
Uttar Pradesh (देवरिया): पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच एक बेहद दर्दनाक और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। ओमान के तट के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में एक कमर्शियल जहाज (तेल टैंकर) पर हुई बमबारी में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले भारतीय नाविक शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई है। इस हमले में शिवानंद समेत कुल तीन भारतीय नाविकों की जान गई है। शिवानंद की मौत की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद उनके पैतृक गांव में कोहराम मच गया है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, ओमान के शिनास बंदरगाह के पास ‘पलाऊ’ (Palau) के झंडे वाले तेल टैंकर ‘एमटी सेटेबेलो’ (MT Settebello) पर एक मिसाइल/प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया, जिसके बाद जहाज पर भीषण आग लग गई। इस जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे।
हमले के तुरंत बाद भारतीय विदेश मंत्रालय और ओमान के स्थानीय अधिकारियों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन तीन नाविक लापता हो गए थे। केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और विदेश मंत्रालय ने अब पुष्टि की है कि लापता तीनों भारतीय नाविकों की इस हमले में मौत हो चुकी है। ये तीन नाविक उत्तर प्रदेश (देवरिया), हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे। भारत सरकार ने इस हमले पर अमेरिका के समक्ष अपनी “कड़ी आपत्ति” दर्ज कराई है, क्योंकि अमेरिकी सेना के एक ब्लॉकैड एनफोर्समेंट ऑपरेशन (घेराबंदी अभियान) के दौरान इस जहाज को निशाना बनाया गया था।
देवरिया के सुरौली गांव में पसरा मातम
31 वर्षीय शिवानंद चौरसिया देवरिया जिले के सुरौली थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। वह अपने घर के बड़े बेटे थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया एक साधारण किसान हैं, जिन पर परिवार चलाने और बेटे को बाहर भेजने के लिए लिया गया भारी कर्ज है।
शिवानंद लगभग 6 महीने पहले ही फिटर और वेल्डर की नौकरी के लिए सिंगापुर की एक कंपनी के माध्यम से समुद्री जहाज पर गए थे। यह उनका पहला विदेशी असाइनमेंट था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा विदेश जाकर पैसे कमाएगा, तो घर की गरीबी दूर होगी और पिता का कर्ज भी चुकता हो जाएगा। लेकिन किसे पता था कि छह महीने पहले जो बेटा सुनहरे भविष्य के सपने लेकर घर से निकला था, उसकी मौत की खबर वापस आएगी।
शिवानंद के छोटे भाई राम प्रवेश, जो दुबई में काम करते हैं, उन्हें इस घटना की भनक सबसे पहले लगी। उन्होंने ही गुरुवार सुबह देवरिया फोन करके परिवार को यह दर्दनाक सूचना दी। खबर मिलते ही पूरे सुरौली गांव में सन्नाटा पसर गया और शिवानंद के घर पर सांत्वना देने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।
मासूम बच्चों और बेबस पत्नी की सिसकियां
शिवानंद के पीछे उनका पूरा परिवार बिखर गया है। उनके घर में बूढ़े माता-पिता (रामजी चौरसिया और कलावती देवी), पत्नी सुशीला और दो छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं। 5 साल का बेटा राजवीर और 2 साल की बेटी वानिका अपने घर में रोते-बिलखते लोगों को देख रहे हैं। वे इतने छोटे हैं कि उन्हें अभी यह भी समझ नहीं आ रहा कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। वे बस टकटकी लगाए दरवाजे की तरफ देख रहे हैं, मानो उनके पिता अभी बाहर से खिलौने लेकर आ जाएंगे। पत्नी सुशीला का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बार-बार बेहोश हो रही हैं।
शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया ने रोते हुए बताया:
“मेरी बेटे से आखिरी बार घटना की रात 9 बजे बात हुई थी। उसने कहा था कि पापा सब ठीक है, मैं ओमान के पास हूं। उसने कभी नहीं कहा था कि वहां इतना खतरा है। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि मेरा हंसता-खेलता बेटा चला गया।”
परिवार की सरकार से भावुक मांगें
इस भीषण त्रासदी के बाद पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट चुका है और अब उन्होंने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं:
- पार्थिव शरीर की ससम्मान वापसी: परिवार की सबसे पहली और बड़ी मांग यह है कि शिवानंद का शव जल्द से जल्द ओमान से उनके पैतृक गांव देवरिया लाया जाए ताकि हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।
- आर्थिक मुआवजा: परिवार के एकमात्र कमाने वाले की मौत और पिता पर मौजूद कर्ज को देखते हुए ग्रामीणों और परिजनों ने सरकार से 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
- सरकारी नौकरी: परिवार के भरण-पोषण के लिए आश्रित सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराया संकट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे ये हमले वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया है। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 से अब तक इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर 46 हमले हो चुके हैं, जिनमें 14 नाविकों की जान जा चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी चेतावनी दी है कि इस जलमार्ग के बाधित होने से न केवल तेल की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा (Food Security) और उर्वरक (Fertilizer) की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ेगा। भारत सरकार ने इस क्षेत्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है ताकि समुद्र में काम करने वाले निर्दोष नागरिकों की जान बचाई जा सके। फिलहाल, देवरिया का यह पीड़ित परिवार अपनी सुध-बुध खोए सरकार की तरफ देख रहा है कि कब उनके लाल का शव घर पहुंचेगा।