लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने अब एक बेहद ही गंभीर और प्रशासनिक लापरवाही का रूप ले लिया है। इस दर्दनाक हादसे में दम घुटने और झुलसने के कारण मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 15 हो गया है। इस वीभत्स घटना के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के दावों और कार्यशैली की पोल पूरी तरह खुल चुकी है।

शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और गुस्से से भर देने वाले हैं। जिस तीन मंजिला कॉम्प्लेक्स में यह कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी चल रही थी, उसे कागजों पर कमर्शियल नहीं, बल्कि रिहायशी (Residential) मकान के तौर पर पास कराया गया था। यानी रहने के नक्शे पर नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से एक बड़ा व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे रहे।
अफसरों की नाक के नीचे चल रहा था मौत का खेल
इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे चंद रुपयों के लालच और अफसरों की मिलीभगत से रिहायशी इलाकों में मौत के ठेके चल रहे हैं। पुरनिया जैसे व्यस्त इलाके में मुख्य सड़क के किनारे बने इस कॉम्प्लेक्स में रोजाना सैकड़ों छात्र पढ़ने आते थे। नियमों के मुताबिक किसी भी कमर्शियल या कोचिंग सेंटर वाली बिल्डिंग में इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) का होना अनिवार्य है।
लेकिन इस बिल्डिंग में सुरक्षा के नाम पर एक सिंगल सीढ़ी के अलावा कुछ नहीं था। जब ग्राउंड फ्लोर की दुकान में आग लगी, तो वह इकलौती सीढ़ी भी आग और धुएं के गुबार से घिर गई। ऊपरी मंजिल पर मौजूद छात्रों के पास बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचा था। अगर बिल्डिंग में एक वैकल्पिक इमरजेंसी एग्जिट होता, तो शायद इन 15 मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।
हादसे के बाद अब जांच और कार्रवाई का दिखावा
हमेशा की तरह एक बड़े हादसे और 15 लोगों की मौत के बाद एलडीए और दमकल विभाग के अफसर नींद से जागे हैं। एलडीए के आला अधिकारियों ने आनन-फानन में मामले की जांच के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन कर दिया है। इसके साथ ही इलाके के अन्य कोचिंग सेंटरों और कमर्शियल बिल्डिंगों के नक्शों की स्क्रूटनी शुरू कर दी गई है।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब यह अवैध निर्माण हो रहा था और रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल एक्टिविटी चल रही थी, तब एलडीए के जोन अधिकारी और सुपरवाइजर क्या कर रहे थे? जनता का साफ कहना है कि सिर्फ बिल्डिंग मालिक या कोचिंग संचालक पर केस दर्ज करने से कुछ नहीं होगा, जब तक उन भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती जिन्होंने इस मौत की इमारत को बनने और चलने दिया।
विपक्ष ने साधा निशाना, सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग
इस बड़े अग्निकांड और एलडीए की इस लापरवाही ने उत्तर प्रदेश की सियासत को भी गरमा दिया है। विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया है। नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या का मामला है। रिहायशी इलाकों में चल रहे ऐसे अवैध कॉम्प्लेक्सों की सूची लंबी है, लेकिन राजनीतिक रसूख और भ्रष्टाचार के चलते इन पर कभी बुलडोज़र नहीं चलता।
अस्पताल में अभी भी कई छात्र जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, जिनमें से कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए एलडीए से 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार वाकई उन दोषी अफसरों पर गाज गिरेगी जिनकी लापरवाही ने 15 घरों के चिराग बुझा दिए, या फिर हर बार की तरह जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा।