
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क भर्ती परीक्षा के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसने अभ्यर्थियों की नाराजगी बढ़ा दी। जिस परीक्षा के लिए उम्मीदवार महीनों से तैयारी कर रहे थे, वहां परीक्षा शुरू होने के बाद ही तकनीकी परेशानियों की शिकायत सामने आने लगी। किसी का सिस्टम परेशान करने लगा तो किसी के कंप्यूटर से जुड़ी दिक्कत ने परीक्षा का पूरा अनुभव खराब कर दिया। देखते ही देखते अभ्यर्थियों का गुस्सा सड़क तक पहुंच गया।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि अगर ऑनलाइन परीक्षा ठीक से कराने की व्यवस्था नहीं है, तो फिर उम्मीदवारों के साथ ऐसा प्रयोग क्यों किया जा रहा है?
दिपके ने सवाल उठाया कि जब ऑनलाइन पेपर कराना ही संभव नहीं है, तो परीक्षा क्यों ली जा रही है?
उनका कहना था कि परीक्षा देने वाला छात्र अपनी तरफ से पूरी तैयारी करके आता है। वह फीस देता है, समय लगाता है और परीक्षा केंद्र तक पहुंचता है। ऐसे में अगर परीक्षा केंद्र की तकनीकी व्यवस्था ही ठीक नहीं होगी, तो उसका खामियाजा उम्मीदवार क्यों भुगते?
परीक्षा शुरू हुई और बढ़ने लगी परेशानी
बताया जा रहा है कि टाइपिंग टेस्ट के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को कंप्यूटर सिस्टम से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कुछ छात्रों ने कीबोर्ड और माउस के ठीक से काम नहीं करने की शिकायत की। यही नहीं, कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद ही उनके सिस्टम से जुड़ी परेशानी सामने आई।
यही वह वक्त था, जब परीक्षा देने आए छात्रों का धैर्य जवाब देने लगा।
उम्मीदवारों का कहना था कि उन्होंने इस परीक्षा के लिए काफी समय से तैयारी की थी। टाइपिंग टेस्ट में एक-एक सेकंड महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में अगर कीबोर्ड या कंप्यूटर ही ठीक से काम न करे, तो उम्मीदवार अपनी वास्तविक क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन कैसे करेगा?
अभिजीत दिपके ने उठाया बड़ा सवाल
छात्रों की शिकायतों के बीच अभिजीत दिपके ने परीक्षा व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर सिस्टम की खराबी की वजह से छात्रों को परेशानी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी उम्मीदवारों पर नहीं डाली जा सकती।
उन्होंने मांग की कि जिन छात्रों को तकनीकी समस्या के कारण नुकसान हुआ है, उन्हें दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलना चाहिए।
यही नहीं, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर परीक्षा दोबारा कराई जाती है तो क्या वही खराब सिस्टम इस्तेमाल किए जाएंगे? अगर तकनीकी व्यवस्था में कमी है तो पहले उसे ठीक किया जाना चाहिए और उसके बाद ही उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा में बैठाया जाना चाहिए।
छात्रों का गुस्सा क्यों बढ़ा?
दरअसल, सरकारी नौकरी की परीक्षा सिर्फ एक सामान्य टेस्ट नहीं होती। इसके पीछे हजारों उम्मीदवारों की मेहनत जुड़ी होती है। कई अभ्यर्थी महीनों तक पढ़ाई करते हैं, टाइपिंग की प्रैक्टिस करते हैं और परीक्षा के लिए खुद को तैयार करते हैं।
ऐसे में परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ी की शिकायत सामने आने पर उम्मीदवारों का नाराज होना स्वाभाविक है।छात्रों का कहना है कि अगर किसी उम्मीदवार की गलती से उसका प्रदर्शन खराब होता है तो वह अलग बात है, लेकिन सिस्टम की गलती का नुकसान उम्मीदवार को नहीं होना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या दोबारा होगी परीक्षा?
पूरे विवाद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन अभ्यर्थियों ने तकनीकी समस्या की शिकायत की है, उनके लिए क्या फैसला लिया जाएगा?क्या प्रभावित छात्रों को दोबारा परीक्षा का मौका मिलेगा? क्या पूरे मामले की जांच होगी? और अगर जांच में तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन सवालों के जवाब का इंतजार अभ्यर्थियों को है।फिलहाल यह मामला सिर्फ एक परीक्षा में आई तकनीकी परेशानी तक सीमित नहीं है। इसने ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था और उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
उम्मीदवार चाहते हैं कि उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार हो और किसी तकनीकी खामी की वजह से उनकी मेहनत बेकार न जाए। वहीं परीक्षा कराने वाली व्यवस्था के सामने भी चुनौती है कि वह शिकायतों को गंभीरता से ले और ऐसा समाधान निकाले जिससे किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।
क्योंकि परीक्षा में हार-जीत उम्मीदवार की तैयारी से तय होनी चाहिए, कंप्यूटर के खराब कीबोर्ड या माउस से नहीं।
