
ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। राज्य के उत्तरी हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहरा गया है। स्थिति को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने भी पूरी तरह हाई अलर्ट पर रहते हुए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। अब तक 2.37 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
5.15 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
लगातार बारिश की वजह से ओडिशा के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 49 ब्लॉकों, 331 ग्राम पंचायतों और 5 शहरी क्षेत्रों के 947 गांवों में 5.15 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य में 293 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में विस्थापित लोगों को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने के साथ जरूरी राहत पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
राज्य सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद रहने और राहत-बचाव कार्यों में किसी भी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
16 से 18 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान
ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने हालात की समीक्षा के बाद बताया कि 16 से 18 अगस्त के बीच तीन दिनों तक बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। लगातार बारिश के कारण राज्य के उत्तरी जिलों में बाढ़ का संकट और बढ़ गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र और मजबूत हो गया है। इसके अगले 24 घंटे में डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई गई है। ऐसे में ओडिशा के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की आशंका है।
मौसम की इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ा दी है। निचले इलाकों और बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
बिगड़ते हालात को देखते हुए ओडिशा सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। कर्मचारियों को तत्काल अपनी ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राहत और बचाव कार्यों में पर्याप्त प्रशासनिक सहयोग मिल सके।
बालासोर, भद्रक और जाजपुर जैसे ज्यादा प्रभावित जिलों में राहत कार्यों की निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ IAS अधिकारियों को तैनात किया गया है। प्रशासन का फोकस फिलहाल लोगों को सुरक्षित निकालने और बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरी सेवाएं पहुंचाने पर है।
इसके साथ ही तटबंधों की सुरक्षा के लिए जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त इंजीनियरों को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों की निगरानी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
90 से ज्यादा बचाव टीमें मैदान में
बाढ़ और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। प्रशासन ने करीब 90 बचाव टीमों को तैनात किया है। इनमें ODRAF की 36, NDRF की 7 और अग्निशमन सेवा की 47 टीमें शामिल हैं।
इन टीमों को संवेदनशील और जोखिम वाले इलाकों में भेजा गया है। प्राथमिकता उन लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है, जिनके घरों में पानी घुस गया है या जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
रेस्क्यू टीमों के अलावा स्थानीय प्रशासन भी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। जरूरत पड़ने पर और टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जाने की तैयारी है।
बालासोर, भद्रक और जाजपुर में ज्यादा खतरा
भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर ओडिशा के उत्तरी हिस्सों में दिखाई दे रहा है। बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर जैसे जिलों में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।
इन क्षेत्रों में बैतरणी, ब्राह्मणी, सालंदी, जलका और बूढ़ाबलंग नदियों में उफान की वजह से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी लोगों को मौसम की जानकारी और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह
मौसम विभाग ने समुद्र में भी खराब परिस्थितियों को देखते हुए मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है। 16 से 18 अगस्त के बीच पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों से लगे समुद्री इलाकों में मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सख्त सलाह दी गई है।
कम दबाव के क्षेत्र के मजबूत होने और इसके डिप्रेशन में बदलने की संभावना के कारण समुद्र में तेज हवाएं और खराब मौसम की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में मछुआरों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
ओडिशा में इस समय सबसे बड़ी चुनौती लगातार हो रही बारिश के बीच राहत और बचाव अभियान को प्रभावी तरीके से जारी रखना है। एक तरफ बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, वहीं दूसरी तरफ अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अनुमान स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
5.15 लाख से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने और 2.37 लाख से अधिक लोगों के रेस्क्यू के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। राहत शिविरों में लोगों की जरूरतों को पूरा करना, बाढ़ प्रभावित गांवों तक मदद पहुंचाना, तटबंधों की निगरानी करना और संभावित नए प्रभावित इलाकों में पहले से तैयारी करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
फिलहाल मौसम विभाग के अलर्ट और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ओडिशा के कई हिस्सों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले 24 से 48 घंटे राज्य के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इस दौरान कम दबाव का क्षेत्र और मजबूत हो सकता है और बारिश का असर कई इलाकों में बढ़ सकता है।
