबिक भुगत चुके हैं और अदालत ने भी उन्हें आतंकी साजिश से बरी कर दिया था, इसलिए अब बार-बार उनके नाम को इस त्रासदी से जोड़ना सही नहीं है। बहरहाल, उज्ज्वल निकम का यह खुलासा यह साफ करता है कि अपराध की दुनिया में किसी एक व्यक्ति की छोटी सी चुप्पी या लापरवाही पूरे देश के लिए कितनी भारी पड़ सकती है।

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