
दुबई/नई दिल्ली : मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवाह को सुरक्षित रखने के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। दुनिया की दिग्गज लॉजिस्टिक्स कंपनियों में शुमार और दुबई सरकार के स्वामित्व वाली डीपी वर्ल्ड (DP World) हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए यूएई के पूर्वी तट पर एक बिल्कुल नया पोर्ट और अत्याधुनिक कंटेनर टर्मिनल बनाने की योजना पर काम कर रही है।
प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस महापरियोजना का मुख्य उद्देश्य बार-बार होने वाले भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक शिपिंग में आने वाली रुकावटों से बचना तथा यूएई के आयात-निर्यात व्यापार को पूरी तरह से सुरक्षित रखना है।
हॉरमुज़ जलमार्ग को पूरी तरह बाईपास करेगा यह नया पोर्ट
वर्तमान में ईरान द्वारा हॉरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने और उसके जवाब में अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी (Blockade) लागू करने के कारण पूरी फारस की खाड़ी में मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है। ऐसे में यूएई का यह नया प्रोजेक्ट वैश्विक व्यापार के लिए एक लाइफलाइन साबित हो सकता है। इस योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- रणनीतिक लोकेशन: यह नया बहुउद्देशीय (Multipurpose) पोर्ट और कंटेनर टर्मिनल ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) के तट पर स्थित फुजैरा (Fujairah) एमिरेट के मौजूदा बंदरगाह के पास विकसित किया जाएगा।
- सीधे एंट्री और एग्जिट: ओमान की खाड़ी में होने के कारण, अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों को खाड़ी देशों में आने-जाने के लिए हॉरमुज़ के संकरे और असुरक्षित जलडमरूमध्य (चोकपॉइंट) में प्रवेश करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। वे सीधे यूएई के पूर्वी तट पर आ और जा सकेंगे।
- जमीनी रास्ते से सप्लाई चेन: फुजैरा पोर्ट पर उतरने वाले कंटेनरों को बिना किसी समुद्री जोखिम के, सड़क/जमीनी मार्ग (Overland) के जरिए दुबई, अबू धाबी और खाड़ी के अन्य प्रमुख देशों या शहरों तक बेहद आसानी और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकेगा।
जेबेल अली पोर्ट पर पड़ा 95% का बुरा असर, इसलिए त्वरित फैसला
डीपी वर्ल्ड द्वारा इस वैकल्पिक व्यापार गलियारे (Alternative Trade Corridor) पर काम तेज करने के पीछे एक बहुत बड़ा आर्थिक और व्यावसायिक कारण रहा है। दरअसल, मध्य पूर्व का सबसे बड़ा और दुनिया का एक प्रमुख कंटेनर हब माना जाने वाला दुबई का ऐतिहासिक जेबेल अली पोर्ट (Jebel Ali Port) पूरी तरह से हॉरमुज़ जलमार्ग के अंदर स्थित है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में जब अमेरिकी और इज़राइली सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में ईरान ने हॉरमुज़ जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया, तो जेबेल अली पोर्ट पर होने वाली व्यावसायिक और शिपिंग गतिविधियों में 90 से 95 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। संकट से पहले इस रणनीतिक रास्ते से रोजाना करीब 135 जहाज गुजरा करते थे, लेकिन युद्ध शुरू होने और हालिया हमलों के बाद यह संख्या घटकर बमुश्किल 40 जहाजों के आसपास सिमट कर रह गई है। इसी भारी नुकसान और अनिश्चितता को देखते हुए यूएई और डीपी वर्ल्ड ने अपनी रक्षात्मक रणनीति के तहत फुजैरा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है।
18 महीने में चालू हो सकता है नया टर्मिनल, सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश
कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वित्तीय विवरणों की जानकारी देते हुए बताया कि इस नए प्रोजेक्ट के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ आवश्यक समझौतों (Term Sheet) पर बातचीत अंतिम चरण में चल रही है। इस परियोजना के वित्तीय मॉडल (Financing) और ओनरशिप स्ट्रक्चर को भी जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। डीपी वर्ल्ड के अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद यह नई समुद्री सुविधा अगले 18 महीनों के भीतर पूरी तरह से चालू (Operational) हो सकती है।
शुरुआती चरण में इस परियोजना पर सैकड़ों मिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा, जिसे भविष्य में वैश्विक मांग और व्यापारिक आवश्यकताओं के अनुसार और भी ज्यादा विस्तारित किया जा सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि यह नया विस्तार जेबेल अली पोर्ट की जगह नहीं लेगा। जेबेल अली पोर्ट में दशकों की मेहनत से एक विशाल फ्री ट्रेड जोन और औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है, जो हमेशा दुबई की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ बना रहेगा।
संकट के समय फुजैरा और खोर फक्कन ने संभाला मोर्चा
जब से खाड़ी क्षेत्र में यह ताजा सुरक्षा संकट गहराया है, डीपी वर्ल्ड ने जेबेल अली आने वाले कई जहाजों और कार्गो को अस्थायी रूप से यूएई के पूर्वी तट पर स्थित फुजैरा और उसके पास के खोर फक्कन (Khor Fakkan) बंदरगाहों की तरफ मोड़ना शुरू कर दिया था। अचानक शिपिंग वॉल्यूम बढ़ जाने के कारण इन दोनों ही बंदरगाहों पर वर्तमान में भारी भीड़ (Congestion) देखने को मिल रही है, जो यह साबित करता है कि इस क्षेत्र में नए और बड़े टर्मिनल्स की तत्काल आवश्यकता है।
इस जरूरत को देखते हुए यूएई के पूर्वी तट पर एक बड़ी व्यापारिक प्रतिस्पर्धा भी शुरू हो गई है। शारजाह स्थित प्रमुख लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर ‘गल्फटेनर’ (Gulftainer) ने भी हाल ही में ओमान की खाड़ी में स्थित अपने खोर फक्कन पोर्ट की क्षमता को बढ़ाने के लिए 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के एक बहुत बड़े निवेश कार्यक्रम की घोषणा की है।
वैश्विक ऊर्जा और व्यापार जगत के लिए यूएई का रक्षात्मक कवच
फुजैरा एमिरेट पहले से ही यूएई के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बेहद रणनीतिक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है, क्योंकि अबू धाबी के कच्चे तेल (Crude Oil) का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही पाइपलाइनों के जरिए हॉरमुज़ को बाईपास करके सीधे फुजैरा से ही दुनिया भर में निर्यात किया जाता है। अब डीपी वर्ल्ड के इस नए बहुउद्देशीय कंटेनर पोर्ट प्रोजेक्ट के जुड़ जाने से फुजैरा न केवल तेल निर्यात का, बल्कि खाड़ी देशों के पूरे कमर्शियल कार्गो और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का एक सबसे सुरक्षित और मजबूत गढ़ बनकर उभरेगा।
वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई का यह कदम दूरदर्शी है, जो आने वाले समय में मध्य पूर्व के किसी भी बड़े युद्ध या हॉरमुज़ जलमार्ग के पूरी तरह बंद होने की स्थिति में भी दुनिया के व्यापार और अर्थव्यवस्था को मंदी के बड़े झटके से बचाने का काम करेगा।