
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव को लेकर विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान दिया है। मंत्रालय ने कहा कि सीमा पर स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ती है, जब चीनी सेना तय गश्ती व्यवस्था से हटकर गतिविधियां करती है। विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बने रहने की बात कही थी।
विदेश मंत्रालय ने चीन पर उठाए सवाल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देश मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनका उद्देश्य सीमा पर गलतफहमी और गलत आकलन की स्थिति से बचना है।
जायसवाल ने कहा कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में समय-समय पर स्थिति तब बिगड़ती है, जब चीनी सेना निर्धारित गश्ती पैटर्न से हट जाती है। उन्होंने इस मामले में विस्तृत जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने की सलाह भी दी।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए बेहद जरूरी है।
ITBP चीफ ने अरुणाचल प्रदेश में टकराव की बात कही
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में बल के जवानों को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति की जानकारी दी थी।
कपूर के मुताबिक, हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में ऐसी परिस्थितियां बनीं और स्थिति उस समय भी जारी थी। उन्होंने इस दौरान ITBP की नई शौर्य कमांडो टीमों के काम की सराहना की।
उनके बयान के बाद भारत-चीन सीमा पर जारी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग क्षेत्र में तनाव और सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरें सामने आई थीं।
क्या है शौर्य कमांडो टीम की भूमिका?
ITBP प्रमुख ने बताया कि बल अपनी क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है। शौर्य कमांडो टीमों को कठिन परिस्थितियों में काम करने और सीमा पर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ITBP की प्रत्येक बटालियन में शौर्य कमांडो टीम बनाने की दिशा में काम चल रहा है। आगे चलकर बल में एक पूर्ण कमांडो बटालियन तैयार करने की भी योजना है।
इसके साथ ही जवानों को आधुनिक युद्ध की परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है। बल का उद्देश्य ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में अपनी परिचालन क्षमता को मजबूत करना है।
ड्रोन और आधुनिक हथियारों पर जोर
ITBP प्रमुख ने सीमा सुरक्षा में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, आधुनिक युद्ध में ड्रोन महत्वपूर्ण हो गए हैं और भारत को अपनी तकनीकी क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि सीमा पर तैनात बटालियनों में ड्रोन प्लाटून तैयार की गई हैं। बल ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने और कुछ ड्रोन का निर्माण स्वयं करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
इसके अलावा, सीमा चौकियों पर भूमिगत संरचनाएं बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य संघर्ष की स्थिति में जवानों को बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराना है। पुराने हथियारों के आधुनिकीकरण और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
LAC पर शांति के लिए बातचीत जारी
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा की समझ विकसित करने के तरीकों पर भी चर्चा कर रहे हैं। दोनों देश मौजूदा सैन्य और राजनयिक माध्यमों के जरिए लंबित मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत का कहना है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक है। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के बीच जारी आमने-सामने की स्थिति और उस पर विदेश मंत्रालय की टिप्पणी के बाद सीमा प्रबंधन से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
