पश्चिम एशिया में महाविनाश की आहट: अमेरिका ने ईरान पर किए भीषण हवाई हमले, जमीनी जंग (Ground Invasion) की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप

तेहरान/वाशिंगटन : पश्चिम एशिया (Middle East) एक बार फिर महायुद्ध की भीषण आग में धधक उठा है। एक बेहद नाजुक संघर्ष विराम (Ceasefire) के पूरी तरह टूटने के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर ‘अस्तित्व की लड़ाई’ शुरू हो गई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल ठिकानों और हवाई अड्डों पर अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी हवाई हमला किया है।

US Secretary of War announced the initiative in a video message posted on X. (Reuters photo)

लगातार 5वें दिन जारी इन हमलों में पहली बार ईरान की राजधानी तेहरान के आसपास के इलाकों, रणनीतिक चाबहार बंदरगाह और सेमनान एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया है। इस बीच, अमेरिकी मीडिया और रणनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में ‘ग्राउंड इनवेजन’ यानी जमीनी सेना उतारने की अंतिम योजना (Final Plan) पर विचार कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में महाविनाश का काउंटडाउन शुरू हो गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी

तनाव की मुख्य शुरुआत पिछले शनिवार रात को हुई, जब ईरान ने वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से बंद करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। यह वही रास्ता है जहां से युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा (20%) गुजरता था।

ईरान के इस कदम के तुरंत बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी बंदरगाहों पर दोबारा सख्त नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) लागू कर दी। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि वह पूरे क्षेत्रीय ऊर्जा निर्यात को ठप कर देगा। सुरक्षा चिंताओं के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियां अब होर्मुज में अमेरिकी सैन्य निगरानी वाले ट्रांजिट मार्ग से भी बच रही हैं और ईरान-ओमान के तटों के पास वैकल्पिक रास्तों का उपयोग कर रही हैं।

90 मिनट का कहर: अमेरिकी सेंटकॉम की भीषण एयरस्ट्राइक

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, भारतीय समयानुसार सुबह करीब साढ़े तीन बजे ईरान के ग्रेटर टुंब द्वीप (Greater Tunb Island) पर तटीय रक्षा प्रणालियों और क्रूज मिसाइल भंडारण ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए गए। यह ऑपरेशन करीब 90 मिनट तक चला। इसके ठीक नौ घंटे बाद अमेरिका ने ईरान पर दूसरी बार बड़ा हमला बोला।

अमेरिकी सेना ने एक और बड़ा एक्शन लेते हुए ईरान के खार्ग द्वीप (Kharg Island) की ओर जा रहे एक संदिग्ध तेल टैंकर (Belma) को बार-बार चेतावनी दी। जब टैंकर नहीं रुका, तो अमेरिकी वायुसेना ने हेलफायर मिसाइल दागकर उसके स्मोकस्टैक को उड़ा दिया और उसे समुद्र में ही निष्क्रिय (Disabled) कर दिया।

चाबहार, बंदर अब्बास और तेहरान सहित 4 जगहों पर बड़ी चोट

अमेरिकी वायुसेना ने ईरान को चार प्रमुख रणनीतिक ठिकानों पर सबसे गहरी चोट दी है:

  • चाबहार और बंदर अब्बास: ईरान के इन दो प्रमुख व्यावसायिक और नौसैनिक बंदरगाहों पर भारी बमबारी की गई।
  • केश्म द्वीप और सेमनान एयरपोर्ट: सामरिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप और सेमनान एयरपोर्ट के हिस्सों को हवाई हमलों में नष्ट कर दिया गया, जहां आपातकालीन टीमें मलबे को हटाने में जुटी हैं।
  • तेहरान में आधी रात को धमाके: हमलों के दायरे को बढ़ाते हुए अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने पहली बार राजधानी तेहरान के बाहरी इलाकों में बमबारी की, जिससे पूरी राजधानी दहल उठी।
  • अहवाज में अस्पताल के पास हमला: ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, अहवाज शहर के चार इलाकों में धमाके हुए। एक हमला बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास हुआ, जिसके कारण पूरे अस्पताल को आनन-फानन में खाली कराना पड़ा।

ईरान का दावा है कि इन अमेरिकी हमलों में अब तक 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

ईरान का पलटवार: बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें

अमेरिकी दावों के उलट कि ‘ईरान की क्षमताएं नष्ट हो चुकी हैं’, ईरान ने लगातार मिसाइल और ड्रोन उत्पादन जारी रखते हुए भीषण जवाबी कार्रवाई की है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे।

कुवैत का एक्शन: कुवैत सरकार ने पुष्टि की है कि उसने बुधवार को ईरान की तरफ से आ रही 4 मिसाइलों और 21 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। इस इंटरसेप्शन में संपत्ति का नुकसान हुआ है, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।

जॉर्डन का अलर्ट: जॉर्डन ने भी अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) में प्रवेश करने वाली कई ईरानी मिसाइलों को नष्ट करने का दावा किया है, जबकि ईरान ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अल-अज़राक बेस पर भारी चोट की है।

ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने साफ कर दिया है कि ईरान की सुरक्षा होर्मुज में उसकी व्यवस्था और संप्रभुता बनाए रखने पर निर्भर है। साथ ही ईरान ने नई चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी हमले नहीं रुके, तो होर्मुज के बाद लाल सागर (Red Sea) को भी जंग का नया मोर्चा बना दिया जाएगा, जिससे हूती विद्रोही वैश्विक समुद्री मार्ग को पूरी तरह ठप कर देंगे।

ट्रंप का दावा बनाम वाशिंगटन-इजरायल में अंदरूनी मतभेद

इस महासंकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अलग कूटनीतिक दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान जल्द ही घुटने टेक देगा और वह ‘समझौता करने के लिए बेताब’ है। उन्होंने बताया कि ईरान ने साल 2024 से अपनी हिरासत में रखे एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर सद्भावना का संकेत भी दिया है।

हालांकि, वाशिंगटन के भीतर ही इस युद्ध को लेकर दरारें दिखाई दे रही हैं। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। वेंस ने कहा कि इजरायली सरकार के कुछ नेता और तत्व अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता को जानबूझकर कमजोर कर रहे हैं, ताकि अमेरिकी जनमत को प्रभावित करके इस युद्ध को लंबा खींचा जा सके।

ग्राउंड इनवेजन की तैयारी:

अमेरिकी मीडिया के दावों ने वैश्विक बाजार और रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के टेबल पर ईरान में जमीनी सेना (Ground Invasion) उतारने का अंतिम प्लान तैयार है। इस योजना के तहत होर्मुज के पास के ईरानी द्वीपों पर अमेरिकी नौसैनिकों को सीधे उतारने, हवाई हमले और तेज करने तथा पिकऐक्स माउंटेन पर बड़े पैमाने पर बमबारी करने जैसे विकल्प शामिल हैं।

यदि अमेरिका जमीनी जंग का यह कदम उठाता है, तो यह मध्य पूर्व का सबसे विनाशकारी युद्ध साबित होगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को पूरी तरह मंदी की गर्त में धकेल सकता है। पूरी दुनिया की नजरें अब अगले 24 घंटों पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस महाविनाश को टाल पाती है या नहीं।

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