अमेरिका में ‘फर्जी पिज्जा ऑर्डर’ का जाल: हैदराबाद के 28 वर्षीय भारतीय युवक की फिलाडेल्फिया में गोली मारकर हत्या, परिवार ने कहा- ‘यह सुनियोजित साजिश थी’

The victim has been identified as 28-year-old Anshul Kuncha. (Photo: Reporter)

Bharat / फिलाडेल्फिया/हैदराबाद: अमेरिका के पेन्सिल्वेनिया राज्य के फिलाडेल्फिया (Philadelphia) शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां वीकेंड पर अतिरिक्त आय के लिए पिज्जा डिलीवरी का काम करने वाले 28 वर्षीय भारतीय नागरिक अंशुल कुंचा की अज्ञात हमलावरों ने पॉइंट-ब्लैंक रेंज से सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। अंशुल मूल रूप से तेलंगाना के हैदराबाद (मेडचल-मल्कजगिरि जिले के गुंड्लापोचमपल्ली) के रहने वाले थे। स्थानीय पुलिस और पीड़ित परिवार के अनुसार, अंशुल को एक ‘फेक पिज्जा ऑर्डर’ के जरिए एक सुनियोजित जाल (Decoy) में फंसाया गया और सुनसान इलाके में ले जाकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद अमेरिका में रह रहे भारतीय छात्रों और कामकाजी युवाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटनाक्रम: आधी रात को दिया गया था वारदात को अंजाम

यह दर्दनाक घटना फिलाडेल्फिया के उत्तरी इलाके (North Philadelphia) में स्थित ‘रेमंड रोसेन होम्स’ हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार, 5 जून 2026 की आधी रात (करीब 12:30 AM) के बाद घटित हुई।

स्थानीय पुलिस विभाग के चीफ इंस्पेक्टर स्कॉट स्मॉल ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि हमलावरों ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के एक ऐसे अपार्टमेंट से पिज्जा का ऑर्डर दिया था, जो पूरी तरह से खाली (Vacant Unit) पड़ा हुआ था। अंशुल कुंचा ‘पीट्स पिज्जा’ (Pete’s Pizza) नामक दुकान से तीन पिज्जा बॉक्स और डिलीवरी बैग लेकर उस पते पर पहुंचे थे।

जांच अधिकारियों के अनुसार, अंशुल ने खाली पड़े अपार्टमेंट के अंदर जाकर सफलतापूर्वक पिज्जा के डिब्बे रख दिए थे। लेकिन जैसे ही वे डिलीवरी पूरी करके कॉम्प्लेक्स से बाहर एजली स्ट्रीट (Edgeley Street) पर आए, पहले से घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने अंशुल के सिर पर बेहद करीब से तीन गोलियां मारीं, जिससे वे लहुलूहान होकर सड़क पर गिर पड़े। राहगीरों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस उन्हें तुरंत ‘टेंपल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल’ ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस जांच: सीसीटीवी फुटेज और फोन नंबर से मिले अहम सुराग

फिलाडेल्फिया पुलिस विभाग इस मामले की गहनता से जांच कर रहा है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद चीफ इंस्पेक्टर स्कॉट स्मॉल ने बताया, “पीड़ित के शव के पास से पुलिस ने कारतूस के तीन खाली खोके (Spent Shell Casings) बरामद किए हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि शूटर ने पीड़ित के बिल्कुल करीब (पॉइंट-ब्लैंक रेंज) खड़े होकर गोलियां चलाई थीं।” पुलिस को घटनास्थल के पास ही अंशुल की गाड़ी भी खड़ी मिली, जिसके भीतर पिज्जा वार्मर (Pizza Warmer) अभी भी रखा हुआ था।

‘फिलाडेल्फिया हाउसिंग अथॉरिटी’ द्वारा संचालित सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने पर पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। हालांकि, जिस सटीक जगह पर गोलीबारी हुई, वह क्षेत्र कैमरे की सीधी जद में नहीं था, लेकिन फुटेज में साफ दिख रहा है कि गहरे रंग के कपड़े पहने और पीठ पर बैग (Backpack) टांगे दो नकाबपोश संदिग्ध अंशुल का पीछा कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में सबसे बड़ी लीड वह मोबाइल नंबर है, जिसका इस्तेमाल पिज्जा का ऑर्डर देने के लिए किया गया था। पुलिस तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) के जरिए उस नंबर के मालिक की पहचान करने में जुटी है, ताकि यह साफ हो सके कि फर्जी ऑर्डर किसने और कहां से बुक किया था।

पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल: “मेरे भाई को जाल में फंसाकर मार डाला”

अंशुल की मौत की खबर जैसे ही हैदराबाद के बाहरी इलाके गुंड्लापोचमपल्ली में रहने वाले उनके माता-पिता के. श्रीनिवास और नीलिमा को मिली, परिवार में कोहराम मच गया। अंशुल करीब चार साल पहले उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे। उन्होंने हैदराबाद के प्रतिष्ठित ‘चैतन्य भारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (CBIT) से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद अमेरिका की टेंपल यूनिवर्सिटी से ‘बिजनेस एनालिटिक्स’ में मास्टर्स (MBA) की डिग्री पूरी की थी।

वर्तमान में वह पेन्सिल्वेनिया की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘डेटाबैंक आईएमएक्स’ (DataBank IMX) में ‘डेटा वैलिडेशन एनालिस्ट’ के पद पर कार्यरत थे। वे एक बेहद होनहार और मिलनसार युवक थे, जो केवल अपने खर्चों और अतिरिक्त आय के लिए वीकेंड्स पर पार्ट-टाइम पिज्जा डिलीवरी का काम करते थे।

अंशुल की बहन तन्वी ने हैदराबाद में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए न्याय की गुहार लगाई और अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। तन्वी ने कहा, “यह कोई लूटपाट की सामान्य घटना नहीं थी। हमलावरों ने मेरे भाई से कोई कैश, वॉलेट, सोने की चेन या फोन नहीं छीना। यह विशुद्ध रूप से एक ‘जाल’ (Trap) था। उसे एक सुनसान और परित्यक्त इलाके में बुलाया गया ताकि उसकी जान ली जा सके। मुझे नहीं पता कि मेरे सीधे-सादे भाई को मारकर उन दरिंदों को क्या हासिल हुआ।”

तन्वी ने भावुक होते हुए अन्य भारतीय माता-पिता के लिए भी एक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मेरा भाई खुद अमेरिका नहीं जाना चाहता था, हमने परिवार की उम्मीदों के कारण उसे जबरन भेजा था… और देखिए आज उसका क्या हश्र हुआ। वह एक अंधेरी सड़क पर सिर में गोली खाकर मृत मिला। मैं हाथ जोड़कर उन सभी माता-पिता से अपील करती हूं जो अपने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखाकर अमेरिका भेज रहे हैं—कृपया अपने बच्चों को अमेरिका मत भेजिए, वहां कोई सुरक्षित नहीं है।” तन्वी ने बताया कि अंशुल के साथ पहले भी अमेरिका में लूटपाट की एक घटना हो चुकी थी, जिसमें कुछ बदमाशों ने गनपॉइंट पर उसकी चेन, फोन और नकदी छीन ली थी।

भारतीय दूतावास की त्वरित कार्रवाई और शव की वापसी के प्रयास

इस दुखद घटना के बाद न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास (Consulate General of India, New York) तुरंत हरकत में आ गया है। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया।

दूतावास ने लिखा:

“हम फिलाडेल्फिया (PA) में एक भारतीय नागरिक श्री अंशुल कुंचा के असामयिक निधन से अत्यंत दुखी हैं। इस अत्यंत कठिन और दुखद समय में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके शोक संतप्त परिवार के साथ हैं। वाणिज्य दूतावास लगातार अंशुल के परिवार के संपर्क में है और उन्हें हर संभव प्रशासनिक, कानूनी और कूटनीतिक सहायता प्रदान कर रहा है।”

वाणिज्य दूतावास के अधिकारी वर्तमान में फिलाडेल्फिया के स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों और चिकित्सा परीक्षकों (Medical Examiners) के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं, ताकि कानूनी औपचारिकताओं (Repatriation Formalities) को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। परिवार के अनुसार, उन्हें सूचित किया गया है कि सोमवार तक कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद अंशुल के पार्थिव शरीर को सौंप दिया जाएगा। परिवार ने भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) से अपील की है कि उनके बेटे के शव को जल्द से जल्द विमान के जरिए हैदराबाद वापस लाने की व्यवस्था की जाए ताकि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सकें।

यह घटना अमेरिका के विभिन्न शहरों में भारतीय मूल के छात्रों और टैक्सी या फूड डिलीवरी जैसे हाई-रिस्क पार्ट-टाइम व्यवसायों से जुड़े युवाओं की सुरक्षा चिंताओं को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ले आई है। फिलाडेल्फिया पुलिस ने आश्वस्त किया है कि वे इस ‘टारगेटेड’ मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के बेहद करीब हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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