एक इंटरव्यू में किसी ने क्रिस्टोफर नोलन से पूछा था, “क्या थिएटर के लिए बनी फिल्मों को फोन पर देखना गलत है?” नोलन ने तुरंत जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं.” मगर दिलचस्प बात ये है कि वही नोलन आज ऐसी फिल्म बना रहे हैं, जिसे देखने के लिए दुनिया भर के दर्शक IMAX स्क्रीन ढूंढ रहे हैं. उनकी नई फिल्म ‘द ओडिसी’ पूरी तरह IMAX कैमरों पर शूट की गई है. यानी ऐसी स्क्रीन के लिए बनाई गई फिल्म, जहां दर्शक सिर्फ फिल्म नहीं देखते, बल्कि खुद उसका हिस्सा बन जाते हैं.द पॉवर ऑफ लव’ पहली 3D फीचर फिल्म थी.सिनेमा का सफर बायस्कोप से शुरू होकर अब ऐसे दौर तक पहुंच चुका है, जहां थिएटर खुद एक टेक्नोलॉजिकल एक्सपीरियंस बन गया है. आज टिकट बुक करते वक्त हमारे सामने 2D, 3D, 4DX, Dolby Cinema और IMAX जैसे कई ऑप्शन आते हैं. ज्यादातर लोग बस टिकट की कीमत देखकर फैसला कर लेते हैं, मगर सच ये है कि हर स्क्रीन फॉर्मेट फिल्म देखने का तरीका बदल देता है. कहीं स्क्रीन बड़ी होती है, कहीं आवाज़ चारों तरफ घूमती है, कहीं सीटें हिलती हैं और कहीं ऐसा लगता है कि फिल्म स्क्रीन से बाहर निकलकर आपके सामने आ गई हो.सबसे पहले बात 2D फॉर्मेट की. यही वो फॉर्मेट है, जिससे सिनेमा की शुरुआत हुई थी और आज भी सबसे ज्यादा फिल्में इसी में देखी जाती हैं. इसमें फिल्म एक फ्लैट स्क्रीन पर दिखाई जाती है. कोई स्पेशल चश्मा नहीं चाहिए, कोई अलग टेक्नोलॉजी नहीं. यही वजह है कि फैमिली ऑडियंस आज भी 2D को सबसे ज्यादा पसंद करती है. इसकी टिकटें बाकी प्रीमियम फॉर्मेट्स की तुलना में सस्ती होती हैं और लंबे समय तक फिल्म देखने पर आंखों पर ज्यादा असर भी नहीं पड़ता. ज्यादातर कॉमेडी, ड्रामा और रोमांटिक फिल्में इसी फॉर्मेट में सबसे बेहतर लगती हैं.IMAX और एक नॉर्मल स्क्रीन का अंतर.इसके बाद आता है 3D. इस फॉर्मेट ने थिएटर एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल दिया था. इसमें फिल्म सिर्फ स्क्रीन पर नहीं चलती, बल्कि उसमें गहराई महसूस होती है. अगर स्क्रीन पर कोई चीज कैमरे की तरफ आती है, तो ऐसा लगता है जैसे वो आपकी तरफ बढ़ रही हो. यही वजह है कि सुपरहीरो, साइंस-फिक्शन और एनिमेशन फिल्मों में 3D का खूब इस्तेमाल होता है. हालांकि 3D देखने के लिए खास चश्मा पहनना जरूरी होता है. उसके बिना स्क्रीन धुंधली दिखाई देती है. कई लोगों को इससे सिरदर्द भी होता है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल हो तो 3D बेहद मजेदार अनुभव बन जाता है.फिर आता है 4DX, जिसे सिनेमा का सबसे ड्रमैटिक फॉर्मेट कहा जा सकता है. यहां सिर्फ फिल्म नहीं चलती, पूरा थिएटर फिल्म के साथ मूव करता है. सीटें हिलती हैं, चेहरे पर पानी की बूंदें पड़ती हैं, हवा चलती है, धुआं निकलता है और कुछ फिल्मों में खुशबू तक महसूस होती है. अगर स्क्रीन पर कार चेज़ चल रही हो, तो आपकी सीट भी उसी हिसाब से झटके खाती है. हॉरर फिल्म में अचानक सीट हिल जाए, तो डर दोगुना हो जाता है. मगर हर किसी को ये अनुभव पसंद आए, ऐसा जरूरी नहीं. कई लोगों को 4DX बहुत थकाने वाला लगता है और इसकी टिकटें भी काफी महंगी होती हैं.इसके बाद बात Dolby Cinema की. ये फॉर्मेट उन लोगों के लिए है, जो फिल्मों में बेहतरीन साउंड और विजुअल क्वालिटी चाहते हैं. Dolby Cinema दो चीजों पर काम करता है — Dolby Vision और Dolby Atmos. Dolby Vision स्क्रीन पर रंगों और कॉन्ट्रास्ट को बेहद शानदार बना देता है. ब्लैक कलर ज्यादा गहरा दिखता है और छोटी-छोटी डिटेल्स भी साफ नजर आती हैं. वहीं Dolby Atmos ऐसा साउंड एक्सपीरियंस देता है, जहां आवाज सिर्फ सामने से नहीं, बल्कि चारों तरफ से आती महसूस होती है. अगर फिल्म में हेलिकॉप्टर उड़ रहा हो, तो लगता है जैसे वो आपके सिर के ऊपर से गुजर रहा है. यही वजह है कि बड़े एक्शन और थ्रिलर फिल्मों में Dolby Cinema का अनुभव बेहद शानदार माना जाता है.और अब बात उस फॉर्मेट की, जिसे आज सिनेमा की दुनिया का सबसे बड़ा हथियार माना जाता है — IMAX. इसका मतलब है Image Maximum. IMAX स्क्रीन सामान्य थिएटर से कहीं ज्यादा बड़ी और ऊंची होती है. इसके कैमरे और प्रोजेक्टर फिल्म को बेहद शार्प और क्लियर बनाते हैं. यही वजह है कि क्रिस्टोफर नोलन, डेनिस विलेन्यूव और जेम्स कैमरून जैसे निर्देशक अपनी फिल्मों को खास तौर पर IMAX के लिए डिजाइन करते हैं. IMAX में फिल्म देखते समय ऐसा लगता है जैसे पूरी दीवार पर दुनिया खुल गई हो. बड़े एक्शन सीक्वेंस, स्पेस वॉर और विशाल विजुअल्स वाले सीन यहां अलग ही लेवल पर पहुंच जाते हैं.भारत में फिलहाल सिर्फ 34 IMAX थिएटर हैं. यही वजह है कि बड़ी फिल्मों के बीच IMAX स्क्रीन को लेकर लड़ाई शुरू हो चुकी है. हाल ही में ‘एवेंजर्स: डूम्सडे’ और ‘ड्यून 3’ जैसी फिल्मों के बीच IMAX स्क्रीन शेयरिंग को लेकर चर्चा हुई थी. दोनों फिल्में विजुअल एक्सपीरियंस पर आधारित हैं और दोनों ज्यादा-से-ज्यादा IMAX स्क्रीन चाहती हैं. आने वाले समय में शाहरुख खान की ‘किंग’ जैसी फिल्में भी इस लड़ाई का हिस्सा बन सकती हैं. क्योंकि IMAX स्क्रीन कम होने के बावजूद सबसे ज्यादा कमाई देने वाली स्क्रीन्स मानी जाती हैं. इनकी टिकटें सामान्य थिएटर से लगभग दोगुनी महंगी होती हैं.कुछ समय पहले रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ ने भारत की लगभग सभी IMAX स्क्रीन पर कब्जा जमा लिया था. इस वजह से हॉलीवुड फिल्म ‘प्रोजेक्ट हेल मैरी’ को पर्याप्त स्क्रीन नहीं मिल रही थीं. सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद जाकर स्क्रीन शेयर की गईं. यानी अब फिल्मों की लड़ाई सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्क्रीन के लिए भी जंग शुरू हो चुकी है.कुल मिलाकर, आज थिएटर सिर्फ फिल्म देखने की जगह नहीं रह गया है. टेक्नोलॉजी ने उसे एक ऐसे अनुभव में बदल दिया है, जहां स्क्रीन, साउंड और सीट — तीनों मिलकर कहानी सुनाते हैं. यही वजह है कि OTT के दौर में भी लोग हजारों रुपये खर्च करके थिएटर जाते हैं. क्योंकि कुछ फिल्में सिर्फ देखी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं।