
स्मृति ईरानी ने करीब 26 महीने के अंतराल के बाद राजनीति में एक बार फिर जोरदार वापसी की है। बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम में उन्हें अहम जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय महासचिव बनाया है। इस नियुक्ति के बाद स्मृति ईरानी एक बार फिर पार्टी की सक्रिय राजनीति के केंद्र में नजर आ रही हैं। लेकिन उनकी राजनीतिक वापसी के साथ अब उनके टीवी करियर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। खासकर इसलिए क्योंकि वह लंबे समय बाद छोटे पर्दे पर अपनी सबसे चर्चित भूमिका तुलसी विरानी के रूप में वापसी कर चुकी हैं।
स्मृति ईरानी का नाम भारतीय टेलीविजन की दुनिया में किसी पहचान का मोहताज नहीं है। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी का किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी अलग पहचान बनाई थी। यह शो साल 2000 में शुरू हुआ था और लंबे समय तक टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय धारावाहिकों में शामिल रहा। स्मृति ने तुलसी के किरदार को जिस तरह निभाया, उसने उन्हें टीवी की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।
इसके बाद स्मृति ईरानी ने अभिनय से राजनीति की ओर रुख किया और धीरे-धीरे बीजेपी में अपनी मजबूत जगह बनाई। वह पार्टी संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में आगे बढ़ीं। केंद्र सरकार में मंत्री रहने के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली।
2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद स्मृति ईरानी की सक्रिय चुनावी राजनीति में भूमिका कुछ समय के लिए कम दिखाई दी। इसी अवधि में उन्होंने दोबारा मनोरंजन की दुनिया की ओर कदम बढ़ाया और ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में तुलसी विरानी के किरदार के साथ टीवी पर वापसी की।
उनकी टीवी वापसी ने दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता पैदा की। करीब दो दशक के लंबे अंतराल के बाद स्मृति को दोबारा तुलसी के रूप में देखने का मौका मिला। शो में उन्होंने पुराने किरदार को नए दौर की कहानी के साथ आगे बढ़ाया। उनके साथ अमर उपाध्याय समेत कई पुराने कलाकारों की भी वापसी हुई।
अब राजनीतिक जिम्मेदारी बढ़ने के बाद सवाल यह है कि क्या स्मृति ईरानी टीवी शो के लिए भी समय निकाल पाएंगी। फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है कि उनकी राजनीतिक नियुक्ति के कारण ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में उनकी भूमिका खत्म होने वाली है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि शो में तुलसी का सफर रुक जाएगा।
दरअसल, स्मृति ईरानी की नई राजनीतिक जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण है। बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पार्टी के केंद्रीय संगठन में एक अहम भूमिका दी है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पार्टी आने वाले राजनीतिक मुकाबलों के लिए अपना संगठन मजबूत कर रही है। उनकी राजनीतिक पहचान और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी के लिए उनका अनुभव काफी उपयोगी माना जा सकता है।
स्मृति ईरानी को बीजेपी में एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो चुनावी राजनीति में आक्रामक प्रचार और जमीनी अभियान के लिए जानी जाती हैं। 2019 में अमेठी में राहुल गांधी को हराकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक पहचान बनाई थी। इसके बाद वह मोदी सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालती रहीं।
ऐसे में राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनकी वापसी को पार्टी की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में आने वाले समय में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। बीजेपी को उनके राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ उनकी सार्वजनिक लोकप्रियता का भी फायदा मिल सकता है।
दूसरी तरफ, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ भी लगातार दर्शकों के बीच चर्चा में बना हुआ है। शो में तुलसी विरानी की भूमिका अभी भी कहानी का अहम हिस्सा है। अगस्त 2026 में भी शो की कहानी में तुलसी से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम दिखाए जा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल उनका किरदार कहानी से बाहर नहीं हुआ है।
इसलिए स्मृति ईरानी के सामने फिलहाल एक तरह से दो अलग-अलग करियर की जिम्मेदारियां हैं। एक तरफ बीजेपी में राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका है और दूसरी तरफ दर्शकों के बीच लोकप्रिय तुलसी विरानी का किरदार। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह दोनों जिम्मेदारियों के बीच किस तरह संतुलन बनाती हैं।
स्मृति ईरानी के लिए अभिनय कोई नया काम नहीं है। वह पहले भी राजनीति में आने से पहले टेलीविजन पर लंबा समय बिता चुकी हैं। तुलसी विरानी के किरदार ने उन्हें लोकप्रियता दी और इसी लोकप्रियता के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। अब उनकी कहानी कुछ अलग नजर आ रही है—राजनीति में मजबूत वापसी के साथ वह मनोरंजन की दुनिया में भी सक्रिय हैं।
यह भी संभव है कि टीवी में उनकी मौजूदगी को सीमित किया जाए या शूटिंग का कार्यक्रम उनकी राजनीतिक जिम्मेदारियों के अनुसार तय किया जाए। लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ से स्मृति ईरानी का सफर खत्म किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि स्मृति ईरानी ने खुद पहले अपनी राजनीतिक यात्रा से ब्रेक और अभिनय में वापसी को लेकर बात की थी। उनके लिए यह सिर्फ एक टीवी शो में वापसी नहीं थी, बल्कि उनके पुराने करियर के एक बेहद महत्वपूर्ण किरदार से दोबारा जुड़ने का मौका भी था।
अब बीजेपी की नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके करियर का यह नया दौर शुरू हुआ है। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उन्हें पार्टी के संगठनात्मक कामकाज, राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी रणनीति में सक्रिय भूमिका निभानी पड़ सकती है। ऐसे में उनकी शूटिंग और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच तालमेल बनाना जरूरी होगा।
फिलहाल सबसे बड़ी बात यही है कि स्मृति ईरानी की राजनीतिक वापसी से उनके टीवी करियर पर ब्रेक लगने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। तुलसी विरानी का किरदार अभी शो में मौजूद है और कहानी भी आगे बढ़ रही है। इसलिए सोशल मीडिया या राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर यह मान लेना कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में उनकी जर्नी खत्म हो जाएगी, अभी सही नहीं होगा।
स्मृति ईरानी की कहानी इस मायने में भी खास है कि उन्होंने मनोरंजन की दुनिया से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई और अब राजनीति में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ टीवी पर भी अपनी पहचान कायम रखी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बीजेपी में बढ़ी जिम्मेदारी के बीच वह तुलसी विरानी के किरदार को कितना समय दे पाती हैं। फिलहाल उनकी राजनीतिक वापसी जरूर हो गई है, लेकिन ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में तुलसी की कहानी पर ब्रेक लगने की कोई आधिकारिक खबर नहीं है।
