सिर्फ फिटनेस ही नहीं, अब हार्मोन भी: 30 से ऊपर के अमेरिकी सैनिकों के लिए पीट हेगसेथ का नया नियम

US Secretary of War announced the initiative in a video message posted on X. (Reuters photo)

वाशिंगटन : अमेरिका के युद्ध सचिव (Secretary of War) पीट हेगसेथ ने बुधवार को सेना के लिए एक बड़े और अभूतपूर्व नीतिगत बदलाव की घोषणा की है। इस नए नियम के तहत, 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी अमेरिकी सैनिकों के लिए हर साल ‘टेस्टोस्टेरोन स्क्रीनिंग’ (Testosterone Screening) कराना अनिवार्य (Mandatory) कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी को दूर करना और उनके समग्र स्वास्थ्य व युद्ध क्षमता को बढ़ाना है।

हेगसेथ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X (ट्विटर) पर एक वीडियो संदेश जारी कर इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्क्रीनिंग के बाद यदि किसी सैनिक में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम पाया जाता है, तो उसे सरकार की तरफ से ‘टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी’ (TRT) यानी हार्मोन रिप्लेसमेंट इलाज का विकल्प दिया जाएगा।

“सैनिक ही हमारा सबसे बड़ा हथियार” — पीट हेगसेथ

अपने वीडियो संदेश में पीट हेगसेथ ने सेना के आधुनिकीकरण और युद्ध क्षमता को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने कहा:

“हथियारों के पेशे में महारत हासिल करने के लिए हम आपसे (सैनिकों से) आपका सब कुछ मांगते हैं और आप इसे देते भी हैं। लेकिन, जब हम अपने हथियार प्रणालियों, प्लेटफार्मों और गियर पर भारी निवेश करते हैं, तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा सबसे निर्णायक रणनीतिक और सामरिक लाभ हमेशा ‘व्यक्तिगत योद्धा’ (सैनिक) ही होता है।”

उन्होंने आगे कहा कि हमारा यह पवित्र कर्तव्य है कि हम उस बढ़त को हर हाल में बनाए रखें। यही कारण है कि अमेरिकी रक्षा विभाग लगातार ऐसे नए तरीकों की तलाश कर रहा है जो सैनिकों के प्रदर्शन, उनकी मानसिक व शारीरिक लचक (Resilience) और उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सर्वोत्तम बना सकें।

हार्मोन थेरेपी के वैज्ञानिक आधार पर बात करते हुए हेगसेथ ने कहा कि यह पूरी तरह से प्रमाणित विज्ञान (Well-Established Science) है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, पुरुषों में प्राकृतिक रूप से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने लगता है। यह नया नियम यह सुनिश्चित करेगा कि सैनिकों के पास उनके ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन’ (Absolute Best) के लिए सही टेस्टोस्टेरोन स्तर मौजूद हो।

कैसे काम करेगा यह नया नियम?

इस नई स्वास्थ्य नीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • 30 वर्ष और उससे अधिक आयु: इस आयु वर्ग के सभी सैन्य कर्मियों के लिए वार्षिक चिकित्सा परीक्षणों (Annual Testing) के हिस्से के रूप में टेस्टोस्टेरोन की जांच अनिवार्य होगी।
  • इलाज का विकल्प स्वैच्छिक: यदि किसी सैनिक में जांच के दौरान टेस्टोस्टेरोन की कमी (Low Testosterone) पाई जाती है, तो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने का अंतिम फैसला पूरी तरह से उस सैनिक का होगा। सरकार इसे जबरन लागू नहीं करेगी।
  • युवा सैनिकों को छूट: 30 वर्ष से कम उम्र के सैनिकों के लिए यह टेस्ट अनिवार्य नहीं है, लेकिन यदि कोई युवा सैनिक स्वेच्छा से अपनी जांच करवाना चाहता है, तो वह इसके लिए अनुरोध (Request) कर सकता है।

यह घोषणा अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) द्वारा टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर लगे कुछ प्रतिबंधों को शिथिल करने के ठीक बाद आई है। पिछले महीने ही एचएचएस ने बढ़ती उम्र के कारण कम टेस्टोस्टेरोन से जूझ रहे पुरुषों के लिए इस उपचार को निर्धारित करने की सीमाओं को हटाने की योजना की घोषणा की थी।

फैसले पर भड़का राजनीतिक विवाद: विपक्ष ने घेरा

पीट हेगसेथ के इस फैसले के सामने आते ही अमेरिका में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने युद्ध सचिव के इस फैसले पर तीखा पलटवार किया है और इसे हेगसेथ के ही पुराने फैसलों के विरोधाभास के रूप में पेश किया है।

दरअसल, डेमोक्रेट्स ने हेगसेथ द्वारा अमेरिकी सेना में ‘ट्रांसजेंडर’ (Transgender) सेवा सदस्यों पर लगाए गए प्रतिबंध का हवाला दिया। ट्रांसजेंडर सैनिक अक्सर अपने जेंडर ट्रांजिशन के लिए हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy) पर निर्भर रहते हैं, जिस पर हेगसेथ प्रशासन ने रोक लगा रखी है।

विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर तीखे कमेंट्स किए:

  • डेमोक्रेटिक कांग्रेस महिला समर ली ने निशाना साधते हुए लिखा, “तो अब आप लोग जेंडर-अफर्मिंग केयर (Gender-Affirming Care) का समर्थन कर रहे हैं?”
  • वहीं, अमेरिकी सीनेटर टैमी डकवर्थ ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा, “यह मुझे पूरी तरह से जेंडर-अफर्मिंग केयर जैसा ही सुनाई दे रहा है।”

विपक्ष का आरोप है कि एक तरफ जहां सरकार ट्रांसजेंडर सैनिकों को उनकी पहचान के लिए जरूरी हार्मोन थेरेपी देने से मना करती है, वहीं दूसरी तरफ उम्रदराज पुरुष सैनिकों के प्रदर्शन को सुधारने के लिए खुद सरकारी खर्च पर हार्मोन थेरेपी बांट रही है।

विपक्ष के भारी विरोध और राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद, युद्ध सचिव इस नीति को सेना में लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहे हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में आधुनिक सेनाओं के काम करने के तरीके को बदल सकता है, जहां केवल हथियारों की ताकत ही नहीं, बल्कि सैनिकों की जैविक और हार्मोनल क्षमता (Biological Optimization) को भी युद्ध जीतने का एक प्रमुख पैमाना माना जाएगा। अब देखना यह है कि यह नई नीति अमेरिकी सेना की作战 क्षमता (Combat Readiness) को कितना प्रभावित करती है।

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